×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

मस्जिदों में मंदिर ढूँढने वालों की क्लास लगाने वाले मोहन भागवत क्या योगी बाबा से खफा हैं ?

संभल विवाद के बाद जैसे ही संघ प्रमुख मोहन भागवत की चुप्पी टूटी, मंदिर में मस्जिद ढूँढने वालों की क्लास लग गई। आज संघ प्रमुख जिस मॉ़डल की बात कर रहे हैं, अगर वो योगी मॉडल नहीं है, तो फिर क्या है ? मंदिर-मस्जिद पर बोलने वाले मोहन भागवत जी का रियल हीरो कौन है ? अबकी बार योगी बाबा नहीं, तो फिर कौन ? देखिये इस पर हमारी ये ख़ास रिपोर्ट।

मस्जिदों में मंदिर ढूँढने वालों की क्लास लगाने वाले मोहन भागवत क्या योगी बाबा से खफा हैं ?

गर्म तवे की तरह मंदिर-मस्जिद का विवाद दिन पर दिन गरमाता जा रहा है। अब तक तो, अयोध्या को झांकी बताकर, मथुरा-काशी का इंतज़ार किया जा रहा था लेकिन अब हर मस्जिद में मँदिर ढूँढा जा रहा है। संभल की जामा मस्जिद, अजमेर शरीफ़ दरगाह और धार की भोजशाला , ताजे उदाहरण हैं और अगर ऐसा हो भी रहा हो, तो इसमें ग़लत क्या है ? आज ये सवाल इसलिए क्योंकि संभल विवाद के बाद जैसे ही संघ प्रमुख मोहन भागवत की चुप्पी टूटी, मंदिर में मस्जिद ढूँढने वालों की क्लास लग गई .. आज संघ प्रमुख जिस मॉ़डल की बात कर रहे हैं,  अगर वो योगी मॉडल नहीं है। तो फिर क्या है ? मंदिर-मस्जिद पर बोलने वाले मोहन भागवत जी का रियल हीरो कौन है ? अबकी बार योगी बाबा नहीं, तो फिर कौन ?देखिये इस पर हमारी ये ख़ास रिपोर्ट

यूपी चुनाव से ठीक पहले योगी संघ की पहली पसंद बने, फिर उनके नारे  बटेंगे, तो कटेंगे को संघ का भरपूर समर्थन मिला और अब जब योगी बाबा संभल विवाद को लेकर मंदिर-मस्जिद कर रहे है, तो इससे संघ को ऐतराज है। ऐसा हमारा नहीं कहना है, बल्कि हाल फ़िलहाल में संघ प्रमुख मोहन भागवत के आये बयान से ऐसा प्रतीत हो रहा है। दरअसल पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत विश्वगुरु पर व्याख्यान देते हुए मोहन भागवत ने बिना किसी का नाम लिये ये कहा कि हर दिन मंदिर-मस्जिद विवाद उठाया जा रहा, कुछ लोग सोचते हैं ऐसा करके हिंदुओं के नेता बन जाएंगे, जबकी ये सही नहीं है। मंदिर और मस्जिद का झगड़ा सांप्रदायिक झगड़ा है। और जैसे-जैसे ऐसे झगड़े बढ़ रहे हैं, कुछ लोग नेता बन रहे हैं। अगर नेता बनना ही एकमात्र लक्ष्य है, तो ऐसे झगड़े ठीक नहीं हैं। जो लोग सिर्फ नेता बनने के लिए झगड़े शुरू करते हैं, वे ठीक नहीं हैं।”


मोहन भागवत के इसी बयान को अगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जोड़ा जाए, तो संभल को लेकर योगी बाबा की मस्जिद तोड़ने वाली बातें याद आती हैं। हिंदुत्व का सबसे बड़ा चेहरा योगी बाबा यूँ तो हमेशा से इस बात पर ज़ोर देते आए हैं कि अगर विश्व मानव सभ्यता को बचाना है तो सनातन का सम्मान करना ही होगा। लेकिन इस बार उन्होंने काशी, अयोध्या के बाद संभल का भी नाम ले लिया। अतीत की तस्वीर दिखाते हुए ये कहा है कि कभी काशी तो कभी अयोध्या और कभी संभल में मंदिरों तोड़ा गया। विभिन्न कालखंडों में केवल हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया।


ये कहना कि संभल की जामा मस्जिद में योगी बाबा हरिहर मंदिर ढूँढ रहे हैं, ये कहना ग़लत होगा क्योंकि इस वक्त योगी बाबा 46 साल पहले संभल में हुए दंगों का ज़िक्र कर रहे हैं…ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि दुनिया में सनातन ही ऐसा धर्म है, जिसने हर मत-मजहब के लोगों को विपत्ति के समय शरण दी है।…ऐसे में क्या संघ को योगी का यही मॉडल स्वीकार है…आज ये सवाल इसलिए उठा है, क्योंकि गुजरात मॉडल ने मोदी को केंद्र की राजनीति में स्थापित किया और अब जब योगी मॉडल की डिमांड बढ़ती जा रही है, तो ऐसे में मोहन भागवत जी जिस मॉडल की बात कर रहे हैं, क्या वो योगी बाबा की विचारधारा से मेल खाता है। भारत को यह दिखाने की जरूरत है कि हम एक साथ रह सकते हैं। हम लंबे समय से सद्भावना के साथ रह रहे हैं। अगर हम दुनिया को यह सद्भावना देना चाहते हैं, तो हमें इसका एक मॉडल बनाने की जरूरत है।

यह भी पढ़ें


गौर करने वाली बात ये कि मोहन भागवत आज जिस मॉडल की बात कर रहे हैं, क्या उसमें योगी बाबा को फिट किया जा सकता है क्योंकि ये हर कोई जानता है कि भाजपा से बनने वाला प्रधानमंत्री बिना संघ की स्वीकृति के बनता नहीं है… यूपी के लोकसभा चुनाव में 23 सीटों की भरपाई योगी बाबा से कराई जाने की प्लैनिंग थी, लेकिन संघ जैसे ही ढाल बनकर योगी बाबा के आगे खड़ा दिखा। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने चुप्पी साध ली। ऐसे में संघ प्रमुख को अगर आज योगी बाबा में देश का नेतृत्व धुंधला दिखता है, तो फिर उनका रियल हीरो कौन होगा।

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें