ममता सरकार को हाई कोर्ट से कड़ी फटकार, विपक्षी दलों के कार्यक्रमों की सुरक्षा पुख्ता करने के निर्देश, जानें क्यों आया ये फैसला

कलकत्ता हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस दोनों को विपक्षी पार्टियों के चुने हुए प्रतिनिधियों के सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.

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02 Feb 2026
( Updated: 02 Feb 2026
06:54 PM )
ममता सरकार को हाई कोर्ट से कड़ी फटकार, विपक्षी दलों के कार्यक्रमों की सुरक्षा पुख्ता करने के निर्देश, जानें क्यों आया ये फैसला
Calcutta High Court And Mamata Banerjee (File Photo)

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने राज्य की कानून व्यवस्था और राजनीतिक कार्यक्रमों में होने वाले व्यवधानों पर कड़ा रुख अपनाया है. इसके साथ ही हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को दिशा-निर्देश भी दिए हैं.

विपक्षी दलों के कार्यक्रमों की: कलकत्ता हाईकोर्ट 

आपको बताएं कि सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने दो टूक कहा कि राज्य सरकार, पुलिस और कोलकाता पुलिस को विपक्षी दलों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के सार्वजनिक और राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी. इतना ही नहीं खंडपीठ ने पुलिस प्रशासन को ये भी निर्देशित किया है कि भविष्य में ऐसे किसी भी कार्यक्रम में सुरक्षा की कोई चूक नहीं होनी चाहिए.

इस फैसले को बंगाल की राजनीति में विपक्षी दलों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो अक्सर सुरक्षा कारणों या प्रशासनिक बाधाओं के चलते कार्यक्रमों के आयोजन में कठिनाई का आरोप लगाते रहे हैं.

सुवेंदु अधिकारी की याचिका पर आदेश

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने पिछले साल अक्टूबर में कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कोर्ट से दखल देने की मांग की थी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भाजपा के विधायकों और सांसदों, जिनमें कुछ केंद्रीय राज्य मंत्री भी शामिल हैं, के सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रमों को सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से बेवजह दुश्मनी और विरोध का सामना न करना पड़े.

डिवीजन बेंच का बड़ा फैसला

मामले की सुनवाई के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने कोलकाता पुलिस और पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि वे विपक्षी पार्टियों के चुने हुए जन प्रतिनिधियों के सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करें. बेंच ने राज्य और शहर की पुलिस को यह भी निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई की तारीख 18 फरवरी तक इस मामले में कोर्ट के निर्देश का सख्ती से पालन करें.

सुवेंदु की याचिका में क्या था?

नेता विपक्ष ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि भाजपा के चुने हुए जन प्रतिनिधियों के सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रमों को अक्सर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से दुश्मनी, हिंसा और विरोध का सामना करना पड़ता है. अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रम के बारे में पुलिस को पहले से सूचना देने के बावजूद ऐसी दुश्मनी सामने आई. उन्होंने याचिका में यह भी दावा किया कि ऐसी घटनाओं ने राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस और प्रशासन की विफलता को उजागर किया है. उनके अनुसार, 2021 में राज्य में पिछले विधानसभा चुनावों के बाद से ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं.

विपक्षी दलों के नेताओं पर होता रहा है बंगाल में हमला

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बता दें कि 2021 से विपक्ष के नेता के काफिले पर भी कई बार हमला हुआ है, जिसका आरोप सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर लगा है. इन हमलों के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी. पिछले साल भाजपा के लोकसभा सांसद खगेन मुर्मू और पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा की विधायक दल के मुख्य सचेतक शंकर घोष के काफिले पर भी हमला हुआ था, जिसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.

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