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कहां है भगवान विष्णु ये भव्य मंदिर, सबसे ऊंचे शिखर वाले देवालय के निर्माण के पीछे है भक्ति से भरी अद्भुत कथा

भगवान राम के लिए बनाया गया चतुर्भुज मंदिर भगवान विष्णु यानी चतुर्भुज नारायण का धाम बन गया. मंदिर का निर्माण कई दशकों तक चला और मधुकर शाह के पुत्र वीर सिंह देव के शासनकाल में पूरा हुआ. मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना है.

Image Credits:Chaturbhuj mandir Madhya pradesh/Incredible india portal
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भारत को मंदिरों का देश भी कहा जाता है. भारत भूमि के कोने-कोने में भगवान की महिमा का बखान करते कई भव्य और अद्भुत देवालय हैं. ऐसा ही अद्भुत, खूबसूरत वास्तुकला वाला मंदिर मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित है, जहां मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र भगवान नहीं बल्कि राजा के रूप में पूजे जाते हैं. मंदिर निर्माण के पीछे की कथा भी भक्ति से भरी पड़ी है. 

ये मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है

बेतवा नदी के किनारे बसा ऐतिहासिक कस्बा ओरछा की हर दीवार, हर पत्थर और हर हवा में इतिहास की कहानियां हैं. इन्हीं कहानियों में से एक है नारायण को समर्पित चतुर्भुज मंदिर. 1558 में बुंदेला राजवंश के राजा मधुकर शाह के शासनकाल में निर्मित यह मंदिर हिंदू मंदिर वास्तुकला का शानदार नमूना है.इस मंदिर का शिखर (विमान) 344 फीट की ऊंचाई तक पहुंचता है, जो भारत के सबसे ऊंचे मंदिर शिखरों में से एक है. नाम के अनुसार ‘चतुर्भुज’ अर्थात चार भुजाओं वाला यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है. लेकिन इस मंदिर की कहानी सिर्फ भव्यता और वास्तुकला तक सीमित नहीं है. इसमें एक अनोखा धार्मिक मोड़ भी है, जो आज भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है.

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कहां भगवान राम की पूजा देवता के रूप में नहीं, बल्कि राजा के रूप में होती

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किंवदंती के अनुसार, रानी गणेश कुंवारी ने एक स्वप्न देखा जिसमें भगवान राम ने उन्हें अपना मंदिर बनाने का आदेश दिया.  रानी की भक्ति से प्रभावित होकर राजा मधुकर शाह ने मंदिर निर्माण की अनुमति दे दी. रानी अयोध्या गईं और वहां से भगवान राम की एक पवित्र मूर्ति लेकर लौटीं. मंदिर का निर्माण चल रहा था, लेकिन रानी ने सुरक्षा के कारण मूर्ति को कुछ समय के लिए रानी महल में रख दिया. जब मंदिर तैयार हो गया और मूर्ति को चतुर्भुज मंदिर में स्थापित करने का समय आया, तो मूर्ति अपनी जगह से हिली ही नहीं. स्थानीय मान्यता के अनुसार, एक बार महल में स्थापित मूर्ति को हटाना वर्जित था. इस रहस्यमयी घटना के कारण राम की मूर्ति रानी महल में ही रह गई और वह महल राम राजा मंदिर में बदल गया, जहां आज भी भगवान राम की पूजा देवता के रूप में नहीं, बल्कि राजा के रूप में होती है.

चतुर्भुज मंदिर 15 फीट ऊंचे चबूतरे पर बना है

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वहीं, मूल रूप से राम के लिए बनाया गया चतुर्भुज मंदिर भगवान विष्णु यानी चतुर्भुज नारायण का धाम बन गया. मंदिर का निर्माण कई दशकों तक चला और मधुकर शाह के पुत्र वीर सिंह देव के शासनकाल में पूरा हुआ. मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना है, चतुर्भुज मंदिर 15 फीट ऊंचे चबूतरे पर बना है,इसका क्रॉस आकार वाला लेआउट बेसिलिका जैसा दिखता है. इसमें नागर शैली के साथ मुगल प्रभाव भी साफ देखा जा सकता है. मेहराबदार दरवाजे, बारीक नक्काशी, जालियां और ऊंचा शिखर इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं. मंदिर की ऊंचाई 105 मीटर (344 फीट) है, जो इसे दूर से ही आकर्षक बनाती है.

मंदिर में कब  विशेष पूजा-अर्चना होती है

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चतुर्भुज मंदिर पूरे वर्ष श्रद्धालुओं से भरा रहता है. जन्माष्टमी और वैकुंठ चतुर्दशी जैसे त्योहारों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है. मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि बुंदेला राजवंश की भक्ति और कलात्मकता का भी प्रमाण है. ओरछा घूमने आने वाले पर्यटक चतुर्भुज मंदिर को देखकर हैरान रह जाते हैं. यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, वास्तुकला और आस्था का अनोखा संगम है.

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