Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

करवा चौथ पर कब करें पूजा? कालकाजी पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया शुभ मुहूर्त

महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इस बार यह पावन व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को पड़ रहा है.

Image Credits: IANS VIDEO/GRAB/Canva/AI
Loading Ad...

देशभर में आज करवा चौथ का पावन पर्व मनाया जा रहा है. पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा है. इस अवसर पर दिल्ली के प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर के पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने करवा चौथ के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसके धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

 ‘इस व्रत में पूरे शिव परिवार की पूजा का विशेष महत्व है’

महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इस बार यह पावन व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को पड़ रहा है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं.

Loading Ad...

उन्होंने कहा, "इस दिन सुहागिन स्त्रियां सूर्योदय से लेकर चंद्र उदय तक उपवास रखती हैं और अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं. इस व्रत में पूरे शिव परिवार की पूजा का विशेष महत्व है."

Loading Ad...

महंत जी ने बताई पूजा की विधि 

महंत जी ने पूजा की विधि के बारे में बताते हुए कहा कि व्रत के दिन भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने के बाद करवा चौथ की कथा सुनी जाती है. कथा सुनने के बाद सुहागिन महिलाएं आपस में करवा बदलने की परंपरा का भी निर्वाह करती हैं, जिसे बायना देना भी कहा जाता है.

Loading Ad...

क्या है शुभ मुहूर्त

इस बार के शुभ मुहूर्त की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया, "इस बार पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 56 मिनट तक है. इस समय में पूजा करना अत्यंत उत्तम और फलदायी रहेगा."

पति के हाथ से जल ग्रहण कर अपना व्रत तोड़ती हैं महिलाएं

Loading Ad...

महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने चंद्रोदय के समय किए जाने वाले अनुष्ठान के बारे में कहा कि यह इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. चंद्रोदय के समय स्त्रियां छलनी के अंदर दीपक रखकर पहले चंद्रमा के दर्शन करती हैं और फिर उसी छलनी में से अपने पति के मुख को देखती हैं. इसके बाद पति के हाथ से जल ग्रहण कर अपना व्रत तोड़ती हैं.

‘इस व्रत को करने वाली सभी महिलाओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं’

यह भी पढ़ें

उन्होंने कहा, "ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच परस्पर प्रेम और प्रीति बढ़ती है. यह कामना की जाती है कि उनका पति दीर्घायु हो, स्वस्थ रहे और उनका दांपत्य जीवन हमेशा सुखी बना रहे. भगवान शिव और माता पार्वती के आशीर्वाद से इस व्रत को करने वाली सभी महिलाओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं."

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...