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डैशबोर्ड, 24 घंटे निगरानी, ज्वाइंट ऑपरेशन, नेवी की तैनाती...होर्मुज में भारतीयों को बचाने के लिए प्लान रेडी, जानें
होर्मुज में भारतीय नाविकों को बचाने के लिए मोदी सरकार एक्शन मोड में आ गई है. सरकार ने एक एक्शन प्लान बनाया है, जिसके तहत ऐसे हमलों को रोकने से लेकर रेस्क्यू ऑपरेशन तक की पूरी तैयारी कर ली गई है. और इस पूरे प्लान में इंडियन नेवी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी.
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होर्मुज में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई और द्विपक्षीय हमलों में कई भारतीयों की जान जाने और सेलर्स (नाविकों) की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, भारत ने एक बड़ा फैसला लिया है. ख़बर के मुताबिक, भारत सरकार ने होर्मुज में भारतीय क्रू की मौजूदगी वाले जहाजों पर हो रहे हमलों की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों के साथ बैठक कर नई रणनीति तैयार की है.
ऐसे में सरकार की ओर से तैयार प्लान में इंडियन नेवी की भूमिका बढ़ गई है. 9 साल पहले मोदी सरकार द्वारा समुद्री चुनौतियों को देखते हुए ओमान, फारस की खारी में भारत के हितों को सेक्योर करने के लिए तैनात किए गए वॉरशिप, डेस्ट्रॉयर और जहाजों की भूमिका बढ़ जाएगी. सरकार ने नेवी को किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहने के आदेश दिए है.
पूरी ख़बर समझने के लिए नीचे वीडियो लिंक भी मौजूद है...
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आपको बता दें कि अमेरिका-ईरान तनाव का समुद्री व्यापार पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है. इसके कारण तेल-गैस की सप्लाई बाधित हो रही है. इतना ही नहीं, इन कार्गो को भारत तक लाने के लिए जिम्मेदार भारतीय क्रू मेंबर्स पर हुए हमलों ने शिपिंग ऑपरेशन में खलल पैदा कर दिया है. शिपिंग कंपनियां जहाज नहीं भेजना चाह रही हैं, इंश्योरेंस कंपनियों ने अपना प्रीमियम बढ़ा दिया है और नौकरी करने वाले क्रू मेंबर्स जॉब पर नहीं जाना चाह रहे हैं.
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इसी बीच, सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, सरकार ने कहा है कि मौजूदा हालात में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा उनकी टॉप प्रायोरिटी (सर्वोच्च प्राथमिकता) है. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी जरूरी है.
सरकार के फैसले के मुताबिक; होर्मुज, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में मौजूद हर भारतीय नाविक की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके लिए एक स्पेशल डिजिटल ऑपरेशनल डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा, जिसमें हर जहाज की लोकेशन, उसका मार्ग, चालक दल की संख्या, जहाज का मालिक, सुरक्षा स्तर और अगले गंतव्य जैसी जानकारी लगातार अपडेट होती रहेगी.
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इस व्यवस्था का मकसद किसी भी खतरे की स्थिति में फौरन जानकारी इकट्ठा करना और समुद्र में पहले से मौजूद नेवी के जरिए रेस्क्यू ऑपरेशन सहित अन्य मदद पहुंचाना है. अधिकारियों की मानें तो यह सिस्टम केवल भारतीय जहाजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन सभी विदेशी जहाजों पर भी लागू होगा, जहां भारतीय नाविक काम कर रहे हैं. इससे सरकार हर समय अपने नागरिकों की स्थिति पर नजर रख सकेगी.
भारतीय नाविकों और उनके परिवारों के लिए सरकार की नई सुरक्षा व्यवस्था
समुद्री यात्राओं के दौरान भारतीय नाविकों की सुरक्षा और किसी भी अनहोनी की स्थिति में उनके परिवारों की मदद के लिए सरकार ने कई बड़े और अहम कदम उठाए हैं. इसका मुख्य उद्देश्य संकट की घड़ी में परिवारों को भटकने से बचाना और समंदर में नाविकों की सुरक्षा को और मजबूत करना है.
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1. प्रभावित परिवारों की मदद के लिए 'डेडिकेटेड संपर्क अधिकारी'
अगर कोई नाविक घायल होता है, लापता हो जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. सरकार ने इनके लिए सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट पर्सन नियुक्त करने का फैसला किया है, जो परिवार के लिए एक विशेष संपर्क अधिकारी के तौर पर सरकार और परिवार के बीच सीधी कड़ी का काम करेगा.
हर कदम पर मदद: यह अधिकारी मेडिकल जानकारी, अस्पताल के अपडेट, यात्रा दस्तावेज बनवाने और नाविक को स्वदेश लाने में पूरी मदद करेगा.
आर्थिक और कानूनी सहायता: मुआवजा, बीमा का पैसा, बकाया वेतन और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कराने की जिम्मेदारी भी इसी अधिकारी की होगी.
2. फौरन एक्शन के लिए एजेंसियों के बीच तालमेल
अब आपात स्थिति में फैसले लेने में कोई देरी नहीं होगी, क्योंकि कई विभाग एक टीम की तरह काम करेंगे.
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ज्वाइंट ऑपरेशन: इस योजना में शिपिंग मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, भारतीय नौसेना, महानिदेशक शिपिंग, पेट्रोलियम मंत्रालय और पश्चिम एशिया में स्थित भारतीय दूतावास शामिल हैं.
नौसेना की निगरानी: भारतीय नौसेना समुद्री गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगी, जबकि दूतावास स्थानीय प्रशासन और बंदरगाह अधिकारियों के साथ कोऑर्डिनेट करेंगे.
फायदा: एजेंसियों के बीच लगातार जानकारी साझा होने से खतरे की स्थिति में तुरंत और सटीक कार्रवाई की जा सकेगी.
3. खतरे वाले रास्तों का पहले होगा 'सुरक्षा मूल्यांकन'
किसी भी नाविक को बिना तैयारी के अनावश्यक जोखिम में नहीं डाला जाएगा.
यात्रा से पहले जांच: संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में जाने वाले हर जहाज का पहले एक विस्तृत सुरक्षा मूल्यांकन (Security Assessment) किया जाएगा.
विशेषज्ञ लेंगे फैसला: जहाज के कप्तान, सुरक्षा एक्सपर्ट और संबंधित अधिकारी मिलकर यह तय करेंगे कि मौजूदा हालात में उस रास्ते पर जाना सुरक्षित है या नहीं.
रास्ता बदलने की सलाह: अगर हमले या संघर्ष का खतरा ज्यादा होगा, तो जहाज को दूसरा रास्ता लेने या यात्रा को कुछ समय के लिए टालने के निर्देश दिए जाएंगे.
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4. शिपिंग कंपनियों और एजेंसियों को सख्त चेतावनी
जहाज मालिकों और नाविकों की भर्ती करने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी अब और स्पष्ट तय कर दी गई है.
पारदर्शिता जरूरी: किसी भी नाविक को खतरे वाले इलाके में भेजने से पहले, कंपनियों को उन्हें संभावित जोखिमों और आपातकालीन बचाव के तरीकों की पूरी जानकारी देनी होगी.
संसाधनों की जांच: कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जहाज पर पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, संचार (Communication) व्यवस्था और बेहतरीन मेडिकल सुविधाएं मौजूद हों.
लापरवाही पर एक्शन: सरकार ने कंपनियों से सुरक्षा नियमों के पालन की रिपोर्ट मांगी है. किसी भी स्तर पर चूक या लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
इसके अलावा, सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री या मैरीटाइम एजेंसियों और संगठनों के समक्ष भी यह मुद्दा उठाया है कि समुद्री जहाजों और कार्गो शिप पर इस तरह के हमले गलत हैं. इससे वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है. इनकी सुरक्षा और सेफ पैसेज (सुरक्षित मार्ग) सुनिश्चित करना सबकी जिम्मेदारी है.
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होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की नहीं होगी तैनाती रोकने, DGMA के निर्देश
इसी बीच नौवहन महानिदेशालय (डीजीएमए) ने खाड़ी क्षेत्र में बिगड़ते सुरक्षा हालात का हवाला देते हुए जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और भर्ती एवं तैनाती सेवा लाइसेंस (आरपीएसएल) कंपनियों को अगले आदेश तक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती रोकने का निर्देश दिया है.
समुद्री नियामक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि यह कदम संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है.
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डीजीएमए के अनुसार, हाल के दिनों में मोम्बासा बी, अल बह्याह, जीएफएस गैलेक्सी, एमटी वेडयान और अल रेकय्यात जैसे व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों से इस क्षेत्र में काम कर रहे नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों के सामने जोखिम काफी बढ़ गया है.
और क्या है एडवाइजरी में?
एडवाइजरी में फारस की खाड़ी, होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में परिचालन कर रहे जहाजों के कप्तानों को भी उच्च स्तर की सुरक्षा सतर्कता बनाए रखने, नौवहन संबंधी चेतावनियों और सुरक्षा परामर्शों पर लगातार नजर रखने और अंतरराष्ट्रीय जहाज एवं बंदरगाह सुविधा सुरक्षा (आईएसपीएस) संहिता के तहत जहाज सुरक्षा योजना और अन्य सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है.
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हालांकि, डीजीएमए ने स्पष्ट किया है कि अगले आदेश तक जहाज मालिक, जहाज प्रबंधन कंपनियां और आरपीएसएल कंपनियां होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली यात्राओं पर भारतीय नाविकों की तैनाती नहीं करें.
कम्युनिकेशन सेंटर भी स्थापित करने के दिए निर्देश
आपातकालीन सहायता के लिए डीजीएमए ने नाविकों और जहाजों से कहा है कि वे तुरंत डीजी कम्युनिकेशन सेंटर (एमएमडीएसी) या भारतीय नौसेना के इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) से संपर्क करें.
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खाड़ी में बदलते हालात पर सरकार की पैनी नजर
डीजीएमए ने कहा कि वह खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बदल रहे सुरक्षा हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
यह एडवाइजरी ऐसे समय में जारी की गई है, जब ईरान के सैन्य ठिकानों पर अमेरिका के हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है. इससे क्षेत्र में व्यापक संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट से होने वाले समुद्री व्यापार में संभावित व्यवधान की आशंका बढ़ गई है.
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रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने बुधवार को ईरान के बंदरगाहों पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू करने के बाद उसके तटीय रक्षा और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया. इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र से होने वाले ऊर्जा निर्यात को सीमित करने की चेतावनी देते हुए कहा कि वह अमेरिका के साथ अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है.
इससे पहले होर्मुज स्ट्रेट के पास हुए हमले में एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत पर विदेश मंत्रालय ने गहरी चिंता जताई थी. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि भारत ने इस घटना पर ईरान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और ऐसे हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है.
होर्मुज में भारतीयों पर हमले को लेकर गुस्से में भारत
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विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि ईरान के उप मिशन प्रमुख को तलब किए जाने के बाद हमने एक आधिकारिक बयान जारी किया था. हमने उनके सामने अपनी गहरी चिंता जताई और जो घटना हुई, उसकी कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि इस हमले में हमने एक अनमोल भारतीय नागरिक को खो दिया है. कई भारतीय नागरिक घायल हुए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर है.
भारत ने ईरानी राजदूत को किया तलब
जायसवाल ने बताया कि हमने इस मामले पर ईरानी पक्ष के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और साफ कहा है कि जिन हमलों की हमने निंदा की है, उन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए.
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ओमान के समुद्री क्षेत्र में होर्मुज स्ट्रेट में दो ईरानी क्रूज मिसाइलों ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दो टैंकरों को निशाना बनाया. अमीरात न्यूज एजेंसी ने मंगलवार को रक्षा मंत्रालय के हवाले से बताया कि ईरानी हमले में एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हो गए. रिपोर्ट के अनुसार, मोम्बासा और अल बहियाह नामक दोनों टैंकर होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिणी मार्ग से गुजर रहे थे. हमले के दौरान दोनों टैंकर प्रभावित हुए.
हमले में मोम्बासा पर सवार एक भारतीय चालक दल के सदस्य की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल हुए. इनमें चार की हालत गंभीर बताई गई है. समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, घायलों में छह भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं.
मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में कमर्शियल शिपिंग और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बंद होना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार इस क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से स्वतंत्र और निर्बाध आवागमन तथा व्यापार को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके.
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