Advertisement
Toll Plaza: क्या कोई भी खोल सकता है टोल नाका? जानिए ठेका मिलने की पूरी प्रक्रिया
Toll Plaza: सरकार और NHAI की तरफ से तय नियमों के तहत टेंडर प्रकिया से गुजरना पड़ता हैं. साथ ही अलग अलग मॉडल होते हैं , जिनके आधार पर पूरा सिस्टम काम करता है.
Advertisement
Toll Plaza: अक्सर लोगों को लगता है कि टोल प्लाजा चलाने वाले लोग बिना ज्यादा मेहनत के अच्छा पैसा कमा लेते हैं. लेकिन असलियत यह हैं कि इसके पीछे बड़ा निवेश, लंबी योजना और सरकार की सख्त प्रकिया होती हैं. कोई भी व्यक्ति सीधे टोल नाका नहीं चला सकता. इसके लिए सरकार और NHAI की तरफ से तय नियमों के तहत टेंडर प्रकिया से गुजरना पड़ता हैं. साथ ही अलग अलग मॉडल होते हैं , जिनके आधार पर पूरा सिस्टम काम करता है.
BOT मॉडल क्या होता है और इसमें कैसे कमाई होती है
BOT यानी Build Operate Transfer एक ऐसा मॉडल है जिसमें किसी कंपनी को सड़क बनाने से लेकर उसे चलाने तक की जिम्मेदारी मिलती है. इसमें सबसे पहले NHAI टेंडर जारी करता है और जिस कंपनी को काम मिलता है, वह सड़क का निर्माण करती है. इसके बाद वही कंपनी कई सालों तक उस सड़क पर टोल वसूलती है.
इस मॉडल में कंपनियां आमतौर पर 20 से 30 साल तक संचालन करती हैं. इसी दौरान टोल से आने वाली कमाई से वे अपना निवेश वापस निकालती हैं और मुनाफा कमाती हैं. हालांकि यह भी जरूरी नहीं कि हर बार फायदा ही हो, क्योंकि अगर ट्रैफिक कम रहा तो कमाई भी घट सकती है.
Advertisement
2HAM मॉडल क्यों माना जाता है कम रिस्क वाला तरीका
Advertisement
HAM यानी Hybrid Annuity Model उन कंपनियों के लिए होता है जो ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहतीं. इसमें सड़क बनाने का खर्च सरकार और कंपनी दोनों मिलकर उठाते हैं. आमतौर पर 40% पैसा सरकार देती है और 60% कंपनी लगाती है.
इस मॉडल की खास बात यह है कि टोल वसूली कंपनी नहीं करती. इसके बजाय सरकार कंपनी को तय समय-समय पर निश्चित भुगतान करती रहती है. इससे कंपनी को पहले से पता रहता है कि उसे कितना पैसा मिलेगा, इसलिए नुकसान का खतरा काफी कम हो जाता है और एक स्थिर इनकम मिलती रहती है.
ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर डिजिटल डंडा, स्क्रीन पर सरेआम दिखेगा चालान
Advertisement
TOT मॉडल में बनी हुई सड़कों का टेंडर दिया जाता है
TOT यानी Toll Operate Transfer मॉडल में नई सड़क नहीं बनाई जाती. यहां पहले से बनी हुई और चालू सड़क का टोल वसूलने का अधिकार किसी कंपनी को दे दिया जाता है. इसके लिए भी टेंडर प्रक्रिया होती है.
जिस कंपनी की बोली सबसे अच्छी होती है, उसे यह अधिकार मिल जाता है. इसके बाद कंपनी को सड़क का रखरखाव भी करना होता है, जैसे गड्ढों की मरम्मत और ट्रैफिक मैनेजमेंट. बदले में टोल से होने वाली कमाई उसी कंपनी को मिलती है, लेकिन सरकार को तय रकम भी देनी होती है.
क्या कोई आम व्यक्ति टोल प्लाजा का ठेका ले सकता है?
Advertisement
साधारण तौर पर कोई भी व्यक्ति सीधे टोल नाका नहीं चला सकता. इसके लिए मजबूत वित्तीय स्थिति, बड़ी कंपनी और अनुभव जरूरी होता है. टेंडर में सिर्फ वही कंपनियां हिस्सा ले सकती हैं जिनकी नेटवर्थ तय मानकों के अनुसार हो. अगर किसी प्रोजेक्ट की लागत 1000 करोड़ रुपये है तो कंपनी के पास कम से कम 100 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की नेटवर्थ होनी चाहिए. इसके अलावा सिक्योरिटी डिपॉजिट भी जमा करना होता है, जो कई बार करोड़ों में होता है.
टोल सिस्टम से सरकार और कंपनियों दोनों को फायदा कैसे मिलता है
यह भी पढ़ें
टोल सिस्टम का मुख्य उद्देश्य सड़कों के निर्माण और रखरखाव के लिए फंड जुटाना होता है. टोल से जो पैसा आता है, उसका इस्तेमाल सड़क सुधार, मरम्मत और नई परियोजनाओं में किया जाता है. कंपनियों को भी इसमें मुनाफा मिलता है, लेकिन यह पूरी तरह नियमों और ट्रैफिक पर निर्भर करता है.