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कान दर्द से राहत के आयुर्वेदिक घरेलू उपाय, हेडफोन से होने वाले नुकसान से बचाव
तेल का इस्तेमाल करने से पहले कान को अच्छी तरह से साफ कर लें. कई बार गंदगी होने की वजह से कान में संक्रमण की वजह से भी दर्द हो जाता है. ऐसे में साफ करने के बाद ही तेल का इस्तेमाल करें. इस तेल के इस्तेमाल से पहले कुछ सावधानियां बरतनी भी जरूरी हैं.
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कान के दर्द की समस्या के कई कारण हो सकते हैं लेकिन आज के समय में हेडफोन और ईयरबड्स का इस्तेमाल कानों को अधिक क्षति पहुंचाता है.
आयुर्वेदिक घरेलू उपाय
सुनने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण कानों के सुनने की क्षमता को भी प्रभावित करते हैं लेकिन आयुर्वेद मुख्यत इसे वात दोष का असंतुलन मानता है.आयुर्वेद में कानों के दर्द के लिए एक प्रभावी तरीका बताया गया है, जिसकी मदद से कानों हल्के और शुरुआती दर्द में आराम पाया जा सकता है.
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क्यों है यह उपाय असरदार?
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आयुर्वेद में कानों के दर्द को वात की वृद्धि से जोड़ा गया है. वात की वृद्धि होने से कान में शुष्कता और जकड़न हो जाती है, जिससे कानों मे धीरे-धीरे दर्द बढ़ने लगता है. आयुर्वेद में हल्के दर्द के लिए प्रभावी तेल के बारे में बताया गया है, जिसका इस्तेमाल पुराने समय से किया जा रहा है. इसके लिए अदरक का रस, सेंधा नमक और दो बूंद नींबू को मिलाकर सरसों के तेल के साथ गर्म करें. अच्छे से पक जाने पर तेल को छानकर अलग कर लें. ठंडा होने पर तेल को प्रभावित कान में दो बूंद डालें। इससे धीरे-धीरे दर्द से राहत मिलेगी.
तेल में मौजूद अदरक को आयुर्वेद में दर्द निवारक माना जाता है. इसकी तासीर गर्म होती है और स्वभाव दर्द को कम करने वाला होता है. इसके साथ ही अदरक में वात को शांत करने वाले गुण भी होते हैं. वहीं सेंधा नमक भी दर्द में प्रभावी तरीके के काम करता है. ये दोनों पदार्थ मिलकर वात को संतुलित करने से लेकर दर्द को कम करने में मदद करते हैं.
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जरूरी सावधानियां
तेल का इस्तेमाल करने से पहले कान को अच्छी तरह से साफ कर लें. कई बार गंदगी होने की वजह से कान में संक्रमण की वजह से भी दर्द हो जाता है. ऐसे में साफ करने के बाद ही तेल का इस्तेमाल करें. इस तेल के इस्तेमाल से पहले कुछ सावधानियां बरतनी भी जरूरी हैं. अगर कान में किसी तरह का घाव है, या फिर कान बह रहा है, तब इस तेल को डालने से बचे। इसके लिए चिकित्सक की सलाह है और आगे की प्रक्रिया जानें.
कान में दर्द होने पर कोशिश करें कि नहाते वक्त साबुन का पानी कान के भीतर न जाए. इससे कान में शुष्कता बढ़ती है और चिपचिपा होने की वजह से कान में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे में हर दो दिन में कानों की सफाई जरूर करें.
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