×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन का मामला- पूर्व मंत्री ने उठाई आवाज, बोले- धर्मांतरण को रोकने के लिए बने विशेष पैनल

Forced Conversion: पाकिस्तान के पूर्व मंत्री ने जबरन धर्मांतरण के मामलों पर चिंता जताते हुए इसे रोकने के लिए एक विशेष पैनल के गठन की मांग की है.

Author
06 Apr 2026
( Updated: 06 Apr 2026
02:48 PM )
पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन का मामला- पूर्व मंत्री ने उठाई आवाज, बोले- धर्मांतरण को रोकने के लिए बने विशेष पैनल
AI_Generated
Advertisement

पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन और नाबालिग लड़कियों की शादी के मामलों को लेकर बहस तेज हो गई है. ऑल 'पाकिस्तान माइनॉरिटी अलायंस' के चेयरमैन और पूर्व संघीय मंत्री पॉल जैकब भट्टी ने सरकार से एक स्वतंत्र संसदीय आयोग गठित करने की मांग की है, जो ऐसे मामलों का गहन विश्लेषण कर सके.

जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह गंभीर मुद्दा

अपने बयान में भट्टी ने इस मुद्दे को “गंभीर और चिंता का जायज विषय” बताते हुए कहा कि बार-बार सामने आ रहे जबरन धर्मांतरण और बाल विवाह के मामले बुनियादी मानवाधिकारों को कमजोर कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इससे बच्चों के अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा पर सीधा असर पड़ रहा है.

अदालती फैसले के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन

यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब 'फेडरल कॉन्सटिट्यूशनल कोर्ट' के एक फैसले के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. अदालत ने अपने हालिया निर्णय में 30 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति को 13 वर्षीय मारिया शाहबाज की कस्टडी की अनुमति दी, जिसके बाद ईसाई समुदाय में आक्रोश फैल गया.

Advertisement

जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह अवैध

भट्टी ने स्पष्ट किया कि कोई भी नाबालिग धर्म या विवाह जैसे संवेदनशील मामलों में स्वतंत्र और पूर्ण सहमति नहीं दे सकता. उन्होंने जोर दिया कि दबाव या जबरदस्ती के तहत होने वाले किसी भी धर्म परिवर्तन या विवाह को कानूनी या नैतिक रूप से वैध मानने से पहले उसकी सख्त और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.

पाकिस्तान सरकार से फैसला बदलने की मांग

उन्होंने पाकिस्तान सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए कहा कि इसे देश के संवैधानिक प्रावधानों और 'यूनाइटेड नेशन्स कंवेंशन ऑन द राइट्स ऑफ चाइल्ड' के तहत किए गए अंतरराष्ट्रीय वादों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए.

संसद की मंजूरी से नया संगठन बनाने की सलाह

Advertisement

भट्टी ने यह भी सुझाव दिया कि संसद की मंजूरी से एक अनिवार्य समीक्षा निकाय बनाया जाए, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानवाधिकार विशेषज्ञ, सभी प्रमुख धार्मिक समुदायों के प्रतिनिधि, अनुभवी मानवाधिकार वकील और बाल संरक्षण विशेषज्ञ शामिल हों.

जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ सख्त कानून की अपील

इस बीच, 29 मार्च को कराची प्रेस क्लब के बाहर बड़ी संख्या में ईसाइयों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा और जबरन धर्म परिवर्तन और बाल विवाह के खिलाफ सख्त कानून की मांग को लेकर नारेबाजी की.

ईसाई लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन पर चिंता

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ईसाई लड़कियों के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और शादी के मामलों में वृद्धि हो रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है. चर्च लीडर और मानवाधिकार कार्यकर्ता गजाला शफीक ने अदालत के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह देश के मौजूदा बाल विवाह कानूनों की अनदेखी करता है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब नाबालिग कानूनी पहचान पत्र तक हासिल नहीं कर सकते, तो उन्हें धर्म या विवाह जैसे बड़े फैसले लेने के योग्य कैसे माना जा सकता है.

Advertisement

अल्पसंख्यकों में बढ़ती असुरक्षा पर जताई गई चिंता

अन्य वक्ताओं ने भी अल्पसंख्यक समुदायों को प्रभावित करने वाले विवादित कानूनों और फैसलों की समीक्षा की मांग की और चेतावनी दी कि यदि इन मुद्दों का समाधान नहीं किया गया तो इससे अल्पसंख्यकों में असुरक्षा और बढ़ेगी. कई संगठनों, जिनमें नेशनल क्रिश्चियन पार्टी और गवाही मिशन ट्रस्ट शामिल हैं, ने भी इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए.

नाबालिग लड़कियों के लिए सख्त कानून जरूरी

यह भी पढ़ें

प्रदर्शन में शामिल लड़कियों ने मारिया शाहबाज मामले में न्याय की मांग की और 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह पर रोक लगाने वाले कानूनों के सख्त अनुपालन पर जोर दिया. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कानूनी सुधार और न्यायिक समीक्षा नहीं की गई, तो खासकर नाबालिग लड़कियां गंभीर खतरे में बनी रहेंगी.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें