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भारत का आत्मनिर्भर ‘प्रचंड’ लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर, 2027-28 से डिलीवरी शुरू
‘प्रचंड’ वजन में हल्का है और इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह संकरी घाटियों में भी आसानी से लो-फ्लाइंग और मैन्युवरिंग कर सके। खास बात यह है कि यह सियाचिन जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में भी ऑपरेट करने में सक्षम है.
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हेलिकॉप्टर निर्माण के क्षेत्र में भारत अब लगभग पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुका है. लाइट अटैक हेलिकॉप्टर बनाकर भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास अटैक हेलिकॉप्टर बनाने की क्षमता है. लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’ को भारतीय थलसेना और वायुसेना में शामिल किया जा चुका है.
भारत ने बनाया आत्मनिर्भर लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ‘प्रचंड’
सरकार ने सेना की जरूरतों को देखते हुए 156 ‘प्रचंड’ हेलिकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दी थी. इसके तहत रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच 62,700 करोड़ रुपए की डील पर हस्ताक्षर भी हो चुके हैं. अब इस पर तेजी से काम जारी है.
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एचएएल के सीएमडी डॉ. डीके सुनील ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में डिलीवरी के समय का भी खुलासा किया. उन्होंने कहा, “ऑर्डर से जुड़ी लगभग सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं. 2027–28 से हम एयरक्राफ्ट की डिलीवरी शुरू करेंगे. पार्टस डेवलपमेंट, उपकरण, स्ट्रक्चरल पार्ट्स और रॉ मटेरियल के अधिकांश ऑर्डर दिए जा चुके हैं.”
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अब तक लिमिटेड सीरीज प्रोडक्शन के तहत 15 ‘प्रचंड’ लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर सेना में शामिल किए जा चुके हैं. इनमें वायुसेना को 10 और थलसेना को 5 हेलिकॉप्टर मिल चुके हैं. कुल 156 हेलिकॉप्टरों में से 90 थलसेना और 66 वायुसेना को मिलेंगे.
‘प्रचंड’ की खासियतें
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अगर ‘एलसीएच प्रचंड’ की खासियतों की बात करें तो इसे खास तौर पर भारतीय भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है. इसमें 20 मिमी की मशीन गन लगी है. 70 मिमी के रॉकेट दो रॉकेट पॉड्स से लैस हैं, जिनसे लगातार फायरिंग की जा सकती है. यह एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल ‘हेलिना’ दागने में सक्षम है और एयर-टू-एयर मिसाइल भी फायर कर सकता है.
यह हेलिकॉप्टर 21,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है. एलएसी पर तैनात भारतीय सेना के जवानों को यह ऐसा अटैक सपोर्ट देगा, जो पहले उपलब्ध नहीं था. यह लद्दाख और पूर्वोत्तर के कठिन इलाकों में आसानी से ऑपरेट कर सकता है.
‘प्रचंड’ वजन में हल्का है और इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह संकरी घाटियों में भी आसानी से लो-फ्लाइंग और मैन्युवरिंग कर सके। खास बात यह है कि यह सियाचिन जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में भी ऑपरेट करने में सक्षम है.
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इस हेलिकॉप्टर में पायलट हेलमेट-माउंटेड साइट और इंफ्रारेड साइटिंग सिस्टम दिया गया है, जिससे ग्राउंड और हवा में किसी भी टारगेट को आसानी से निशाना बनाया जा सकता है. यह हेलिकॉप्टर सेल्फ-प्रोटेक्शन सूट से लैस है और इसमें रडार व लेजर मिसाइल वार्निंग सिस्टम भी लगा हुआ है. यह कम दृश्यता में दिन और रात- दोनों समय ऑपरेट कर सकता है.
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