2026 में धाक बढ़ाएगा भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन, नेपाल से निपटने को तैयार, अमेरिका को भी देगा मुंहतोड़ जवाब
साल 2026 की शुरुआत भारत के पड़ोसी देशों के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाला है. वहीं, भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति की भी अग्निपरीक्षा है.
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साल 2026 भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी’ की अग्निपरीक्षा है. ऐसा क्यों कहा जा रहा है? इसके पीछे कई कारण हैं. आप जानते हैं कि इस वक्त भारत के पड़ोसी मुल्कों का क्या हाल है. पाकिस्तान जो हमेशा भारत की पीठ में खंजर घोपने की फ़िराक़ में रहता है. चीन हमेशा अपनी विस्तारवादी नीति के तहत भारत की ज़मीन पर नज़र गढ़ाए रहता है. वहीं, बांग्लादेश की बात की जाए तो इसके हालात भी आपको पता हैं कि कैसे कट्टरवादी इसे अपने कब्जे में ले रहे हैं. इसके बाद नेपाल बचता है, नेपाल में भी आपने देखा कि किस तरह से वहां के युवा सड़कों पर उतर आए थे. कुल मिलाकर बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल तीनों देश गहरे राजनीतिक और सामाजिक संकट से जूझ रहे हैं. वहीं, चीन तो भारत का जानी दुश्मन है ही. इसलिए कहा जा रहा है कि साल 2026 भारत के ‘नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी’ की अग्निपरीक्षा है.
बांग्लादेश में राजनीतिक संकट
बांग्लादेश इस वक्त राजनीतिक संकट का सामना कर रहा है. शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद, वहां की स्थिति नाज़ुक बनी हुई है. कट्टरपंथी हावी हो रहे हैं. भारत विरोधी नारे, बदले की राजनीति, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की कई घटनाएं सामने आ रही हैं. इसी साल फरवरी के महीने में आम चुनाव भी होने वाला है. अब ये चुनाव तय करेगा कि बांग्लादेश का भविष्य भारत के साथ कैसा होगा, और इसके राजनीतिक रिश्ते कैसे होंगे.
पाकिस्तान में सेना का वर्चस्व
पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां हमेशा से लोकतंत्र की तुलना में सेना ताक़तवर रही है. सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर खुलेआम भारत के ख़िलाफ़ ज़हर उगलता है. अब आसीम मुनीर को फील्ड मार्शल और देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज बना दिया गया है. इमरान खान की पार्टी PTI को राजनीति से लगभग बाहर कर दिया गया है. पाकिस्तान अब पूरी तरह से आसिम मुनीर जैसे कट्टरपंथी के कब्जे में है. ऐसे में भारत के लिए पाकिस्तान ऐसा पड़ोसी मुल्क है जो न पूरी तरह स्थिर है और न ही अपनी रणनीति बदलने को तैयार है.
नेपाल में सड़क पर उतरे युवा
अभी हाल ही नेपाल में क्या हुआ, सबको पता है. किस तरह से नेपाल में युवाओं ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में कइयों की जान गई. सुरक्षाकर्मी और युवाओं के बीच झड़प हुई. 2025 में युवा आंदोलन ने प्रधानमंत्री के पी ओली की सरकार गिरा दी थी. 40 प्रतिशत से ज्यादा युवा मतदाता अब सिस्टम को बदलने के मूड में हैं. नेपाल में भी मार्च 2026 में चुनाव है, लेकिन माहौल अभी तक सामान्य नहीं हुआ है. ऐसे में आगामी चुनाव ये तय करेगा कि भविष्य में नेपाल की स्थिति सामान्य होती है या नहीं, और भारत के साथ इसके रिश्ते कैसे बनते हैं.
भारत को कमजोर करना चाहता है अमेरिका?
अमेरिका एक ऐसा देश है जिसे लेकर कहा जाता है कि जबरदस्ती ये दूसरे देशों के मामले में अपनी टाँग अड़ाता है. अभी हाल ही में वेनेजुएला में अमेरिका ने क्या किया सबको पता है. ईरान में कट्टरपंथियों को कुचलने के लिए अमेरिका वहां के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करता है. अमेरिका खुद को आतंकवाद का विरोधी बताता है, लेकिन यही अमेरिका पाकिस्तान जैसे आतंकवादी देश को कुछ नहीं बोलता, आसिम मुनीर जैसे कट्टरपंथी को व्हाइट हाउस बुलाकर सम्मानित करता है. बांग्लादेश में पनप रहे कंट्टरपंथियों पर ख़ामोश रहता है. अमेरिका की इस दोहरी नीति को देखकर तो यही कहा जा सकता है कि टैरिफ़ वॉर के बाद भारत का अमेरिका बाल बांका नहीं कर पाया. भारत और रूस दोस्ती की मिसाल है. ये सब देख अमेरिका किसी भी तरह भारत को तोड़ना चाहता है, और पड़ोसियों के साथ भारत के व्यापारिक और राजनीतिक रिश्तों को खत्म करना चाहता है. ताकि भारत को पूरी तरह से कमजोर किया जा सके. इसलिए अमेरिका अपना उल्लू सीधा करने के चक्कर में दोहरी नीति का पालन कर रहा है.
भारत के लिए क्या दांव पर है?
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बांग्लादेश में इस्लामिक झुकाव, पाकिस्तान में सैन्य वर्चस्व और नेपाल में युवा असंतोष तीनों भारत के लिए जोखिम हैं. खतरे साफ़ हैं- सीमा पार आतंकवाद, शर्णार्थी संकट, कट्टरपंथ और चीन का बढ़ता असर. ये वो चुनौतियां जिससे भारत को लड़ना होगा. इसलिए कहा जा रहा है कि साल 2026 भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी’ की अग्निपरीक्षा है.
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