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15,000 की इंटर्नशिप से करोड़ों का पैकेज, Google तक कैसे पहुंचा ये इंजीनियर?

Google Job: मशहूर एंटरप्रेन्योर और कंटेंट क्रिएटर Ankur Warikoo ने हाल ही में इस इंजीनियरिंग की कहानी शेयर की, जो देखते ही देखते लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई. इस कहानी में कोई जादू नहीं है, कोई शॉर्टकट नहीं है , बस लगातार की गई मेहनत है , जो धीरे -धीरे बड़ा रिजल्ट देती है.

Image Source: Canva/ insta/@ankurwarikoo
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Ankur Warikoo: हम अक्सर सुनते है कि सफलता के लिए समय और मेहनत चाहिए. कई बार यह बात सिर्फ किताबों तकही सिमित  लगती है , लेकिन कुछ लोग इसे अपनी जिंदगी में सच कर दिखाते है. यह कहानी भी ऐसे ही एक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की है, जिसने रातों -रात अमीर बनने का सपना नहीं देखा, बल्कि धीरे -धीरे अपने दिन -रात की मेहनत से खुद को उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां लोग पहुंचने का सिर्फ सपना देखते है. मशहूर एंटरप्रेन्योर और कंटेंट क्रिएटर Ankur Warikoo ने हाल ही में इस इंजीनियरिंग की कहानी शेयर की, जो देखते ही देखते लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई. इस कहानी में कोई जादू नहीं है, कोई शॉर्टकट नहीं है , बस लगातार की गई मेहनत है , जो धीरे -धीरे बड़ा रिजल्ट देती है.

छोटी शुरुआत, बड़े सपने

इस इंजीनियर की शुरुआत बहुत साधारण थी. एक छोटी कंपनी में इंटर्नशिप, जहां सैलरी सिर्फ करीब 15,000 रुपये थी. न कोई बड़ी पहचान, न ही कोई खास सुविधा. लेकिन उस समय उन्होंने एक बहुत जरूरी चीज समझ ली, शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन सोच बड़ी होनी चाहिए. उन्होंने उस छोटे मौके को हल्के में नहीं लिया. उसी समय को अपने स्किल्स को मजबूत करने में लगाया. यही नींव आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी.

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मेहनत रंग लाई- गूगल तक का सफर

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धीरे-धीरे सीखते हुए, खुद को बेहतर बनाते हुए उन्होंने वह मुकाम हासिल किया, जिसका सपना लाखों लोग देखते हैं, Google में नौकरी. और यहां सिर्फ नौकरी ही नहीं, बल्कि करोड़ों के पैकेज तक पहुंचने का सफर. 15,000 रुपये से शुरू हुआ यह सफर 7.5 करोड़ सालाना पैकेज तक पहुंच गया. यह सुनने में भले ही एक झटके में हुआ लगे, लेकिन इसके पीछे सालों की तैयारी और लगातार की गई मेहनत छिपी है.

स्किल्स ऐसे बनते हैं, एक दिन में नहीं

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Ankur Warikoo ने बताया कि इस इंजीनियर की सफलता किसी किस्मत का खेल नहीं थी. इसके पीछे एक साफ प्लान और अनुशासन था. सबसे पहले, उन्होंने अपनी कोडिंग स्किल्स पर जमकर काम किया. LeetCode जैसे प्लेटफॉर्म पर करीब 500 से ज्यादा प्रॉब्लम सॉल्व कीं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई खिलाड़ी मैच से पहले रोज घंटों प्रैक्टिस करता है.

दुनिया से सीखने की आदत

उन्होंने खुद को सिर्फ अपनी नौकरी तक सीमित नहीं रखा. करीब 12 ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट्स पर काम किया. इससे उन्हें दुनिया भर के डेवलपर्स के साथ काम करने का मौका मिला.यहीं से असली सीख मिली, रियल वर्ल्ड प्रॉब्लम्स को सॉल्व करना, टीम में काम करना और नई चीजें समझना. यही अनुभव उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाता गया.

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बदलाव से डरना नहीं, उसे अपनाना

इस इंजीनियर ने एक और बड़ा फैसला लिया हर दो साल में कंपनी बदलना. यह फैसला सिर्फ ज्यादा सैलरी के लिए नहीं था, बल्कि खुद को नए चैलेंज देने के लिए था. हर नई जगह पर उन्हें कुछ नया सीखने को मिला, और धीरे-धीरे उनका अनुभव, स्किल और सैलरी, तीनों बढ़ते गए.

सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता

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Ankur Warikoo हमेशा इस बात पर जोर देते हैं कि असली सफलता धीरे-धीरे बनती है. कोई भी रातों-रात सफल नहीं होतावे युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई पहल भी कर रहे हैं, जैसे उनका लर्निंग प्लेटफॉर्म WebVeda, जहां लाखों लोग नई स्किल्स सीख रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने “India Genius Challenge” जैसी स्कॉलरशिप भी शुरू की है, जिससे होनहार छात्रों को आर्थिक मदद मिलती है.

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