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Chaitra Navratri 2026 Day 4: मां कुष्मांडा को प्रसन्न करने के लिए करें ये काम, जानें पूजा विधि और भोग

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है. अगर आप भी देवी की कृपा पाना चाहते हैं, तो ये काम जरुर करें.

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चैत्र नवरात्रि जारी है और 22 मार्च यानि रविवार को मां के चौथे रुप की पूजा की जाती है. यह पावन दिन मां कूष्मांडा को समर्पित है. मान्यता है कि मां कूष्मांडा की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कौन है देवी कूष्मांडा जिन्होंने अपनी हल्की सी मुस्कान से ब्रह्मांड का निर्माण किया था? आखिर ये दिन विद्यार्थियों के लिए क्यों खास रहता है? और इस दौरान भक्तों को मां की पूजा करने का क्या फल प्राप्त होता है?

जानें क्या है अभिजित मुहूर्त?

22 मार्च 2026, रविवार को चैत्र शुक्ल चतुर्थी तिथि है, जो रात 09:16 तक रहेगी. इस दिन चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन (मां कुष्मांडा पूजा) और विनायक चतुर्थी का व्रत है. नक्षत्र भरणी रात 10:42 तक रहेगा, और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:09 से 12:57 बजे तक है. राहुकाल शाम 04:40 से 06:11 बजे तक रहेगा. 

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नवरात्र में विद्यार्थियों को क्यों करनी चाहिए मां कूष्मांडा की पूजा?

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दुर्गा पुराण में उल्लेखित है कि मां कूष्मांडा को ब्रह्मांड की उत्पत्ति करने वाली माना जाता है. मान्यता है कि विद्यार्थियों को नवरात्रि में मां कूष्मांडा की पूजा अवश्य करनी चाहिए. इससे उनकी बुद्धि का विकास तेजी से होता है.

देवी कूष्मांडा ने ब्रह्मांड का निर्माण कैसे किया?

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देवी भागवत पुराण के अनुसार, माता रानी ने अपनी हल्की सी मुस्कान से ब्रह्मांड का निर्माण किया था. इसी कारण उन्हें कूष्मांडा देवी कहा जाता है. सृष्टि के आरंभ में अंधकार था, जिसे मां ने अपनी हंसी से दूर किया. उनमें सूर्य की गर्मी सहने की शक्ति है. इसी कारण उनकी पूजा करने से भक्तों को शक्ति और ऊर्जा मिलती है.

मां कूष्मांडा की पूजा से सफल होंगे रूके हुए कार्य


मां कूष्मांडा की पूजा करने से सभी कार्य पूरे होते हैं और जिन कार्यों में रुकावट आती है, वे भी बिना किसी बाधा के पूरे हो जाते हैं. मां की पूजा करने से भक्तों को सुख और सौभाग्य मिलता है. इसलिए अगर आप चाहते हैं जीवन में सफल होना तो नवरात्रि के चौथे दिन देवी कूष्मांडा की पूजा जरूर करें. साथ ही इस दिन रॉयल ब्लू रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. यह रंग शक्ति, समृद्धि, आत्मविश्वास और विचारों में गहराई का प्रतीक है.

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किस तरह करें मां कूष्मांडा की पूजा?

माता की विधि-विधान से पूजा करने के लिए आप ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, साफ वस्त्र पहनें और माता की चौकी को साफ करें. अब माता को पान, सुपारी, फूल, फल आदि अर्पित करें, साथ ही श्रृंगार का सामान भी चढ़ाएं, जिसमें लाल चुनरी, सिंदूर, अक्षत, लाल पुष्प विशेषकर गुड़हल, चंदन, रोली आदि शामिल हों.  माता के सामने घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं. आप चाहें तो दुर्गा सप्तशती का पाठ या फिर दुर्गा चालीसा कर सकते हैं. अंत में मां दुर्गा की आरती करें और आचमन कर पूरे घर में आरती दिखाना न भूलें.

मां को भोग में क्या चढ़ाएं 

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इसके बाद उन्हें फल, मिठाई, या अन्य सात्विक भोग अर्पित करें. मां कूष्मांडा को मालपुआ प्रिय है, हो सके तो उन्हें भोग लगा सकते हैं. इसके अलावा दही और बतासे भी देवी को काफी पसंद है. अगर आप नौ दिन का व्रत कर रहे हैं, तो सिंघाड़े के आटे का हलवा, आलू का हलवा, बादाम का हलवा आदि चीजों का भोग लगा कर इसे आप भी प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सकते हैं. 

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