Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

पत्नी का अफेयर, भाई की हत्या और फिर 8 साल बाद कत्लेआम, आजमगढ़ कांड के सनकी की असली कहानी सन्न कर देगी

अरविंद खुशमिजाज इंसान था, पूजा पाठ, भगवान में भी खूब यकीन था, लेकिन साल 2018 में कुछ ऐसा हुआ, जिसने अरविंद को पूरी तरह बदल दिया. 8 साल पहले के घटनाक्रम ने उसे कातिल बना दिया था.

Image Source- IANS/Social Media
Loading Ad...

उत्तर प्रदेश का आजमगढ़ जिला उस वक्त दहल गया जब एक घर से पांच अर्थियां उठीं, कातिल उसी घर का बेटा, जिसने अपनी पत्नी, बच्चे और दो पुजारियों को मौत के घाट उतार दिया. आखिर में खुद भी पुलिस की गोली से मारा गया, लेकिन मौत से पहले उसने जो खूनी खेला, उसकी जड़ें 8 साल पहले हुए एक कांड से जुड़ती हैं. जिसमें शादी है, धोखा है और एक मर्डर है. जिसने घर के लायक बेटे को सनकी और नास्तिक में बदल दिया. 

आजमगढ़ का शम्भूपुर गांव, जहां 22-23 सितंबर की दरम्यानी रात, अरविंद सिंह का घर छावनी में तब्दील हो गया, यहां अरविंद ने फिल्मी अंदाज में जो खूनी खेल खेला, उसमें 3 कत्ल के बाद वह रातभर पुलिस को नचाता रहा, अपने तीन बच्चों को बंधक बनाकर अरविंद उन्हें हथियार की तरह इस्तेमाल करता रहा. घर के अंदर अरविंद की गिरफ्त में मासूम बच्चे फंसे रहे और बाहर पुलिस की सांस अटकी रही, क्योंकि मामला इतना नाजुक था कि पुलिस का एक एक्शन तीनों बच्चों की जान ले सकता था. इस बीच अरविंद पुलिस को नचाता रहा. SSP, SP, ADG से लेकर 10-10 थानों की पुलिस घर के बाहर पहुंच गई और रात भर बच्चों को बचाने की कवायद चलती रही. 

अरविंद ने क्यों दिया वारदात को अंजाम?

Loading Ad...

22 सितंबर को अरविंद के घर में महामृत्युंजय जाप चल रहा था. ये पूजा भी अरविंद के लिए ही की जा रही थी. क्योंकि पिछले कुछ साल से वह सनकी और नास्तिक बन चुका था. जिससे घर में आए दिन मां और पत्नी से उसका झगड़ा होता रहता था. ऐसे में किसी पंडित ने बताया कि महामृत्युंजय जाप करवाने से अरविंद का व्यवहार और मानसिक परेशानी दूर हो जाएंगी, साथ ही घर में सुख शांति लौटेगी. हालांकि अरविंद घर में किसी भी पूजा पाठ के सख्त खिलाफ था, 22 सितंबर को वह जैसे ही घर में दाखिल हुआ, यज्ञ हवन जाप देखकर बौखला गया. उसने पूजा का विरोध किया, पुजा करवा रहे पंडितों से कहा कि वह तुरंत यहां से चले जाएं. हालांकि अरविंद की पत्नी बबीता और मां ने उसे रोका. इस बीच वह बार-बार पुजारियों को धमकाता रहा. जब जाप और हवन नहीं रूका तो अरविंद अपने कमरे से भाई की लाइसेंसी रिवॉल्वर निकालकर लाया और फायरिंग शुरू कर दी. जिसमें दो पुजारी मारे गए. जबकि दो जैसे तैसे वहां से भागने में कामयाब रहे. पंडितों पर गोली चलाते वक्त अरविंद की पत्नी बबीता बीच में आई और उसने पति को रोका, लेकिन अरविंद ने मानने की बजाय पत्नी को गोली मार दी, जिसमें उसकी मौके पर ही मौत हो गई. अब तक वह तीन कत्ल कर चुका था. वहीं, गोलीबारी की आवाज, चीख शोर शराबा सुनकर पड़ोसियों को भी पूरी घटना के बारे में पता लग चुका था. किसी ने पुलिस को कॉल कर बताया. 

Loading Ad...

पुलिस ने अरविंद के घर को घेर लिया लेकिन अंदर अभी भी तीन मासूम बच्चे थे. इनमें 8 साल का शौर्य. एक 5 साल की परी और एक 6 महीने की एक मासूम बच्ची थी. इस दौरान बाहर तक ADG समेत 10 थानों के 300 से ज्यादा पुलिसवाले उसे समझाते रहे. इस बीच अरविंद ने बेटी को भूख लगने की बात कहकर पुलिस वालों से चॉकलेट भी मंगवाई. फिर SP ने पुलिसवालों को 500 रुपए देकर बच्ची के लिए चॉकलेट मंगाई जो खिड़की से अरविंद तक पहुंचाई गई. हालांकि अरविंद की धमकी बंद नहीं हुई. वह बार-बार पुलिस से कहता रहा, मेरे पास मत आए तो तीनों बच्चों को गोलियों से भून दूंगा. 

अब रात के करीब 12:30 बज चुके थे, वाराणसी से ATS के कमांडो भी पहुंच चुके थे. अरविंद ने फिर एक बार उनसे कहा कि आप लोग घेराबंदी छोड़ यहां से चले जाओ, नहीं तो बच्चों को गोली मार दूंगा, फिर थोड़ी देर में घर के अंदर से गोली चलने की आवाज आती है. इसके बाद अभी तक इंतजार कर रही पुलिस की टीम हरकत में आई और टियर गैस और स्टेन ग्रेनेड का इस्तेमाल करते हुए अंदर दाखिल हुए. जैसे ही अरविंद ने पुलिस को देखा उसने फायरिंग तेज कर दी. वहीं, अरविंद का बेटा शौर्य घायल पड़ा था. जवाबी कार्रवाई में गोली अरविंद को भी लगी. दोनों को हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी मौत की पुष्टि की. पुजारी महेंद्र पाठक, अखिलेश मिश्रा, पत्नी बबीता सिंह और 9 साल के बेटे को मारने के बाद अरविंद का भी अंत हो चुका था. 

Loading Ad...

शादी, अफेयर और भाई की हत्या ने बनाया नास्तिक 

अरविंद हमेशा से ऐसा नहीं था, वह खुशमिजाज इंसान था, पूजा पाठ, भगवान में भी खूब यकीन था, लेकिन साल 2018 में कुछ ऐसा हुआ, जिसने अरविंद को पूरी तरह बदल दिया. अरविंद अपने बड़े भाई सुनील से बहुत प्यार करता था. उस साल सुनील को पता तलता है कि अरविंद की पत्नी यानी बबीता का उसके ही चचेरे भाई मनीष के साथ अफेयर चल रहा है. लोक लाज और घर की इज्जत की परवाह करते हुए सुनील ने पहले अपने मनीष को समझाया, उसने कहा कि यह हमारे घर की बहू और मेरे भाई की पत्नी की बात है, बबीता से दूर रहो. हालांकि भाई नहीं माना. इसके बाद सुनील बबीता के पास गया और उसे समझाया, घर की इज्जत का हवाला दिया और उसे चचेरे भाई के खिलाफ छेड़खानी का केस दर्ज करवाने की अपील की. बबीता भी बात मान गई और अरविंद के रिश्तेदार भाई के खिलाफ पुलिस में कंप्लेन दर्ज करवा दी. जब ये बात उन लोगों को पता चली तो वह बौखला गए, उन्हें पता चल गया था कि सुनील के कहने पर ही बबीता ने उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया है. यहां से अब सुनील और उसके चचेरे भाई के बीच बबीता की वजह से दुश्मनी पैदा हो गई थी. 

फिर एक दिन साल 2019 में जब सुनील मंदिर जा रहा था, तब उसकी गोली मारकर हत्या कर दी जाती है. हत्या के आरोप में सुनील का वही चचेरा भाई मनीष जेल भी जाता है, हालांकि कुछ साल बाद जेल से बाहर आ गया. 

Loading Ad...

भाई को खोने, पत्नी का अफेयर और परिवार पर आए इस संकट ने अरविंद को बूरी तरह डिस्टर्ब कर दिया. वहीं, एक बाद अरविंद को बार-बार ध्यान आती रही कि उसके भाई का कत्ल ऐसे समय में हुआ जब वह मंदिर जा रहा था, इसी सोच ने उसे भगवान के खिलाफ कर दिया था. वह पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठान के सख्त खिलाफ था, लेकिन परिवार को लगता रहा कि उसकी मानसिक स्थिति की वजह सुनील की आत्मा है. जो अरविंद को बार-बार नजर आती है. सुनील की आत्मा को अभी भी शांति नहीं मिली. शायद महामृत्युंजय जाप से उसकी आत्मा और अरविंद की मानसिक स्थिति में कुछ बदलाव आए, लेकिन परिवार को क्या पता था एक धार्मिक अनुष्ठान सब कुछ उजाड़ देगा. 

यह भी पढ़ें- जब कानून से हारा तो बहन के हत्यारे पति को खुद जहन्नुम पहुंचाया, मर्डर के बाद कहा- अब किसी लड़की के साथ…

यह भी पढ़ें

बताया जा रहा है अरविंद ने पत्नी को गोली मारने से पहले ये भी कहा था, ‘तेरे चक्कर में मेरे भाई सुनील की हत्या हुई थी और अब ड्रामा कर रही है.’ अब अरविंद के परिवार में उसकी दो बेटियां और केवल मां है. खौफ के वो 8 घंटे जो 8 साल पहले एक कत्ल से शुरू हुए और 5 लोगों की मौत पर जाकर रुके. 

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...