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यमुना किनारे प्रेमानंद महाराज ने सरेआम दौड़ा दी स्कूटी! VIDEO देख भक्त हैरान, शिष्य दिखे परेशान!

मथुरा के वृंदावन में यमुना किनारे जैसे ही प्रेमानंद महाराज ने स्कूटी चलाई, वीडियो वायरल हो गया. बाबा के स्कूटी चलाते ही पीछे-पीछे शिष्य दौड़ते रहे. महाराज जी को इस तरह स्कूटी की सवारी करता देख भक्त भी हैरान रह गए.

Premanand Maharaj (Screengrab)
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प्रेमानंद महाराज! प्रेमानंद बाबा, गुरु जी...जिनके हैं सैकड़ों नाम, हैं लाखों भक्त, करोड़ों सनातनियों की जिनमें है आस्था... जो मौजूदा समय में सबसे चर्चित और अपनी आध्यात्मिक चेतना और शिक्षा के ज़रिए कलयुग में भी नैया पार लगाने का दमखम रखने वाले संत प्रेमानंद महाराज को कौन नहीं जानता. प्रेमानंद महाराज, जिन्हें भक्त दुलार से प्रेमानंद बाबा भी कहकर पुकारते हैं, उनका एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसने भक्तों और नेटिज़न्स को हैरान कर दिया है. लोग सोचने लगे हैं और सवाल पूछने लगे हैं कि आखिर बाबा जी को ये करने की ज़रूरत क्यों पड़ी? अब आप भी सोचने लगे होंगे कि आखिर हम किस चीज़ की बात कर रहे हैं और बाबा ने आखिर ऐसा क्या किया जिसकी जमकर चर्चा हो रही है, लोग भर-भर के वीडियो शेयर कर रहे हैं और खुद में खुश हो रहे हैं.

तो बात ये है कि व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो, वह भी एक आम इंसान की तरह कभी-कभार जीना ज़रूर चाहता है. यही कुछ बाबा के साथ भी हुआ है. जिनसे मिलने के लिए भीड़ लगी रहती है, एक नज़र दीदार के लिए लोग कई-कई दिन इंतज़ार करते हैं, सुबह 3 बजे प्रेमानंद महाराज जी की यात्रा वाले मार्ग में खड़े रहते हैं, जिनकी इच्छा मात्र से लग्ज़री गाड़ियों की लाइन लग जाए, वैसे महाराज जी को सड़क पर स्कूटी चलाते देख लोग हैरान हैं. उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि ये वही महाराज जी हैं, जो स्कूटी चला रहे हैं. सोशल मीडिया पर आग की तरह यह वीडियो वायरल हो रहा है.

प्रेमानंद महाराज का वीडियो वायरल!

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तो चलिए हम आपको बताते हैं कि आखिर क्या है पूरा माजरा...दरअसल, अपनी शांत, बौद्धिक और आध्यात्मिक शिक्षाओं के ज़रिए लाखों लोगों के जीवन में प्रकाश घोलने वाले प्रेमानंद महाराज को वृंदावन में खुद स्कूटी चलाते देखा गया. इस दौरान वह काफ़ी खुश दिखे, चहचहाते नज़र आए और उनके पीछे उनके शिष्य दौड़ते हुए उन्हें सहारा देते दिखाई दिए. वैसे तो खराब स्वास्थ्य और शारीरिक मजबूरी के कारण बेहद मुश्किल से बैठ पाने में सक्षम प्रेमानंद बाबा बहुत कम बाहर निकलते हैं. हां, सुबह की पदयात्रा को छोड़ दिया जाए तो वे कम ही बाहर आते हैं. अगर आध्यात्मिक दिनचर्या की बात करें तो वह भी कार से ही होती है, वह भी कड़ी मशक्कत के बाद ही संभव हो पाती है. ऐसे में अगर कोई उन्हें खुद स्कूटी चलाते देख ले, तो आंखें तो चौंधिया जाएंगी ही. हुआ भी यही. भक्तों ने उन्हें स्कूटी चलाते हुए देख लिया और अब उन्हें अपनी आंखों पर ही विश्वास नहीं हो रहा है.

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वृंदावन में स्कूटी चलाते दिखे प्रेमानंद महाराज

जहां तक प्रेमानंद महाराज के स्कूटी चलाने की बात है, तो यह सच है कि उन्होंने खुद स्कूटी चलाई. वायरल हो रहा वीडियो भी सच है, लेकिन इसके पीछे की कहानी भी है. दरअसल, बीते दो-तीन दिन पहले संत प्रेमानंद महाराज जी मथुरा के वृंदावन में श्री हित राधा केली कुंज आश्रम से यमुना किनारे आध्यात्मिक साधना के लिए निकले थे. वे अपने शिष्यों के साथ कारों के काफिले में निकले थे. इसी दौरान उनकी नज़र एक अटेंडेंट पर पड़ी, जो स्कूटी चला रहा था. यात्रा के बीच में ही उन्होंने अचानक काफिले को रुकने के लिए कहा. वह अपनी फॉर्च्यूनर से बाहर निकले और गाड़ी के बगल में स्कूटी से साथ चल रहे अटेंडेंट की ओर इशारा किया. फिर प्रेमानंद महाराज ने उससे स्कूटी मांग ली और खुद चलाने लगे. बस क्या था, जैसे ही प्रेमानंद महाराज ने यमुना किनारे स्कूटी चलाई, किसी ने इस ऐतिहासिक पल को अपने कैमरे में कैद कर लिया.

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रेतीली सड़क पर प्रेमानंद महाराज ने खुद ड्राइव की स्कूटी

इतना ही नहीं, शारीरिक परेशानी के बावजूद प्रेमानंद महाराज ने हिम्मत नहीं हारी. यमुना किनारे जाने वाली रेतीली सड़क पर करीब 500 मीटर तक स्कूटी चलाई और खूब हंसते-मुस्कुराते नज़र आए. इस दौरान उनके शिष्यों की जान हलक में अटक गई. वे परेशान और हैरान थे कि कहीं बाबा को कुछ हो न जाए, कोई अनहोनी न हो जाए, उन्हें चोट न लग जाए, जिससे बाबा जी को तकलीफ हो. इसी कारण जैसे-जैसे वह आगे बढ़ते गए, उनके अटेंडेंट और परछाई की तरह साथ रहने वाले शिष्य उनके साथ दौड़ते रहे. स्कूटी चलाते समय बाबा इतने आह्लादित, हंसते-मुस्कुराते दिख रहे थे, जैसे वर्षों की कोई ख्वाहिश पूरी हो गई हो, मानो बचपन और किशोरावस्था फिर से लौट आई हो.

वैसे तो प्रेमानंद महाराज का यह कोई एक वीडियो नहीं है जो वायरल हो रहा है. इससे पहले भी उन्होंने बाइक और बुलेट की सवारी की है, लेकिन हाल के दिनों में उनका स्कूटी चलाने का यह पहला मामला है. इससे पहले 23 नवंबर को भी बाबा बुलेट पर बैठकर यमुना तट पर पहुंचे थे, जहां उन्हें देखने के लिए भक्तों की भीड़ लग गई थी. हालांकि उस समय बाइक उनके एक साथी चला रहे थे और प्रेमानंद महाराज जी पीछे बैठे थे.

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प्रेमानंद महाराज कौन हैं?

आपको बता दें कि जिस प्रेमानंद महाराज की आज पूरी दुनिया दीवानी है, जो आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं, नेता, अभिनेता, खिलाड़ी से लेकर आम लोग तक जिनके दीवाने हैं, उनका जन्म कानपुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनका जन्म नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था. उनके पिता श्री शंभू पांडे और माता श्रीमती रमा देवी ने उन्हें धार्मिक माहौल में पाला-पोसा. उनके दादाजी ने भी दांपत्य जीवन से संन्यास ले लिया था और घर में रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आध्यात्मिक अभ्यास शामिल थे.

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जैसे बड़े, वैसे छोटे, जैसा परिवार, वैसे संस्कार. छोटी उम्र से ही प्रेमानंद बाबा को आध्यात्मिकता में गहरी रुचि थी. जब दूसरे बच्चे खेलते थे, तब वे ध्यान करने, मंत्र जपने और संतों व शास्त्रों की कहानियां सुनने में समय बिताते थे. 13 साल की उम्र में उन्होंने त्याग के मार्ग पर चलने के लिए घर छोड़ दिया. उनकी आध्यात्मिक यात्रा का एक अहम मोड़ तब आया, जब एक संत ने उन्हें राधा-कृष्ण की दिव्य रास लीला से परिचित कराया. इस अनुभव ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया और इसके बाद वे वृंदावन चले गए, जहां बांके बिहारी मंदिर में उन्होंने अपनी साधना शुरू की.

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हाल के वर्षों में उनकी सरल, सामाजिक और आध्यात्मिक शिक्षाओं ने लाखों लोगों का मार्गदर्शन किया है. उनकी बातों ने लोगों को दोबारा धर्म और अध्यात्म की ओर आकर्षित किया है. संत प्रेमानंद महाराज के इंस्टाग्राम पर लगभग चार करोड़ फॉलोअर्स और यूट्यूब पर सोलह मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर हैं. लेकिन इन सबसे ज़्यादा, प्रेमानंद महाराज को इन सबकी कोई ज़रूरत नहीं है.

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