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‘माहौल बिगाड़ रहे…’ सीनियर वकीलों पर बिफरे चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जानें, पूर्व जज से जुड़ा क्या है पूरा मामला
एक पूर्व जज के रिटायरमेंट से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट को तुरंत नई बेंच गठित करने के निर्देश दिए हैं. जबकि इस मामले में कई जजों ने खुदको पहले ही अलग कर लिया था.
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CJI Surya Kant: देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों को निशाने पर लिया. उन्होंने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, 3 से 4 तथाकथित सीनियर वकील माहौल खराब कर रहे हैं.
दरअसल, CJI सूर्यकांत ने ये टिप्पणी ऐसे मामले को लेकर की है. जिसकी सुनवाई से पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट की चार अलग-अलग बेंच ने खुदको अलग कर लिया. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा. यह मामला एक पूर्व सिविल जज अमरीश कुमार जैन के रिटायरमेंट से जुड़ा है.
चीफ जस्टिस ने क्या कहा?
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CJI सूर्यकांत ने साफ किया कि इस मामले में अब और देरी नहीं नहीं होनी चाहिए. जुलाई महीने का आखिरी हफ्ता इस केस के लिए निर्णायक होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट की इस बेंच में CJI सूर्यकांत के साथ जस्टिस वी. मोहना शामिल थे. सुप्रीम कोर्ट ने क्लियर निर्देश दिए कि जो बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी, वो किसी भी हाल में खुदको इस केस से अलग नहीं कर सकती.
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सुनवाई के दौरान CJI ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ वरिष्ठ वकील जजों के बार-बार खुद को अलग करने जैसी परिस्थितियां पैदा कर रहे हैं. CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वह ऐसे मामलों पर करीबी नजर रखे हुए हैं और कुछ तथाकथित वरिष्ठ वकील न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं.
इस पर अमरीश जैन ने कहा कि वह पहले भी दो बेंच के सामने खुद बहस कर चुके हैं. आगे भी अपना पक्ष खुद रखेंगे. हालांकि सुनवाई के दौरान अमरीश कुमार जैन अपने वकील अभय प्रताप सिंह के साथ पेश हुए थे. इस दौरान उनसे पूछा गया कि वे कौनसे जज थे, जिन्होंने इस केस से खुद को अलग कर लिया था.
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अमरीश जैन ने अदालत में बताया कि उन्होंने साल 2024 में अपने पेंशन से जुड़े लाभ जारी करने के लिए आवेदन दिया था, ताकि वह अपने बेटे की LLB की फीस जमा कर सकें, लेकिन उनकी यह मांग भी स्वीकार नहीं की गई.
क्या है पूर्व जज अमरीश जैन से जुड़ा ये पूरा मामला?
दरअसल, नवंबर 2005 में अमरीश कुमार जैन पंजाब ज्यूडिशियल सर्विसेज से जुड़े थे. साल 2009 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की प्रशासनिक सिफारिशों के आधार पर उनकी सेवाएं खत्म कर दी गईं थी. जैन ने इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोप लगाया साल 2007 में जालंधर के तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश उनके (अमरीश जैन) के लिए एक तय राय रखते थे. इसी वजह से वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में गलत बयान दर्ज किए गए. हालांकि अमरीश जैन ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और अक्टूबर 2018 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया. कोर्ट ने उनकी सेवा बहाल करने के आदेश दिए. साथ ही साथ उन्हें वरिष्ठता, सेवा की निरंतरता, वेतनवृद्धि और प्रमोशन जैसे सभी लाभ देने का निर्देश दिया था, लेकिन बकाया वेतन देने से इंकार कर दिया गया था.
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अमरीश जैन को झटका उस वक्त लगा जब साल 2022 में फिर से हाईकोर्ट ने प्रशासनिक पक्ष से एक बार फिर उनकी सेवा खत्म करने की सिफारिश की. 18 अप्रैल 2022 को अमरीश जैन को दोबारा पद से हटा दिया गया. उन्होंने दलील दी कि इस कार्रवाई के बाद न केवल उनका रोजगार छिन गया बल्कि पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति जुड़े लाभ भी उन्हें नहीं मिले. मामले पर सुनवाई होती उससे पहले ही जजों की बेंच खुद को इससे अलग करती गई. इसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट की देख-रेख में इसकी सुनवाई होगी. हाई कोर्ट की नई बेंच गठित की जाएगी और मामले की सुनवाई नए सिरे से होगी.