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जिस पर देशकरता है भरोसा

'एक पर निर्भरता खतरनाक, सावधानी जरूरी...', ट्रंप के टैरिफ टेंशन से निपटने का पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन से सुझाया फॉर्मूला, जानें क्या कहा

50% टैरिफ पर RBI के पूर्व गवर्नर और जाने-माने अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने कहा ये बेहद चिंताजनक है. उन्होंने आगे कहा, यह एक चेतावनी है. हमें किसी एक देश पर बहुत अधिक निर्भर नहीं होना चाहिए.

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28 Aug 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:28 AM )
'एक पर निर्भरता खतरनाक, सावधानी जरूरी...',  ट्रंप के टैरिफ टेंशन से निपटने का पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन से सुझाया फॉर्मूला, जानें क्या कहा
Raghuram Rajan
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंडियन गुड्स पर सीधा 50% टैरिफ ठोक दिया है. इसका सबसे बड़ा असर कपड़ा, हीरा और झींगा कारोबार पर पड़ेगा. इस फैसले पर RBI के पूर्व गवर्नर और जाने-माने अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने कहा “ये बेहद चिंताजनक है.”

रघुराम राजन की बड़ी चेतावनी

रघुराम राजन ने कहा कि भारत के लिए किसी एक व्यापारिक साझेदार पर अधिक निर्भर रहना ही आपदा के समान है और ये एक बड़ी चेतावनी है.
राजन ने चेतावनी दी कि आज की वैश्विक व्यवस्था में व्यापार, निवेश और वित्त को तेजी से हथियार बनाया जा रहा है और भारत को सावधानी से कदम उठाने चाहिए.

क्या बोले पूर्व गवर्नर रघुराम राजन?

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रघुराम राजन ने कहा कि व्यापार अब हथियार बन गया है. उन्होंने आगे कहा, यह एक चेतावनी है. हमें किसी एक देश पर बहुत अधिक निर्भर नहीं होना चाहिए. हमें पूर्व की ओर, यूरोप की ओर, अफ्रीका की ओर देखना चाहिए और अमेरिका के साथ आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन ऐसे सुधारों को लागू करना चाहिए जो हमें अपने युवाओं को रोजगार देने के लिए आवश्यक 8-8.5% की विकास दर हासिल करने में मदद करें.

बुधवार से 50% टैरिफ लागू

बुधवार से वाशिंगटन ने इंडियन गुड्स पर सीधा 50% टैरिफ लगा दिया है. इसमें रूसी तेल खरीद से जुड़ा 25% एकस्ट्रा पेनाल्टी भी शामिल है. यानी भारत को रशियन क्रूड ऑयल लेने की बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है. लेकिन हैरानी की बात ये है कि चीन और यूरोप जो रूस के सबसे बड़े ऑयल इंपोटर्स हैं उन पर कोई मेजर टैरिफ नहीं लगाया गया.

रूसी तेल आयात पर रघुराम राजन की सलाह

पूर्व RBI गवर्नर ने कहा कि भारत को अपनी रूस ऑयल पॉलिसी पर दोबारा सोचना चाहिए. उनके मुताबिक, रिफाइनर्स तो मोटा मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन एक्सपोर्टर्स को US टैरिफ की मार झेलनी पड़ रही है. सवाल ये है कि फायदा किसे मिल रहा है और नुकसान कौन उठा रहा है? अगर फायदा इतना बड़ा नहीं है, तो शायद इस खरीद को जारी रखने के बारे में फिर से सोचना चाहिए.

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