"नहीं बोल सकते, ना बोल दिया है...", तेजस्वी के बयान पर उछलकर खड़े हुए राहुल गांधी, गृह मंत्री अमित शाह भी गुस्से तमतमा गए
बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने UPA सरकार के कार्यकाल की तुलना में आतंकवाद और उग्रवाद की स्थिति में गिरावट के रुझान पर भी जोर दिया। इस दौरान सदन में भारी हंगामा हुआ. राहुल गांधी सदन में भड़क गए और कहा कि ये हमें एंटी नेशनल कह रहे हैं, जिस पर गृह मंत्री शाह ने जोरदार जवाब दिया.
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भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने सोमवार को यपीए सरकार के समय राष्ट्रपति के भाषण और एनडीए सरकार के समय के भाषण के बीच बड़ा अंतर बताया. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले 10 सालों में सबसे ईमानदार और भरोसेमंद नीतियां लागू की हैं. लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस में हिस्सा लेते हुए भाजपा सांसद सूर्या ने कहा कि यह संबोधन देश के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था. इस दौरान उन्होंने आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कांग्रेस और यूपीए सरकार को जोरदार घेरा.
युवाओं को सशक्त बना रही मोदी सरकार: तेजस्वी सूर्या
उन्होंने कहा कि यह नरेंद्र मोदी सरकार का 12वां साल है और इस सदन में राष्ट्रपति का पहला भाषण ऐसे समय में आया है जब आज भारत, वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है. यह ऐसे समय में आया है जब भारत ने 24 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है, जब हमारे लोगों की आकांक्षाओं को पंख दिए जा रहे हैं, जब युवा शक्ति को इस सभ्यता के भविष्य के मशाल वाहक बनने के लिए सशक्त बनाया जा रहा है.
उन्होंने सरकार को मिल रहे लगातार राजनीतिक समर्थन की ओर इशारा किया. सूर्या ने कहा, "पिछले 12 सालों में हमारी सरकार और हमारे प्रधानमंत्री की लोकप्रियता और राजनीतिक पूंजी लगातार बढ़ी है. यह प्रधानमंत्री के समर्पण और विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है कि उन्हें एक या दो बार नहीं, बल्कि लगातार तीसरी बार भारी बहुमत से प्रधानमंत्री चुना गया है."
यूपीए के कार्यकाल से तुलना करते हुए तेजस्वी सूर्या ने कहा कि मौजूदा राष्ट्रपति का संबोधन हाल के वर्षों में देश में हुए बदलावों के पैमाने को उजागर करता है. उन्होंने इसे राष्ट्र द्वारा की गई महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिबिंब बताया. साथ ही, इसे देश के लिए एक खोए हुए अवसर के दशक और आज, पीएम नरेंद्र मोदी के तहत परिवर्तन के दशक का एक स्पष्ट उदाहरण भी बताया.
सूर्या ने कहा कि दोनों समय के बीच सबसे बड़ा फर्क यह है कि हाल के राष्ट्रपतियों के भाषणों में भ्रष्टाचार का जिक्र नहीं होता. उन्होंने कहा कि पिछले दशक में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पिछले 10 सालों के राष्ट्रपति के भाषण में भ्रष्टाचार, घोटालों या स्कैंडल का कोई ज़िक्र नहीं है, क्योंकि हमने पिछले 10 सालों में सबसे ईमानदार और पारदर्शी सरकार दी है. यह इस सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है.
अपनी बात पर जोर देने के लिए भाजपा सांसद ने 2011 के राष्ट्रपति के भाषण का एक पैराग्राफ पढ़ा, जिसमें भ्रष्टाचार का जिक्र था और इसकी तुलना मौजूदा सरकार के कार्यकाल के दौरान की स्थिति से की.
हाल के सालों में भारत के आर्थिक प्रदर्शन पर राष्ट्रपति की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए सूर्या ने फिर से इसकी तुलना यूपीए के कार्यकाल से की. साथ ही दावा किया कि पिछले दशक में निराशा का माहौल था. उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के 10 सालों के दौरान, आर्थिक चर्चा मंदी, महंगाई, चिंता, युवाओं के पास नौकरी न होना और सबसे जरूरी, बहाने के इर्द-गिर्द घूमती रही.
उन्होंने माना कि एनडीए सरकार को भी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन कहा कि तरीका अलग था. सूर्या ने आगे कहा कि ऐसा नहीं था कि पिछले 10 सालों में हमें किसी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा. हमने सदी में एक बार आने वाली महामारी का सामना किया. लेकिन हमने महामारी की वजह से अपने घरेलू आर्थिक रिकॉर्ड को दोष नहीं दिया.
राहुल गांधी को किसने बोला राष्ट्रविरोधी?
राहुल गांधी ने इस दौरान तेजस्वी सूर्या के भाषण पर आपत्ति जताई और कहा कि संसद में “ये हमारे चरित्र पर बोल रहे थे. ये हमारी पॉलिसीज़ पर नहीं बोल रहे थे. ये कह रहे थे कि हम एंटी-नेशनल हैं.” इस पर गृह मंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि “माननीय सदस्य तेजस्वी सूर्या का भाषण ध्यान से सुना गया है. उन्होंने कहीं भी विपक्ष की देशभक्ति या चरित्र पर कोई सवाल नहीं उठाया है.”
राहुल गांधी को अमित शाह ने दिया जवाब
उन्होंने आगे कहा कि “उन्होंने 2004 से 2014 के कालखंड के भाषणों के संदर्भ में यह बात कही है कि देशभक्ति, देश की संस्कृति, देश की भाषा और देश की परंपराओं को सशक्त करने वाली बातें सरकार की ओर से राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण में नहीं रखी गईं. उन्होंने सरकारों की मंशा पर सवाल उठाए हैं, न कि विपक्ष की देशभक्ति पर.”
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि “माननीय विपक्ष के नेता यह कह रहे हैं कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है, जबकि अध्यक्ष महोदय ने स्पष्ट व्यवस्था दी है कि नरवणे जी की किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है और किसी मैगज़ीन को कोट नहीं किया जा सकता.”
किस बात पर जरदस्त भड़के अमित शाह?
उन्होंने आगे सवाल उठाया कि “फिर उन्होंने मैगज़ीन और नरवणे जी की किताब के अलावा ‘कैलाश रिज में टैंक’ की बात कहां से लाई? यह लिखा हुआ नहीं पढ़ा जा सकता. अध्यक्ष जी ने मना किया है. नहीं बोल सकते. अध्यक्ष जी, आपने स्पष्ट व्यवस्था दी है.”
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इसके बाद गृह मंत्री ने कहा,“माननीय अध्यक्ष जी, यह मेरा व्यवस्था का सवाल है. ये सदस्य नियम 349, 358 और अब 389—तीनों के तहत अध्यक्ष की रूलिंग का उल्लंघन कर रहे हैं. माननीय विपक्ष के नेता नियम 389 का भी उल्लंघन कर रहे हैं.” अंत में उन्होंने तल्ख लहजे में सवाल उठाया कि आखिर “हम सदन को किस तरह से चलाना चाहते हैं?
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