शुक्रवार व्रत: ऐसे करें मां लक्ष्मी, संतोषी और शुक्र देव की पूजा, दूर होंगे कष्ट और पैसों से भरा रहेगा घर!
इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर सभी कष्ट दूर होते हैं और माता रानी भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं. ज्योतिष शास्त्र में यह व्रत शुक्र ग्रह को मजबूत करने और उससे जुड़े दोषों को दूर करने के लिए भी रखा जाता है.
Follow Us:
ब्रह्मवैवर्त और मत्स्य पुराण में शुक्रवार व्रत का उल्लेख मिलता है, जिसमें माता लक्ष्मी, संतोषी और शुक्र ग्रह की अराधना करने के लिए बताया गया है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस तिथि पर विधि-विधान से पूजा करने से जातक के जीवन में सुख, समृद्धि, धन-धान्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.
ये व्रत शुक्र ग्रह को मजबूत करने के लिए रखा जाता है
इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर सभी कष्ट दूर होते हैं और माता रानी भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं. ज्योतिष शास्त्र में यह व्रत शुक्र ग्रह को मजबूत करने और उससे जुड़े दोषों को दूर करने के लिए भी रखा जाता है.
कब रख सकते हैं शुक्रवार व्रत
अगर कोई भी जातक व्रत को शुरू करना चाहता है, तो किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले शुक्रवार से कर सकता है. आमतौर पर 16 शुक्रवार तक व्रत रखने के बाद उद्यापन किया जाता है.
कैसे करें शुक्रवार व्रत की पूजा
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें. लाल कपड़े पर माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. दीप जलाएं और फूल, चंदन, अक्षत, कुमकुम और मिठाई का भोग लगाएं.
मां लक्ष्मी को किसका भोग लगाएं
शुक्रवार के व्रत में मां लक्ष्मी को भोग के लिए खीर (दूध और चावल की) सबसे उत्तम मानी जाती है. इसके अलावा, आप मखाने की खीर, बताशे, नारियल, सिंघाड़ा, पान, और सफेद या गुलाबी मिठाइयाँ भी अर्पित कर सकते हैं.
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किस मंत्र का जप करें
यह भी पढ़ें
‘श्री सूक्त’ और ‘कनकधारा स्तोत्र’ का पाठ करें. मंत्र जप करें, 'ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' और 'विष्णुप्रियाय नमः' का जप भी लाभकारी है.