CJI सूर्यकांत की बात सुनकर महिला वकीलों ने क्यों बजाईं जोरदार तालियां? जानें पूरा मामला
CJI सूर्यकांत ने न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और योग्य महिला वकीलों को जज नियुक्त करने पर हाईकोर्ट्स कॉलेजियम से जोर दिया. 8 मार्च 2026 को इंडियन वीमेन इन लॉ सम्मेलन में उन्होंने कहा कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व देश की माताओं, बहनों और बेटियों के भरोसे से जुड़ा है.
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देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Suryakant) ने महिलाओं की न्यायपालिका में भागीदारी बढ़ाने के लिए नए संस्थागत सुधारों की दिशा में कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया है. उन्होंने हाईकोर्ट्स के कॉलेजियम से कहा कि योग्य महिला वकीलों को जजों के रूप में नियुक्त करने पर गंभीरता से विचार किया जाए.
सम्मेलन में जोरदार संदेश
रविवार को आयोजित इंडियन वीमेन इन लॉ के पहले सम्मेलन में 'हाफ द नेशन-हाफ द बेंच, ब्रिज द गैप-बैलेंस द बेंच' विषय पर बोलते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका में महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व सिर्फ संख्या का सवाल नहीं है. यह देश की 65 करोड़ माताओं, बहनों और बेटियों के विश्वास से जुड़ा है, जिन्हें यह भरोसा होना चाहिए कि न्याय व्यवस्था उनकी परिस्थितियों को समझती है और उनके साथ निष्पक्ष व्यवहार करती है.
निष्पक्ष प्रतिनिधित्व की आवश्यकता
सीजेआई ने बार के सदस्यों को यह समझाने की कोशिश की कि महिला वकील रियायत नहीं मांग रही हैं, बल्कि निष्पक्ष और उचित प्रतिनिधित्व की मांग कर रही हैं. उन्होंने कहा, 'जब स्वयं यह पेशा इस सत्य को आत्मसात कर लेगा, तभी न्यायपालिका तक पहुंचने का मार्ग स्पष्ट होगा.' इस पर वहां मौजूद महिला वकीलों और न्यायपालिका के सदस्यों ने जोरदार तालियां बजाई.
हाईकोर्ट्स के कॉलेजियम को संदेश
मुख्य न्यायाधीश ने हाईकोर्ट्स के कॉलेजियम से आग्रह किया कि वे अपने विचार क्षेत्र का विस्तार करें और सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहीं अपने-अपने राज्यों की महिला एडवोकेट्स को पदोन्नति के लिए शामिल करें. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि प्रगति को सार्थक बनाने के लिए इसे संस्थागत रूप देना होगा. कहानी यह नहीं होनी चाहिए कि किसी एक व्यक्ति को अधिक प्रतिनिधित्व मिला, बल्कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट और देशभर के हाईकोर्ट्स अपनी प्रक्रियाओं में निष्पक्षता को समझ-बूझकर समाहित करें.
सुधार कोई आकस्मिक घटना नहीं
सूर्यकांत ने यह भी बताया कि सुधार कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है. उन्होंने कहा, 'संस्थागत निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत कार्यकाल और व्यक्तिगत व्यक्तित्व से परे दृढ़ता की आवश्यकता होती है. यह मेरे कार्यकाल में पूरी तरह से साकार नहीं हो सकता, लेकिन प्रतिबद्धता की दिशा तय होती है.'
अब है कार्रवाई का समय
सीजेआई ने विशेष रूप से हाईकोर्ट्स के कॉलेजियम के सदस्यों को संदेश दिया कि सोच-समझकर कार्रवाई का समय भविष्य में नहीं, बल्कि अभी है. सम्मेलन में इंडियन वीमेन इन लॉ से जुड़ी सीनियर एडवोकेट्स शोभा गुप्ता और महालक्ष्मी पावनी ने अतिथियों का स्वागत किया. उपस्थित सदस्यों में पूर्व मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमण, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्ज्ल भुइयां भी शामिल थे.
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इस सम्मेलन ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि न्यायपालिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सिर्फ अधिकार का मामला नहीं, बल्कि समाज और देश के विश्वास का मामला है. CJI सूर्यकांत की पहल महिलाओं की न्यायपालिका में भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.
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