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पाकिस्तान से आए दलित हिंदुओं के हक में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, विस्थापन पर लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब

देश की शीर्ष अदालत में पाकिस्तान से आए दलित हिंदूू शरणार्थियों की शरण का मुद्दा उठा. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से ऐसे परिवारों को स्थायी आवास उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं.

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Supreme Court on Dalit Hindus: देश की राजधानी दिल्ली में पिछले कुछ महीनों से जारी अतिक्रमण अभियान पर सुप्रीम कोर्ट ने ब्रेक लगा दिया है. इस ड्राइव में उन परिवारों के ठिकानों को हटाया जा रहा था. जिनके पास भारत की नागरिकता नहीं है या नागरिकता बाद में दी गई है, लेकिन उन पर अभी भी पाकिस्तानी होने का ठप्पा लगा हुआ है. कोर्ट ने पाकिस्तान से निर्वासित होकर आए दलित हिंदुओं की हालत पर चिंता जताई और उनके हक में बड़ा फैसला सुनाया. 

सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान से आए दलितों की हालत पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए कहा, पाकिस्तान से निर्वासित होकर आए दलितों को सिर्फ भारतीय नागरिकता दे देना ही काफी नहीं है.  सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे लोगों को रहने के लिए सम्मानजनक आवास की सुविधा उपलब्ध हो. 

अतिक्रमण हटाओ मुहिम पर लगाई रोक 

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दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज के पास हो रहे अतिक्रमण अभियान को लेकर की. मामले की सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह ने मामले पर सुनवाई की. कोर्ट ने मजनूं का टिला इलाके में रहने वाले लोगों के विस्थापन की आशंका जताई. बेंच ने ऐसे परिवारों को लेकर कहा, इन्हें नागरिकता मिलने के बाद भी विस्थापन का खतरा मंडरा रहा है. 

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इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण हटाओ मुहिम पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने को कहा है. शीर्ष अदालत के इस फैसले से करीब 250 से ज्यादा परिवारों के करीब एक हजार लोगों को राहत मिली है. तब तक इन परिवारों को विस्थापित करने की किसी भी तरह की सरकारी मुहिम पर रोक रहेगी. 

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अब चार हफ्तों में केंद्र सरकार को कोर्ट में यह बताना होगा कि इन नागरिकों के स्थायी पुनर्वास और आवास के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सिग्नेचर ब्रिज के पास अस्थायी रूप से रह रहे इन लोगों को बिना किसी ठोस योजना के हटाना उनके अधिकारों का उल्लंघन होगा. 

पाकिस्तान में हुआ उत्पीड़न 

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जानकारी के मुताबिक, जिन परिवारों के विस्थापन की बात की जा रही है. वो पाकिस्तान से आए हैं. बताया गया कि ये दलित हिंदू परिवार पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न का शिकार रहे थे. भारत आने के बाद इन परिवारों ने दशकों तक शरणार्थियों का जीवन गुजारा. बाद में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत इन्हें भारत की नागरिकता मिली, लेकिन इनके स्थायी आवास का संकट हमेशा बना रहा. वहीं, उनके अस्थायी ठिकाने पर भी अतिक्रमण की तलवार लटकी रही. जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सरकार से दलित हिंदुओं के स्थायी आवास पर कदम उठाने की योजना पर जवाब मांगा है. 

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