किशोर बियानी और राकेश बियानी पर CBI का शिकंजा, 9 बैंकों से लिए कर्ज में धोखाधड़ी का आरोप
यूचर रिटेल पर सीबीआई का शिकंजा, 904.32 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में प्रमोटर किशोर बियानी और राकेश बियानी समेत कुछ अज्ञात लोक सेवकों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है.
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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मुंबई स्थित कंपनी मैसर्स फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) के खिलाफ 904.32 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है. इस मामले में कंपनी के प्रमोटरों और निदेशकों से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान भी चलाया गया.
SBI की शिकायत पर CBI ने दर्ज किया केस
सीबीआई ने यह कार्रवाई एसबीआई, स्ट्रेस्ड एसेट्स मैनेजमेंट ब्रांच-3, मुंबई की शिकायत पर की है. शिकायत के आधार पर सीबीआई ने मैसर्स फ्यूचर रिटेल लिमिटेड और इसके प्रमोटरों, प्रबंध निदेशकों, कार्यकारी निदेशकों और गारंटरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.
आरोपियों में कंपनी के प्रमोटर किशोर बियानी और राकेश बियानी के नाम शामिल हैं. इसके अलावा कुछ अज्ञात लोक सेवकों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है. इन पर धोखाधड़ी के लिए आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध करने का आरोप है. इस वजह से शिकायतकर्ता बैंक को कथित तौर पर 904.32 करोड़ रुपए का गलत नुकसान हुआ है.
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9 बैंकों के कंसोर्टियम से लिया था लोन
आरोप है कि आरोपियों ने एक आपराधिक साजिश रची और शिकायतकर्ता बैंक और 9 बैंकों के एक समूह (कंसोर्टियम) से क्रेडिट सुविधाएं हासिल कीं. इन सुविधाओं में वर्किंग कैपिटल, टर्म लोन और लेटर ऑफ क्रेडिट शामिल थे. कंपनी बिग बाजार, फैशन बिग बाजार, फूडहॉल आदि जैसे हाइपर मार्केट और सुपरमार्केट के जरिए कई रिटेल फॉर्मेट में काम करती थी.
कंपनी अपने स्टोर के माध्यम से एफएमसीजी और फैशन के सामानों की जनरल ट्रेडिंग में भी शामिल थी. कंपनी ने एसबीआई की कमर्शियल ब्रांच, फोर्ट, मुंबई से क्रेडिट सुविधा ली थी. आरोप है कि कंपनी ने बैंक से मिले फंड का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए नहीं किया, जिसके लिए उसे मंजूरी दी गई थी और इस तरह बैंक के साथ धोखाधड़ी की.
लोन की रकम दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर करने का आरोप
इसके अलावा यह भी आरोप है कि कंपनी ने अपने फंड को सहयोगी कंपनियों या उससे जुड़ी अन्य इकाइयों में भेज दिया (डायवर्ट कर दिया), जिससे बैंक को नुकसान हुआ. फंड के डायवर्जन के कारण बैंक की राशि का सही उपयोग नहीं हो सका और अंततः खाता एनपीए में बदल गया.
मुंबई में कई ठिकानों पर CBI की छापेमारी
सीबीआई के अनुसार, 4 नवंबर 2026 को मामला दर्ज होने के बाद एजेंसी ने मुंबई में मैसर्स एफआरएल के प्रमोटरों और निदेशकों से जुड़ी कई जगहों पर तलाशी ली. तलाशी के दौरान, जांच से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए और उन्हें जब्त कर लिया गया.
सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि तलाशी अभियान का उद्देश्य लोन से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड और फंड के इस्तेमाल से संबंधित सबूत जुटाना था. बरामद किए गए दस्तावेजों की जांच की जा रही है, ताकि साजिश के पूरे दायरे का पता लगाया जा सके.
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जांच एजेंसी अब इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका की पहचान करने में जुटी है, जिसमें सरकारी कर्मचारी और निजी व्यक्ति दोनों शामिल हैं. साथ ही लोन की रकम का अंतिम इस्तेमाल कहां हुआ, इसका भी पता लगाया जा रहा है. सीबीआई का कहना है कि फंड के प्रवाह का पूरा ट्रेल खंगाला जाएगा और जरूरत पड़ने पर और लोगों से पूछताछ भी की जाएगी.