देखता रह गया अमेरिका, PM मोदी ने कर ली मैंक्रो से बड़ी डील, भारत में बनेगी फ्रांस की HAMMER मिसाइल, PAK की उड़ी नींद
PM मोदी ने फ्रांस के साथ बड़ी डील कर ली है. भारत के लिहाज से राफेल कितना अहम है ये सब जानते हैं. अगर इसमें HAMMER भी एड कर दें तो ये और भी घातक हो जाएगी. यानी कि पाकिस्तानी आतंकियों को बिल से निकाल कर ठोकने वाली मिसाइल भारत में बनेगी.
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भारत और फ्रांस के रिश्ते अब सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रहे. ये रिश्ते अब आसमान में ताकत बनकर उड़ रहे हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान होने वाले समझौते महज एक समझौता नहीं बल्कि भारत की सैन्य आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है. इस दौरान जिस मिसाइल की सबसे ज्यादा बात हो रही है, वो है हैमर मिसाइल. यह फैसला ऐसे समय में सामने आ रहा है जब भारत फ्रांस से 114 अतिरिक्त दसाल्ट राफेल लड़ाकू विमानों की डील पर भी आगे बढ़ रहा है. साफ है कि अगर राफेल की संख्या बढ़ेगी तो उनके सबसे भरोसेमंद हथियारों का देश में निर्माण रणनीतिक जरूरत भी है और बड़ा अवसर भी.
अब समझते हैं कि हैमर मिसाइल क्या है. हैमर यानी Highly Agile Modular Munition Extended Range एक स्मार्ट और प्रिसिजन गाइडेड एयर टू ग्राउंड वेपन सिस्टम है. आसान भाषा में कहें तो हवा से जमीन पर सटीक वार. यह केवल सटीक नहीं बल्कि बेहद घातक और भरोसेमंद हथियार है.
जानकारों के अनुसार एक बार लक्ष्य लॉक होने और मिसाइल दागे जाने के बाद पायलट को उसे गाइड करने की जरूरत नहीं पड़ती. यह अपनी एडवांस नेविगेशन तकनीक से खुद लक्ष्य तक पहुंचती है. इसमें जीपीएस, लेजर और इंफ्रारेड गाइडेंस का विकल्प होता है और यह जैमिंग से भी काफी हद तक सुरक्षित मानी जाती है.
हैमर मिसाइल का निर्माण भारत में होगा
हैमर मिसाइल फ्रांस की कंपनी एमबीडीए द्वारा विकसित की गई है और इसे राफेल विमान से लॉन्च किया जाता है. यह दूर से दुश्मन के बंकर, कंक्रीट ठिकानों, पुलों और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बना सकती है. पहाड़ी इलाकों में छिपे ठिकानों को नष्ट करने में यह बेहद प्रभावी मानी जाती है. लद्दाख जैसे ऊंचे और कठिन इलाकों में यह भारतीय वायु सेना को सामरिक बढ़त दे सकती है.
राफेल और हैमर का संयोजन आधुनिक युद्ध में बेहद घातक माना जाता है. एक राफेल फाइटर जेट में 250 किलो वर्ग की छह हैमर मिसाइलें लोड की जा सकती हैं. यानी एक ही मिशन में छह अलग अलग लक्ष्यों पर सटीक प्रहार. आज के युद्ध में समय और सटीकता ही निर्णायक कारक हैं और राफेल हैमर कॉम्बिनेशन इसी जरूरत को पूरा करता है.
फ्रांस और भारत के बीच बड़ा समझौता
भारत में इसके निर्माण को लेकर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और फ्रांस की सफ्रान के बीच संयुक्त उपक्रम बनाया गया है. यह संयुक्त कंपनी हैमर वेपन सिस्टम के गाइडेंस किट के निर्माण, सप्लाई, मेंटेनेंस और रिपेयर के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करेगी. गाइडेंस किट किसी भी प्रिसिजन हथियार का दिमाग होता है. अगर यह तकनीक भारत में विकसित होती है तो असली तकनीकी आत्मनिर्भरता भी यहीं मजबूत होगी. विश्लेषकों के अनुसार यह समझौता केवल हथियार निर्माण का मामला नहीं है बल्कि यह एक बड़ा भू राजनीतिक संकेत भी है. इससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती मिलेगी.
HAMMER की खासियत
- हैमर मिसाइल की प्रमुख विशेषताएं
- रेंज लगभग 60 से 70 किलोमीटर
- वजन 125 किलो से 1000 किलो तक
- लक्ष्य स्थिर और गतिमान दोनों
- हर मौसम और दिन रात में संचालन
- फायर एंड फॉरगेट मोड यानी दागो और भूल जाओ
पिनाका खरीदने पर विचार कर रहा फ्रांस!
इसी क्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है. फ्रांस भारत के पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम में भी रुचि दिखा रहा है. भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की फ्रांस यात्रा के दौरान इस विषय पर चर्चा हुई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेरिस यात्रा के दौरान भी पिनाका का जिक्र हुआ था.
क्या है पिनाका रॉकेट सिस्टम?
डीआरडीओ द्वारा विकसित पिनाका एक मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है जो 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकता है. इसकी रेंज लगभग 75 किलोमीटर तक है. आर्मेनिया को रक्षा निर्यात के बाद अब यूरोपीय देशों की नजर भी इस पर है. फ्रांसीसी सैन्य अधिकारियों ने भी इसके आकलन की प्रक्रिया जारी होने की बात कही है.
भारत और फ्रांस के रक्षा संबंध पहले से ही मजबूत रहे हैं. फ्रांस ने भारतीय नौसेना के लिए स्कॉर्पीन क्लास की छह पनडुब्बियां मझगांव डॉकयार्ड में तैयार की हैं. भारतीय वायु सेना के पास राफेल और मिराज फाइटर जेट पहले से मौजूद हैं.
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कुल मिलाकर जिस तरह पेन को फेंको तो वह सीधा जाकर लगती है, उसी तरह हैमर मिसाइल दागो और भूल जाओ की तकनीक पर काम करती है. अब अगर इसका निर्माण भारत में शुरू होता है तो यह भारतीय वायु सेना की मारक क्षमता को और अधिक सटीक और घातक बना देगा. हैमर मिसाइल दागो और भूल जाओ तकनीक पर आधारित है और अब इसका निर्माण भारत में करने की तैयारी है. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और सफ्रान ने इसके लिए संयुक्त कंपनी बनाई है जो गाइडेंस सिस्टम का निर्माण करेगी.
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