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भारत के इस विध्वंसक हथियार को खरीदने की दुनियाभर में मची होड़, अब तक हिंदुस्तान ने सिर्फ खास दोस्त को ही मुहैया कराई है मिसाइल
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच कई अरब देशों ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में रुचि दिखाई है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस की ताकत दिखने के बाद भारत के स्वदेशी रक्षा उपकरणों की वैश्विक मांग बढ़ी है.
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भारत अब दुनिया के बड़े और शक्तिशाली देशों की कतार में खड़ा नजर आ रहा है. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि जो भारत कभी दूसरे देशों से सुरक्षा संबंधी हथियार और मिसाइलें खरीदता था, आज उसी भारत से अरब देशों ने हथियार खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात ने कई अरब देशों की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है. ऐसे में पिछले साल भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत पूरी दुनिया को दिखाई. ब्रह्मोस मिसाइल ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद कई आतंकी ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया था. इस कार्रवाई के बाद भारत की सैन्य ताकत और स्वदेशी हथियारों की क्षमता की दुनियाभर में चर्चा होने लगी. यही वजह है कि अब कई अरब देश भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की इच्छा जता रहे हैं.
किन देशों ने दिखाई ब्रह्मोस में दिलचस्पी?
सूत्रों के मुताबिक इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के स्तर पर बातचीत जारी है. भारत और रूस की साझेदारी में तैयार की जा रही ब्रह्मोस मिसाइल अब दुनिया के कई देशों की पहली पसंद बनती जा रही है. वहीं आकाश मिसाइल सिस्टम को ड्रोन और हवाई हमलों को रोकने में बेहद प्रभावी माना जाता है. सूत्रों का कहना है कि यूएई, बहरीन और कतर समेत कई अरब देशों ने भारत से कम और मध्यम दूरी की ब्रह्मोस और आकाश मिसाइल खरीदने में रुचि दिखाई है. हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जानकारी के अनुसार कई छोटे देश भी भारत के रक्षा उपकरणों को खरीदने की इच्छा जता चुके हैं. इससे साफ है कि अब भारत वैश्विक रक्षा बाजार में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है.
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अभी किस देश को मिली भारत की ब्रह्मोस
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जानकारी देते चलें कि भारत लगातार मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है और रक्षा उपकरणों के निर्यात को भी बढ़ावा दे रहा है. अब तक भारत फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति कर चुका है, जबकि कई अन्य देश भी इस अत्याधुनिक मिसाइल को खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. जानकारी के मुताबिक पहले से करीब आधा दर्जन देश ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की प्रक्रिया में जुड़े हुए हैं और अब तीन नए देशों के नाम भी इसमें शामिल हो गए हैं. बता दें कि ब्रह्मोस मिसाइल अपनी तेज रफ्तार और सटीक निशाने के लिए जानी जाती है. यह करीब 300 किलोमीटर तक दुश्मन के ठिकानों को निशाना बना सकती है. वहीं भारत की स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणाली भी हवाई सुरक्षा के क्षेत्र में काफी प्रभावी मानी जाती है, जो लगभग 50 से 60 किलोमीटर तक दुश्मन के हमलों को रोकने में सक्षम है.
मुश्किल में पाकिस्तान ने नहीं की सऊदी अरब की मदद
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सूत्रों की मानें तो पाकिस्तान के साथ पुराने रणनीतिक संबंधों की वजह से सऊदी अरब ने अभी तक भारत से हथियार खरीद को लेकर कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया है. पिछले साल सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग को लेकर समझौता भी हुआ था. हालांकि हाल ही में जब ईरान ने सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, तब पाकिस्तान की ओर से खुलकर समर्थन या सैन्य मदद देखने को नहीं मिली. ऐसे हालात में अब यह साफ नहीं हो पा रहा है कि सऊदी अरब भविष्य में पाकिस्तान से हथियार खरीदने की अपनी रणनीति जारी रखेगा या नए विकल्पों की ओर बढ़ेगा. जानकारों का मानना है कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच मध्य पूर्व के देश अब अपनी सुरक्षा जरूरतों को लेकर नए साझेदार तलाश रहे हैं.
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गौरतलब है कि बीते वर्ष 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकियों ने बड़ा हमला किया था. इस हमले में घूमने आए 26 पर्यटकों की निर्ममता से हत्या कर दी गई थी, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया था. इस जघन्य घटना के बाद भारतीय सेना ने कड़ा रुख अपनाते हुए 7 मई की सुबह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया. इस सैन्य अभियान के तहत भारतीय सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान में मौजूद कई आतंकी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की थी. भारतीय कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से भी जवाबी हमला किया गया, जिसके चलते दोनों देशों के बीच तनाव कई दिनों तक बना रहा. करीब चार दिन तक चले इस संघर्ष के बाद पाकिस्तान की तरफ से बातचीत और तनाव कम करने की पहल की गई, जिसके बाद दोनों देशों के बीच सीजफायर लागू किया गया.