'1.4 अरब भारतीयों की उर्जा सुरक्षा...', रूस से तेल खरीद Zero करने पर आया मोदी सरकार का बयान, जानें क्या कहा!

हाल ही में भारत और रूस के बीच हुए व्यापार समझौते के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा. एक ओर जहां रूस ने इस दावे को खारिज कर दिया है तो दूसरी ओर अब भारत सरकार ने भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है.

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05 Feb 2026
( Updated: 05 Feb 2026
06:56 PM )
'1.4 अरब भारतीयों की उर्जा सुरक्षा...', रूस से तेल खरीद Zero करने पर आया मोदी सरकार का बयान, जानें क्या कहा!
S Jaishankar / MEA (File Photo)

अमेरिका के साथ ट्रेड डील और भारत के रूस से तेल खरीद शून्य करने के ट्रंप के दावे पर अब विदेश मंत्रालय ने भी अपना रुख साफ किया है और अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. मंत्रालय ने रूस-वेनेजुएला से ऑयल ट्रेड और अन्य रिश्तों को लेकर हुए सवाल पर बड़ी बात कही है.

आपको बताएं कि भारत सरकार के अनुसार देशवासियों की एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. वहीं ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना बाजार की स्थितियों और अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता आधारित रणनीति का हिस्सा है. विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को नई दिल्ली में एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान ये बात कही.

भारत की उर्जा सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च सुरक्षा: MEA

उन्होंने कहा, " जहां तक ​​भारत की एनर्जी सिक्योरिटी या एनर्जी सोर्सिंग का सवाल है, सरकार ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1.4 अरब भारतीयों की एनर्जी सिक्योरिटी सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. ऑब्जेक्टिव मार्केट स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल के हिसाब से एनर्जी सोर्सिंग में विविधता लाना इसे सुनिश्चित करने की हमारी रणनीति का मुख्य हिस्सा है. भारत के सभी फैसले इसी मकसद को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं और आगे भी लिए जाएंगे.”

वेनेजुएला को लेकर क्या बोला विदेश मंत्रालय?

वेनेजुएला के साथ भारत के एनर्जी संबंधों पर एक और सवाल का जवाब देते हुए, एमईए प्रवक्ता ने कहा कि यह दक्षिण अमेरिकी देश लंबे समय से कच्चे तेल और व्यापार और निवेश क्षेत्रों में भारत का प्रमुख भागीदार रहा है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई दिल्ली वेनेजुएला सहित किसी भी कच्चे तेल की आपूर्ति के विकल्पों की कमर्शियल व्यवहार्यता का आकलन करने के लिए तैयार है.

जायसवाल ने कहा, “जहां तक ​​वेनेजुएला का सवाल है, यह एनर्जी के क्षेत्र में, व्यापार और निवेश दोनों तरफ से हमारा लंबे समय से भागीदार रहा है. हम 2019-20 तक वेनेजुएला से एनर्जी या कच्चा तेल आयात कर रहे थे, और उसके बाद, हमें इसे रोकना पड़ा. फिर से, हमने 2023-2024 में वेनेजुएला से तेल खरीदना शुरू किया, लेकिन प्रतिबंधों के फिर से लगाए जाने के कारण इसे रोकना पड़ा.”

भारत वेनेजुएला में बड़ी भूमिका के लिए तैयार

उन्होंने आगे कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, भारतीय पीएसयू ने वेनेजुएला की नेशनल ऑयल कंपनी, पीडीवीएसए के साथ साझेदारी स्थापित की है, और हमारे पीएसयू 2008 से देश में मौजूद हैं. एनर्जी सिक्योरिटी के प्रति हमारे दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत वेनेजुएला सहित किसी भी कच्चे तेल की आपूर्ति करने वालों के विकल्पों के कमर्शियल फायदों का पता लगाने के लिए तैयार है.”

पीएम मोदी की हुई वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी एलोइना रोड्रिग्ज गोमेज से बात

पिछले हफ्ते, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी एलोइना रोड्रिग्ज गोमेज का फोन आया था, और दोनों नेताओं ने अपनी बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच साझेदारी को गहरा करने पर विस्तार से चर्चा की थी.

पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति, डेल्सी रोड्रिग्ज के फोन कॉल का जिक्र किया था. उन्होंने लिखा, "हम इस बात पर सहमत हुए कि आगामी वर्षों में भारत-वेनेजुएला संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के साझा विजन के साथ, हम सभी क्षेत्रों में अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को और गहरा और व्यापक करेंगे."

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अनुसार, दोनों नेता व्यापार और निवेश, ऊर्जा, डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य, कृषि और लोगों के बीच संबंधों सहित सभी क्षेत्रों में भारत-वेनेजुएला साझेदारी को और बढ़ाने और गहरा करने पर सहमत हुए हैं.

भारत के साथ ऑयल ट्रेड पर रूस ने क्या कहा?

वहीं रूस ने कहा कि भारत किसी भी सप्लायर से क्रूड खरीदने के लिए आजाद है और एनर्जी सोर्सिंग पर उसके फैसलों में कुछ भी अजीब नहीं है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि भारत पहले से कई देशों से तेल खरीदता रहा है और रूस उसका अकेला क्रूड सप्लायर नहीं है. उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि भारत ने व्यापार समझौते के तहत रूसी तेल की खरीद बंद करने का वादा किया है.

पेसकोव ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, "हम, बाकी सभी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञों के साथ, अच्छी तरह जानते हैं कि रूस भारत को तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का अकेला सप्लायर नहीं है. भारत ने हमेशा ये प्रोडक्ट्स दूसरे देशों से खरीदे हैं. इसलिए, हमें यहां कुछ भी नया नहीं दिख रहा है." पेसकोव ने यह भी बताया कि रूस को भारत से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है जिससे पता चले कि वह रूसी तेल खरीदना बंद करने की योजना बना रहा है.

रूस से तेल आयात जारी रखेगा भारत!

वहीं इस दौरान जो विदेश मंत्रालय और सरकारी सूत्रों की मानें तो भारत इस पर फूंक-फूंक कर कदम रखेगा. वो किसी कीमत पर, पूरी तरह रूस के साथ तेल व्यापार को ना खत्म करेगा ना ही शून्य करेगा. हां, वो ये कर सकता है कि इसमें बढ़ोतरी नहीं करेगा. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भारत रूस से खरीदे गए कच्चे तेल को देश में इस्तेमाल करेगा यानी कि इसे घरेलू लेवल पर ही खपा देगा. वहीं अमेरिका या वेनेजुएला से खरीदे गए कच्चे तेल को ही प्रॉसेस करके यूरोप को बेचेगा. 

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बता दें, भारत का रूस से तेल खरीदना पूरी तरह से बंद होने को लेकर चर्चा ट्रंप के बयान के बाद शुरू हुई है. ट्रंप ने समझौते को लेकर यह भी दावा किया कि भारत एक बड़े व्यापार समझौते के तहत भारतीय सामान पर अमेरिकी टैरिफ में कमी के बदले में रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमत हो गया है. इससे ड्यूटी घटकर 18 फीसदी हो जाएगी.

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