'PM के साथ कुछ भी हो सकता था...', सदन में हंगामे के बीच के प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा को लेकर ओम बिरला का चौंकाने वाला दावा
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण न हो पाना अब राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि 4 फरवरी को संभावित अव्यवस्था की आशंका के चलते उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री से सदन में न आने का आग्रह किया था.
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संसद के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है. गुरुवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण न हो पाना अब देश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है. यह मामला केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इस पर आरोप प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है. इस बीच लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला का बड़ा बयान भी सामने आया है. उन्होंने कहा कि 4 फरवरी को प्रधानमंत्री से उन्होंने ही सदन में न आने का आग्रह किया था.
PM मोदी के साथ कुछ भी हो सकता था: स्पीकर
सदन की कार्यवाही स्थगित होने से ठीक पहले लोकसभा अध्यक्ष ने गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को एक अहम टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि सदन में उस दिन जो घटनाक्रम हुआ, वह लोकतांत्रिक परंपराओं पर एक काले धब्बे जैसा है. अध्यक्ष ने बताया कि उन्हें विश्वसनीय सूचनाएं मिली थीं, जिनके अनुसार कांग्रेस के कुछ सांसद प्रधानमंत्री के नज़दीक पहुंचकर कोई अप्रत्याशित और गंभीर घटना को अंजाम दे सकते थे. उन्होंने कहा कि यदि ऐसी कोई घटना घटती, तो वह बेहद शर्मनाक और निंदनीय होती. इसी आशंका के चलते उन्होंने प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया, जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया.
मेरे चैंबर में भी विपक्षी सांसदों ने किया हंगामा: ओम बिरला
लोकसभा स्पीकर ने यह भी बताया कि कुछ सांसद सदन के चैंबर में आकर हंगामा करने लगे थे और पहले से यह संकेत मिल रहे थे कि कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दल प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान व्यवधान पैदा करने की योजना बना रहे हैं. अध्यक्ष ने संसदीय मर्यादाओं पर जोर देते हुए कहा कि संविधान ने संसद के सभापति को एक सम्मानजनक और गरिमामय भूमिका सौंपी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मतभेदों को इस तरह सदन की कार्यवाही में लाना संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है.
विपक्ष पर BJP का बड़ा आरोप
बीजेपी सांसदों ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया है. हिमाचल प्रदेश के मंडी से लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को जानबूझकर बोलने से रोका गया. कंगना का दावा है कि जिस समय प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देना था, उससे पहले कांग्रेस सांसदों ने उनका रास्ता पूरी तरह घेर लिया था. उनके अनुसार, विपक्ष की योजना सिर्फ हंगामा करने की नहीं बल्कि सीधे प्रधानमंत्री पर हमला करने की थी.
कंगना रनौत ने क्या क्या?
कंगना रनौत ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष पर भी दबाव बनाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि विपक्ष की महिला सांसद उस स्थान पर इकट्ठा हो गई थीं जहां प्रधानमंत्री आमतौर पर बैठते हैं. ऐसे तनावपूर्ण माहौल में प्रधानमंत्री का भाषण न होना एक जिम्मेदार और सही फैसला था. उनका कहना था कि सदन की गरिमा और सुरक्षा को देखते हुए यह कदम जरूरी था.
मनोज तिवारी ने कहा विपक्ष ने महिलाओं को किया आगे
दिल्ली से बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को मजबूरन रुकना पड़ा. उन्होंने बताया कि करीब सात से आठ महिला सांसद आगे आकर उस पूरे क्षेत्र को घेर चुकी थीं, जहां प्रधानमंत्री बैठते हैं और जहां से उनका आना जाना होता है. ऐसे हालात में सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल पाना संभव नहीं था. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस सांसद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का अवसर न मिलने से नाराज थे. इसी नाराजगी के चलते कांग्रेस की महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री की कुर्सी का घेराव किया. हालात बिगड़ते देख लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी. हालांकि प्रधानमंत्री संसद भवन में मौजूद थे और जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार थे.
बताते चलें कि संसदीय इतिहास में यह बेहद दुर्लभ घटना मानी जा रही है, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान प्रधानमंत्री का भाषण नहीं हो पाया. यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि सत्ता पक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा बता रहा है, जबकि विपक्ष अपनी नाराजगी को जायज ठहराने में जुटा हुआ है.
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