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आचार संहिता लागू के बाद अगर अब उम्मीदवारों ने वोट के लालच में जनता को बांटे पैसे, तो पड़ सकता है पछताना

Model Cord Of Conduct Rules: आम आदमी पार्टी भाजपा नेता प्रवेश वर्मा पर नोट के बदले वोट मांगने का आरोप लगा रही है। तो वहीं इस बारे में प्रवेश वर्मा ने कहा है कि उनकी संस्था गरीब जरुरतमंदो लोगो कि मदद करती है।

आचार संहिता लागू के बाद अगर अब उम्मीदवारों ने वोट के लालच में जनता को बांटे पैसे, तो पड़ सकता है पछताना
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Model Cord Of Conduct Rules: कुछ ही दिन पहले दिल्ली में बीजेपी प्रवेश वर्मा महिलाओं को पैसा बाट रहा था।  चुनाव से पहले दिल्ली में भाजपा नेता कि इस हरकत के बाद सियासी माहोल और गर्म हो चुका है। आम आदमी पार्टी भाजपा नेता प्रवेश वर्मा पर नोट के बदले वोट मांगने का आरोप लगा रही है। तो वहीं इस बारे में प्रवेश वर्मा ने कहा है कि उनकी संस्था गरीब जरुरतमंदो लोगो कि मदद करती है। और ये पैसा इसी सिलसिले में दिए गए थे।

दिल्ली में अगले महीने से चुनाव होने वाले है।  जिसके लिए आचार संहिता लागू हो चुकी है। वहीं आपको बता दे, 5 फरवरी को दिल्ली में चुनाव और 8 फरवरी को रिजल्ट आने वाला है।अब इस बीच लोगो के मन में सवाल आ रहा है कि क्या आचार सहिंता लागू होने के बाद भी कोई भी उम्मीदवार इस तरह से कैश बाट सकता है।  आइए जानते है इस खबर को विस्तार से ....

आचार सहिंता लागू होने के बाद नही बाट सकते कैश 

वहीं आपको बता दे, आचार सहिंता लागू होने के बाद बहुत से काम बंद हो जाते है।  जो उम्मीदवार और पार्टी नही कर सकते है।  आचार सहिंता चुनाव कि तारीख को एलान के बाद से लेकर चुनाव के परिणाम घोषित होने तक लागू होती है।  इस दौरान पार्टी या उम्मीदवार इस तरह का कोई काम नही कर सकता है जिसे आचार सहिंता का उल्लंघन हो।  इस दौरान कोई उम्मीदवार कैश भी नही बाट सकता। वहीं अगर कोई उम्मीदवार इस तरह का काम करता है तो फिर चुनाव आयोग कि तरफ से उस पर कार्यवाही कि जा सकती है। ऐसी सिचुएशन में उस उम्मीदवार का नामंकन रद्द किया जा सकता है।  और उसे चुनाव लड़ने के लिए आयोग घोषित किया जा सकता है। 

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नही कर सकते है काम 

 आचार संहिता लागू होने के बाद सार्वजनिक धन का इस्तेमाल ऐसे किसी काम में नही हो सकता है।  जिससे किसी खास पार्टी को फायदा पहुंचे।  इसके आलावा सरकारी गाडी और सरकारी मशीन का इस्तेमाल भी चुनाव में नही किया जा सकता है। इस दौरान सरकारी घोषणा लोकापर्ण शिलान्यास और भूमि पूजन का भी काम नही किया जा सकता।  सरकारी अधिकारियों को ट्रांसफर और नियुक्त पर भी इस दौरान पाबन्दी रहती है।  सरकारी दल सकारी खजाने से पार्टी कि उपलब्धिया के बारे में विज्ञापन भी नहीं दे सकते है।  

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