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सरहद पर शहीद हुआ जवान, आज भी करता है रखवाली! चीनी सेना भी झुकाती है सिर

India-China border: सिक्किम में नाथुला व जेलेप ला दर्रों के बीच लगभग 13,123 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक प्रसिद्ध बाबा हरभजन सिंह मंदिर है, जो एक भारतीय सैनिक स्मारक है. यह मंदिर भारतीय सेना के वीर सिपाही बाबा हरभजन सिंह की याद में बनाया गया है, जिनकी 1968 में ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो गई थी.

Image Source: NMF Input
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India-China border: सिक्किम में भारत-चीन सीमा पर एक सैनिक ऐसा भी है जो मौत के 48 साल बाद भी सरहद की रक्षा कर रहा है. यह सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगता है, लेकिन लोगों का ऐसा ही मानना है और दूर-दूर से लोग यहां बाबा हरभजन सिंह मंदिर में पूजा करने आते हैं. यही नहीं, इस सैनिक ने मरने के बाद भी अपनी नौकरी जारी रखी है. फिलहाल, ये सैनिक अब रिटायर हो चुका है.

13,123 फीट की ऊंचाई पर बना है बाबा हरभजन मंदिर

सिक्किम में नाथुला व जेलेप ला दर्रों के बीच लगभग 13,123 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक प्रसिद्ध बाबा हरभजन सिंह मंदिर है, जो एक भारतीय सैनिक स्मारक है. यह मंदिर भारतीय सेना के वीर सिपाही बाबा हरभजन सिंह की याद में बनाया गया है, जिनकी 1968 में ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो गई थी. ऐसा माना जाता है कि मृत्यु के बाद भी उनकी आत्मा सीमा पर देश की रक्षा करती है और सैनिकों को सपनों में आकर सतर्क करती है. चीन के सैनिक भी इस बात को मानते हैं और डरते हैं कि बाबा बॉर्डर की रखवाली पर मुस्तैद हैं, क्योंकि उन्होंने भी बाबा हरभजन सिंह को मरने के बाद घोड़े पर सवार होकर बॉर्डर पर गश्त करते हुए देखा है.

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सेना आज भी उन्हें मानती है जिंदा

सेना आज भी उन्हें जीवित मानकर उनका बिस्तर लगाती है और उनके जूते-वर्दी साफ रखती है. यहां ओल्ड बाबा मंदिर (उनके मूल बंकर के पास) और नया बाबा मंदिर (यात्रियों की सुविधा के लिए थोड़ा नीचे स्थित) है. यहां जाने के लिए गंगटोक स्थित बेस कैम्प से परमिट लेनी होती है.

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आज भी ड्यूटी करते हैं बाबा हरभजन सिंह!

बाबा हरभजन सिंह को लेकर सेना और स्थानीय लोगों के बीच कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि मृत्यु के बाद भी उनकी आत्मा देश की सेवा में लगी हुई है और वह सपने में आकर अपने साथियों को चीन की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी देते हैं. सेना के जवानों के बीच भी बाबा हरभजन को लेकर गहरी आस्था और विश्वास की बात कही जाती है. मान्यता के मुताबिक, उन्हें सेना के एक जवान की तरह ही वेतन और छुट्टी जैसी सुविधाएं भी दी जाती थीं. दो महीने की छुट्टी के दौरान उनके घर जाने के लिए ट्रेन की टिकट तक बुक कराई जाती थी. स्थानीय लोग उनका सामान लेकर उन्हें रेलवे स्टेशन तक छोड़ने भी जाते थे, उनके वेतन का एक हिस्सा उनकी मां को भेजे जाने की भी परंपरा बताई जाती है.हालांकि, अब बाबा हरभजन सिंह सेना से रिटायर हो चुके हैं.

भारत-चीन फ्लैग मीटिंग में भी खास सम्मान

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बाबा हरभजन सिंह से जुड़ी सबसे दिलचस्प मान्यता यह है कि नाथुला में जब भारत और चीन के सैनिकों के बीच फ्लैग मीटिंग होती है, तो चीनी सेना की ओर से उनके लिए एक अलग कुर्सी रखी जाती है. यह परंपरा बाबा हरभजन सिंह के प्रति दोनों तरफ से जुड़ी मान्यताओं और सम्मान को दर्शाती है.

 

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