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UP में स्लीपर बसों के बदले नियम, परिवहन अधिकारियों को मिले सख्त निर्देश

UP: जो बसें तय सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करेंगी, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी. जरूरत पड़ने पर ऐसी बसों को जब्त भी किया जाएगा, ताकि यात्रियों की जान के साथ कोई खिलवाड़ न हो.

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09 Jan 2026
( Updated: 09 Jan 2026
10:03 AM )
UP में स्लीपर बसों के बदले नियम, परिवहन अधिकारियों को मिले सख्त निर्देश
Image Source: Social Media

UP Sleeper Bus New Rules: प्रदेश में स्लीपर बसों और ठेका बसों से सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सरकार अब पूरी तरह सख्त हो गई है. आए दिन बसों में होने वाले हादसों और यात्रियों की जान को होने वाले खतरे को देखते हुए परिवहन विभाग ने बड़ा फैसला लिया है. साफ शब्दों में कहा गया है कि जो बसें तय सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करेंगी, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी. जरूरत पड़ने पर ऐसी बसों को जब्त भी किया जाएगा, ताकि यात्रियों की जान के साथ कोई खिलवाड़ न हो.

परिवहन आयुक्त ने दिए सख्त निर्देश

इस संबंध में परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने प्रदेश के सभी परिवहन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए है. ये निर्देश राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दर्ज एक मामले के बाद जारी किए गए हैं. आयोग में बसों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद सरकार ने तुरंत कदम उठाया. अब प्रदेश में चल रही सभी स्लीपर बसों में तय सुरक्षा मानकों को लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है और इसमें किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी.

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स्लीपर बसों में तुरंत हटेंगे खतरनाक उपकरण


सरकार ने साफ किया है कि केंद्रीय सड़क अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा बताए गए सभी सुरक्षा उपायों का पालन कराया जाएगा. इसके तहत सभी स्लीपर बसों को बुलाकर चालक के केबिन में लगा विभाजन द्वार हटवाया जाएगा. इसके अलावा बसों की सभी बर्थ में लगे स्लाइडर भी तुरंत हटाने के आदेश दिए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि हादसे के समय ये स्लाइडर यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं, इसलिए इन्हें हटाना बेहद जरूरी है.

हर बस में अग्निशमन यंत्र होगा अनिवार्य

अब प्रदेश की हर स्लीपर बस में अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) लगाना जरूरी कर दिया गया है. बस संचालकों को इसके लिए एक महीने का समय दिया गया है. हर बस में कम से कम 10 किलोग्राम क्षमता का अग्निशमन यंत्र होना चाहिए और उसकी नियमित जांच भी करानी होगी. यदि किसी बस में यह व्यवस्था नहीं पाई गई, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

अवैध रूप से बदली गई बसें होंगी सड़क से बाहर


जो बसें तय मानकों से ज्यादा चेसिस से बॉडी बढ़ाकर बनाई गई हैं, उन्हें तुरंत सड़क से हटा दिया जाएगा. ऐसी बसें हादसे की स्थिति में ज्यादा खतरनाक साबित होती हैं. अब किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों को सीधे संचालन से बाहर किया जाएगा.

पंजीकरण नियम भी किए गए सख्त


सरकार ने बसों के पंजीकरण को लेकर भी नियम सख्त कर दिए हैं. अब सभी प्रकार की बसों का पंजीकरण केवल प्रपत्र 22 और 22ए पर ही किया जाएगा. पंजीकरण से पहले मान्यता प्राप्त परीक्षण एजेंसी से स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही बस का पूरा लेआउट ड्राइंग देना होगा, जिसमें बस के माप, दरवाजों की स्थिति, आपातकालीन निकास और छत पर बने हैच की पूरी जानकारी शामिल रहेगी.

निर्माता की मान्यता और रिपोर्ट होगी जरूरी


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पंजीकरण के समय बस बॉडी निर्माता की मान्यता की वैधता भी जांची जाएगी. सभी संभागीय परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इसकी पूरी रिपोर्ट तैयार कर शुक्रवार तक परिवहन आयुक्त कार्यालय को भेजें. सरकार का साफ कहना है कि इन नियमों का सख्ती से पालन कराकर ही यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी.

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