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शनिदेव की कृपा से चमक जाती है किस्मत, हर शनिवार शाम को जरूर करें ये काम, हर क्षेत्र में मिलेगी सफलता
शनिदेव सूर्य देव और छाया के पुत्र हैं. इसलिए उन्हें छाया पुत्र भी कहा जाता है. जब शनि की साढ़े साती, ढैय्या या महादशा चलती है तो व्यक्ति को कई प्रकार की परेशानियों जैसे आर्थिक संकट, नौकरी में समस्या, मान-सम्मान में कमी और परिवार में कलह का सामना करना पड़ सकता है.
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कई जातकों में शनिदेव को लेकर धारणा गलत है लेकिन ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि शनि देव व्यक्ति को संघर्ष देकर सोने की तरह चमकाते हैं.
शनि की साढ़े साती कई प्रकार की परेशानियों लाती है
शनिदेव सूर्य देव और छाया के पुत्र हैं. इसलिए उन्हें छाया पुत्र भी कहा जाता है. जब शनि की साढ़े साती, ढैय्या या महादशा चलती है तो व्यक्ति को कई प्रकार की परेशानियों जैसे आर्थिक संकट, नौकरी में समस्या, मान-सम्मान में कमी और परिवार में कलह का सामना करना पड़ सकता है.
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7 शनिवार व्रत रखने से शनिदेव के प्रकोप से मुक्ति मिलती है
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ऐसे में शनिवार का व्रत शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या में आने वाली समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है. इस व्रत की शुरुआत किसी भी माह के पहले शुक्ल पक्ष के शनिवार से शुरू कर सकते हैं. मान्यताओं के अनुसार 7 शनिवार व्रत रखने से शनिदेव के प्रकोप से मुक्ति मिलती है. साथ ही हर क्षेत्र में सफलता मिलती है.
शनिदेव की विशेष कृपा भी प्राप्त होती
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धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि पीपल के पेड़ में शनिदेव का वास होता है. इसलिए हर शनिवार पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और छाया दान करना बेहद शुभ माना जाता है और इससे नकारात्मकता भी दूर होती है और शनिदेव की विशेष कृपा भी प्राप्त होती है. मान्यता है कि जो जातक व्रत नहीं रह सकते. वे हर शनिवार शाम को दीपक जरूर जलाएं.