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इधर जंग, उधर धंधा- मिडिल ईस्ट संकट के बीच पैसा बनाने में जुटे ट्रंप के बेटे, खाड़ी देशों पर हथियार खरीदने का डाल रहे दबाव

मिडल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बेटे पर निजी व्यापारिक हितों को साधने और खाड़ी देशों पर हथियारों की खरीद के लिए दबाव बनाने का आरोप लगा है.

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05 Apr 2026
( Updated: 05 Apr 2026
01:13 PM )
इधर जंग, उधर धंधा- मिडिल ईस्ट संकट के बीच पैसा बनाने में जुटे ट्रंप के बेटे, खाड़ी देशों पर हथियार खरीदने का डाल रहे दबाव
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‘आपदा में अवसर’, ये कहावत तो आपने सुनी ही होगी. मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच कुछ ऐसा ही देखा जा रहा है. दरअसल, अमेरिका और इजरायल-ईरान के बीच जारी युद्ध में एक नए विवाद की एंट्री हो गई है. आरोप है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे, डोनल्ड ट्रंप जूनियर आपदा को अवसर बनाते हुए पैसा कमाने में लग गए हैं. वे खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन सौदों के लिए दबाव बना रहे हैं. 

ट्रंप जूनियर पर गोपनीय दस्तावेजों से बड़ा खुलासा

पेंटागन के कुछ गोपनीय दस्तावेजों से यह संकेत मिले हैं कि राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप के बेटे अपनी कंपनी के माध्यम से इन देशों को इंटरसेप्टर ड्रोन और मिसाइल सिस्टम बेचने की कोशिश कर रहे हैं. आपको बता दे कि ट्रंप जूनियर की कंपनी पॉलराइड स्थित ऑटोनॉमस ड्रोन कंपनी पावस में प्रमुख निवेशक है.

ट्रंप जूनियर खुद करा रहे हैं मिसाइल और ड्रोन की डील

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यह कंपनी ईरान के साथ चल रहे युद्ध के दौरान खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के नाम पर ड्रोन और मिसाइल प्रणालियों की आपूर्ति करने में बहुत सक्रिय बताई जा रही है. रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप जूनियर खुद खाड़ी देशों के शीर्ष अधिकारियों के संपर्क में हैं ताकि इन हथियारों की बिक्री की जा सके.

पेंटागन ने सुरक्षा के लिए आवंटित किया लगभग 10,201 करोड़ रुपये का बजट

आपको बता दें कि पेंटागन ने हाल ही में ड्रोन और मिसाइल सुरक्षा के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित किया है. यह बजट लगभग 10,201 करोड़ रुपये है. इस फंड का उद्देश्य अमेरिकी मित्र देशों को उन्नत इंटरसेप्टर सिस्टम और ड्रोन उपलब्ध कराना है, ताकि वे ईरान, चीन और रूस के गठबंधन से निपटने में मदद मिल सके. आरोप है कि ट्रंप जूनियर की कंपनी इसी सरकारी फंड का फायदा उठाना चाहती है, ताकि खाड़ी देशों को ड्रोन बेचकर ढेर सारा पैसा बना सके. 

ट्रंप जूनियर की योजना पर सुरक्षा विशेषज्ञों ने उठाए सवाल

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वहीं, सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप जूनियर की यह योजना न केवल हितों के टकराव का मामला हो सकती है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ट्रंप परिवार के प्रभाव का व्यावसायिक इस्तेमाल भी दर्शाती है.

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