Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

‘चुम्मी तो नहीं लेंगे…’ कंगना रनौत ने अभिजीत दिपके पर ऐसा क्या कहा, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Kangana Ranaut: सुधीर चौधरी के साथ बातचीत के दौरान कंगना ने अभिजीत दिपके और उन लोगों के संदर्भ में अपनी बात रखी, जिन्होंने कथित तौर पर खुद को ‘कॉकरोच’ कहा था. उनका यह उदाहरण सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

Image Source: Kangana Ranuat/ Instagram/ IANS
Loading Ad...

Kangana Ranaut: अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं. इस बार उन्होंने ‘कॉकरोच’ और ‘तितली’ का उदाहरण देते हुए बताया कि समाज किसी व्यक्ति को उसकी छवि और व्यवहार के आधार पर किस तरह अलग-अलग नजर से देखता है. सुधीर चौधरी के साथ बातचीत के दौरान कंगना ने अभिजीत दिपके और उन लोगों के संदर्भ में अपनी बात रखी, जिन्होंने कथित तौर पर खुद को ‘कॉकरोच’ कहा था. उनका यह उदाहरण सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

‘कॉकरोच को चप्पल से ही मारेंगे’

कंगना ने अपनी बात समझाते हुए कहा कि अगर किस व्यक्ति को कॉकरोच दिखाई दे तो वह आमतौर पर उसे हाथ में उठाने के बजाय चप्पल से मारने की कोशिश करेगा. वहीं, अगर सामने तितली दिखाई दे तो लोग उसे खूबसूरत मानकर हाथ पर बैठाने या उसके साथ तस्वीर लेने की कोशिश कर सकते हैं. इसी बात को उन्होंने बेहद सीधे अंदाज में कहा, “कॉकरोच को चप्पल से ही मारेंगे ना, चुम्मी तो नहीं लेंगे.”
कंगना का कहना था कि इस उदाहरण से वह यह समझना चाहती हैं कि किसी व्यक्ति के प्रति लोगों का नजरिया उसकी पहचान, व्यवहार और समाज में बनी छवि से प्रभावित होता है. हालांकि, उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है.  कुछ लोग इसे कंगना का बेबाक अंदाज बता रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स उनके उदाहरण को लेकर असहमति जता रहे हैं.

Loading Ad...

‘गटर जनरेशन’ वाले बयान पर भी दी सफाई

Loading Ad...

कंगना का यह बयान उनके पहले दिए गए ‘गटर जनरेशन’ वाले कमेंट से भी जुड़ गया है.कुछ समय पहले उन्होंने Gen Z और युवाओं के एक वर्ग को लेकर तीखी टिप्पणी की थी. उनके बयान के बाद कई लोगों ने सवाल उठाया था कि क्या वह पूरी युवा पीढ़ी को एक ही नजर से देख रही हैं.
बाद में कंगना ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका निशाना पूरी युवा पीढ़ी नहीं, बल्कि एक खास वर्ग था. उन्होंने नशे, जुए, सट्टेबाजी और डार्क वेब जैसी गतिविधियों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोगों के व्यवहार को लेकर की गई टिप्पणी का मतलब यह नही है कि वह हर युवा को उसी नजर से देखती हैं.

'शॉर्ट टर्म मेमोरी लॉस हुआ होगा...' सोनम वांगचुक ने उड़ाई आमिर खान की खिल्ली, नहीं पहचानने वाले दावे की खोली पोल

Loading Ad...

‘खुद को कॉकरोच कहते हैं तो…’

कंगना ने अपने पुराने बयान का संदर्भ समझाते हुए कहा कि जिन लोगों ने खुद को ‘कॉकरोच’ कहा था, उनकी बात के संदर्भ में ही उन्होंने यह उपमा दी थी. उनका तर्क था कि अगर कोई व्यक्ति खुद के लिए किसी शब्द का इस्तेमाल करता है, तो उसी संदर्भ में उस शब्द के इस्तेमाल पर उसे आपत्ति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद को कॉकरोच नहीं मानतीं और अगर कोई उन्हें ऐसा कहेगा तो वह इसका विरोध करेंगी.

सोशल मीडिया पर बंटी लोगों की राय

Loading Ad...

कंगना के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. कुछ लोग उनकी बेबाकी का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति को अपनी बात रखते समय शब्दों का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए. फिलहाल ‘कॉकरोच’ और ‘तितली’ वाला उनका उदाहरण सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.

फिल्म को लेकर भी चर्चा में कंगना

यह भी पढ़ें

वर्कफ्रंट की बात करें तो कंगना हाल ही में ‘भारत भाग्य विधाता’ में नजर आई थीं. फिल्म का निर्देशन मनोज तापड़िया ने किया है और इसकी कहानी 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के दौरान मरीजों की जान बचाने वाले कामा अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ से प्रेरित बताई गई है.

अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...