असम चुनाव के बीच सबसे युवा प्रत्याशी कुंकी चौधरी क्यों आईं CM हिमंत के निशाने पर? जानें पूरी वजह
असम चुनाव में सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कुंकी चौधरी की मां पर बीफ और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर आरोप लगाए. कुंकी ने इन्हें फर्जी बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
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असम विधानसभा चुनाव के मतदान के लिए अब कुछ ही दिनों का समय बचा है. इस बीच सूबे में सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है. इस बार चर्चा के केंद्र में सबसे कम उम्र की प्रत्याशी कुंकी चौधरी और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा है. दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प बन गया है.
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद
विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री सरमा ने कुंकी चौधरी की मां पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि उनकी मां ने सोशल मीडिया पर बीफ खाने और पाकिस्तान से जुड़े पोस्ट शेयर किए थे. सरमा ने कहा कि यह सनातनी भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है. इस बयान के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया और राजनीतिक बहस छिड़ गई.
कुंकी चौधरी का पलटवार
सीएम के आरोपों के बाद कुंकी चौधरी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और इन दावों को पूरी तरह झूठा बताया. उन्होंने कहा कि वायरल हो रही तस्वीरें और वीडियो फर्जी हैं और इन्हें गलत तरीके से पेश किया गया है. कुंकी ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर फर्जी सामग्री फैलाने वाले कुछ लोग सत्ताधारी दल से जुड़े हो सकते हैं. कुंकी ने कहा कि वह राजनीति में नई हैं और उनके खिलाफ इस तरह की रणनीति अपनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.
डीपफेक का भी उठा मुद्दा
इस पूरे विवाद के बीच डीपफेक तकनीक का मुद्दा भी सामने आया है. कुंकी का कहना है कि जो वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, वे कृत्रिम तरीके से तैयार की गई हैं. उनका मानना है कि इनका मकसद जनता को भ्रमित करना और उनकी छवि खराब करना है. वहीं पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है और तथ्यों की पड़ताल की जा रही है.
कौन हैं कुंकी चौधरी?
27 वर्षीय कुंकी चौधरी असम जातीय परिषद की उम्मीदवार हैं और गुवाहाटी मध्य सीट से चुनाव लड़ रही हैं. उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से पढ़ाई की है और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रही हैं. उनका मुकाबला बीजेपी के वरिष्ठ नेता विजय कुमार गुप्ता से है.
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बताते चलें कि असम चुनाव में यह विवाद अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है. जहां एक तरफ आरोपों की गंभीरता है, वहीं दूसरी ओर जवाबी हमलों ने माहौल को और गरमा दिया है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच में क्या सामने आता है और इसका चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है.
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