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नवरात्रि में मां दुर्गा की सवारी: जानें कौन सा वाहन लाएगा खुशहाली और कौन बताएगा जीवन की चुनौतियां

Navratri Special: नवरात्रि में मां दुर्गा की सवारी न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि ज्योतिषी दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है. माता का हर वाहन के आगमन और प्रस्थान से जीवन में आने वाली खुशहाली या चुनौतियों का संदेश मिलता है. ऐसे में आप भी पढ़ियें क्या इस बार माता का हाथी पर सवार होकर आना शुभ है?

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नवरात्रि का पर्व भारतीय संस्कृति और आस्था का सबसे प्रमुख त्योहार है. नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है. इस महापर्व का एक विशेष रहस्य यह भी है कि हर वर्ष मां दुर्गा किस वाहन पर सवार होकर आती हैं और किस पर विदा लेती हैं. इसका प्रभाव भी देश-दुनिया पर उसी तरह से पड़ता है. आइए विस्तार से इसके बारे में… लेकिन उससे पहले बता दें कि यह परंपरा केवल धार्मिक विश्वास नहीं, बल्कि ज्योतिषीय गणना और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है.

मां दुर्गा की सवारी का निर्धारण नवरात्रि आरंभ होने वाले दिन के आधार पर किया जाता है. यदि नवरात्रि का आरंभ सोमवार या रविवार को होता है, तो माता हाथी पर सवार होकर आती हैं. हाथी पर आगमन को बेहद शुभ माना जाता है क्योंकि यह समृद्धि, उन्नति और अच्छी वर्षा का संकेत देता है.

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किस दिन नवरात्रि शुरु होने पर माता सुख-शांति लेकर आती है?
यदि नवरात्रि की शुरुआत शनिवार या मंगलवार को होती है, तो माता घोड़े पर सवार होकर आती हैं. घोड़े पर आगमन को अशांत परिस्थितियों, युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता या प्राकृतिक आपदाओं का सूचक माना जाता है. गुरुवार और शुक्रवार को नवरात्रि शुरू होने पर माता पालकी पर आती हैं, जो घर-घर में सुख-शांति और धन-धान्य की वृद्धि का संकेत देता है.

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बुधवार को माता का आगमन देता है किस बात का संकेत?
वहीं, बुधवार को नवरात्रि का आरंभ होने पर मां दुर्गा नौका पर सवार होकर आती हैं. नाव पर आगमन अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि यह भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सकारात्मक परिणामों का संकेत देता है.

माता के प्रस्थान की सवारी भी क्यों है महत्वपूर्ण?
केवल आगमन ही नहीं, बल्कि माता के प्रस्थान की सवारी का भी विशेष महत्व है. विजयादशमी के दिन माता जिस दिन विदा लेती हैं, उसी दिन के आधार पर उनकी वापसी का वाहन निर्धारित होता है.

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माता के प्रस्थान का भैंसे से कनेक्शन?
रविवार और सोमवार को माता का प्रस्थान भैंसे पर माना जाता है, जो दुख और रोग की वृद्धि का संकेत देता है. मंगलवार और शनिवार को मुर्गे पर विदाई मानी जाती है, जो अस्थिरता का प्रतीक है.

मां दुर्गा की हाथी पर वापसी किस ओर इशारा?

बुधवार और शुक्रवार को हाथी पर वापसी को अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह भरपूर समृद्धि और खुशहाली लाता है. गुरुवार को यदि प्रस्थान होता है, तो यह नर वाहन अर्थात पालकी पर होता है, जिसे संतुलित और मध्यम परिणाम देने वाला माना जाता है.

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माता का आगमन पालकी में क्या होगा शुभ?

वर्ष 2025 में हिंदू पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर, सोमवार से आरंभ हो रही है. इसका अर्थ है कि मां दुर्गा इस बार हाथी पर सवार होकर आ रही हैं. यह संकेत है कि आने वाले वर्ष में भरपूर वर्षा, उर्वरता और समृद्धि का वातावरण रहेगा. यह मान्यता केवल लोक आस्था नहीं, बल्कि प्रकृति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के परिवर्तन का द्योतक है. पौराणिक दृष्टि से देखा जाए तो मां दुर्गा का मुख्य वाहन शेर है, जो शक्ति, पराक्रम और साहस का प्रतीक है.

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लेकिन नवरात्रि के नौ दिनों में बदलती हुई सवारियां ब्रह्मांडीय चक्र और प्रकृति के विविध रूपों को दर्शाती हैं. यही कारण है कि भक्त माता की हर सवारी को शुभ संकेत और भविष्य का दर्पण मानते हैं.

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