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मोहन भागवत के बयान पर अभिजीत दिपके का तंज, Gen Z के आलोचकों को दिया जवाब
RSS: भागवत के इस बयान के अगले ही दिन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक छोटा लेकिन चर्चा में आ गया संदेश साझा किया. उन्होंने भागवत के बयान से जुड़ी एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया दिया.
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CJP: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान के बाद छात्र आंदोलन और जेन Z को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है. मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में भागवत ने साफ कहा कि किसी मुद्दे पर विरोध करने से आज की युवा पीढ़ी यानी जेन Z को देश-विरोधी नहीं कहा जा सकता. उन्होंने कहा कि युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुनने की जरूरत है और लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन भी अपनी बात रखने और संवाद करने का एक वैध तरीका है.
भागवत के इस बयान के अगले ही दिन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक छोटा लेकिन चर्चा में आ गया संदेश साझा किया. उन्होंने भागवत के बयान से जुड़ी एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, "जिन लोगों को इससे मतलब है, उनके लिए...". उनके इस पोस्ट को कई लोग उन नेताओं पर तंज के रूप में देख रहे हैं, जिन्होंने पिछले दिनों छात्रों के आंदोलन को लेकर तीखी टिप्पणियां की थीं.
छात्र आंदोलन को लेकर पहले क्या उठे थे सवाल?
NEET-UG पेपर लीक को लेकर पिछले महीने देश के कई हिस्सों में छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन किए थे. इन प्रदर्शनों के दौरान कुछ बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया था कि आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ हो सकता है और कुछ देश-विरोधी तत्व भी इसमें सक्रिय हैं. इसी वजह से आंदोलन की मंशा और उसमें शामिल लोगों को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी होती रही.
अब मोहन भागवत के बयान के बाद इस पूरे मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है, क्योंकि उन्होंने साफ कहा कि विरोध करने वाले युवा अपने ही समाज का हिस्सा हैं और उन्हें देश-विरोधी कहना सही नहीं है.
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— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) ?ref_src=twsrc%5Etfw">August 6, 2026Advertisement
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'आज की पीढ़ी सवाल पूछती है, यही उसकी ताकत है'
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि आज की जेन Z पहले की पीढ़ियों से अलग सोच रखती है.उन्होंने बताया कि जब उनकी पीढ़ी युवा थी, तब बड़े जो कहते थे, उसे बिना सवाल किए मान लिया जाता था. लेकिन आज के युवा हर बात को समझना चाहते हैं और उसके पीछे का तर्क जानना चाहते हैं.
भागवत के मुताबिक यह बदलाव नकारात्मक नहीं, बल्कि एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. उनका कहना था कि अगर युवाओं को प्यार और सम्मान के साथ उनकी भाषा में समझाया जाए, तो बेहतर संवाद संभव है.
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'विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है'
आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन कोई गलत बात नहीं है. अगर किसी वर्ग को किसी मुद्दे पर परेशानी है, तो वह अपनी आवाज उठाएगा. उन्होंने कहा कि विरोध भी सवाद का एक माध्यम है और सरकार व समाज को युवाओं की बात सुननी चाहिए..
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य समाज में विभाजन पैदा करना नहीं होना चाहिए. उनका कहना था कि बातचीत और आपसी समझ के जरिए समस्याओं का समाधान निकालना ही सबसे बेहतर रास्ता है. साथ ही उन्होंने यह भी माना कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में अभी कई सुधारों की जरूरत है.
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छात्र आंदोलन पर पहले आए थे कई राजनीतिक बयान
जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में प्रदर्शन शुरू हुए और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने परीक्षा सुधारों की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की, तब कई बीजेपी नेताओं ने इन आंदोलनों की आलोचना की थी.
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया था कि विदेशी ताकतें छात्रों के गुस्से का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं. वहीं पार्टी के कुछ अन्य नेताओं ने भी आंदोलन में देश-विरोधी तत्वों की मौजूदगी का आरोप लगाया था. इसके अलावा पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी और बीजेपी मुंबई अध्यक्ष अमित सातम ने भी छात्र आंदोलन को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाए दी थीं.
अब चर्चा के केंद्र में भागवत का बयान
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मोहन भागवत के बयान के बाद छात्र आंदोलन को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को नई दिशा मिल गई है. एक तरफ उनके बयान को युवाओं के पक्ष में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, तो दूसरी ओर अभिजीत दीपके की सोशल मीडिया प्रतिक्रिया ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है. अब यह मुद्दा केवल परीक्षा सुधार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोकतंत्र में विरोध, युवाओ की भूमिका और राजनीतिक नजरिए पर भी नई बहस छिड़ गई है.