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400 से ज्यादा सीढ़ियों की चढ़ाई, फिर मिलते हैं हनुमान, जानें कहां है बजरंगबली का ये प्राचीन मंदिर

मंदिर तक पहुंचने की सीढ़ियां बहुत छोटी और खड़ी चढ़ाई के साथ पर्वत को काटकर बनाई गई हैं, और यही कारण है कि यात्रा करना बहुत मुश्किल है. पौराणिक कथा के अनुसार, इस पहाड़ी का नाम हनुमान की माता अंजना देवी के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने वानर योद्धा केसरी से विवाह करने के बाद यहां निवास किया था.

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पवनपुत्र हनुमान पर भक्तों की काफी आस्था है. कहा जाता है कि जहां भी राम कथा होती है, वहां एक स्थान बालाजी के लिए भी जरूर छोड़ा जाता है. 

हनुमान जी का जन्म कहां हुआ था?

क्या आप जानते हैं कि हनुमान जी का जन्म कहां हुआ था. उनके जन्म से जुड़े कई स्थल माने जाते हैं. महाराष्ट्र से लेकर झारखंड में भी उनकी जन्मस्थली मानी जाती है. आज हम 516 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हम्पी की पहाड़ी पर बसे प्राचीन स्थल की बात कर रहे हैं. 

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अंजनाद्रि पहाड़ी की चोटी पर हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है

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कर्नाटक के हम्पी के कोप्पल जिले के गंगावती तालुका के आनेगुंडी कस्बे की सीमा पर अंजनाद्रि पहाड़ी की चोटी पर हनुमान जी का प्राचीन मंदिर आज भी मौजूद है, जिसे उनकी जन्मस्थली माना जाता है. कुछ कथाओं में इसे उस स्थान से जोड़ा गया है, जो वानर राज बाली और सुग्रीव के साम्राज्य से संबंधित है, जहां हनुमान ने सुग्रीव और प्रभु श्रीराम की पहली मुलाकात कराई थी. 

मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 462 सीढ़ियां चढ़ती पड़ती हैं

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इस पहाड़ी की चोटी पर बसे मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 462 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. चोटी से हम्पी के स्मारकों और तुंगभद्रा नदी का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है. इस पहाड़ी से सूर्योदय और सूर्यास्त के मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं, जो प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं.

क्यों पहाड़ी का नाम हनुमान की माता अंजना देवी के नाम पर रखा गया है

मंदिर तक पहुंचने की सीढ़ियां बहुत छोटी और खड़ी चढ़ाई के साथ पर्वत को काटकर बनाई गई हैं, और यही कारण है कि यात्रा करना बहुत मुश्किल है. पौराणिक कथा के अनुसार, इस पहाड़ी का नाम हनुमान की माता अंजना देवी के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने वानर योद्धा केसरी से विवाह करने के बाद यहां निवास किया था.

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इस पहाड़ी से छलांग लगाकर बजरंगबली ने सूर्य को निगल लिया था

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किंवदंती है कि हनुमान जी का जन्म भी इसी पर्वत पर हुआ था और इसी पहाड़ी से छलांग लगाकर बालाजी ने सूर्य को निगल लिया था. स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, हनुमान जी को पंपा क्षेत्र में भगवान शिव का दिव्य अवतार माना जाता है. हर साल हनुमान जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें राज्य भर से हजारों श्रद्धालु हनुमान माला की तीर्थयात्रा पूरी करने के लिए इस पहाड़ी पर आते हैं. धार्मिक महत्व के अलावा, अंजनाद्री पहाड़ी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है. 

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