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रैंक में किया झोल, खुली फर्जी टॉपर्स की पोल, शिखा-फैरूज-रंजीत... 7 कैंडिडेट्स जिनका IAS बनने का दावा निकला झूठा

UPSC Result: फैरूज ने सनरूफ वाली कार में जुलूस निकाला, रंजीत को विधायक ने सम्मानित किया, वाहवाही लूटी, महानता से भरी बातें हुईं अखबारों में संघर्ष और सफलता की कहानियां छाईं रहीं, लेकिन पता चला इन UPSC कैंडिडेट्स के दावे तो बिल्कुल झूठे हैं. UPSC के ऐसे 7 फर्जी टॉपर्स जिन्होंने बड़ा झोल किया है.

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16 Mar 2026
( Updated: 16 Mar 2026
02:37 PM )
रैंक में किया झोल, खुली फर्जी टॉपर्स की पोल, शिखा-फैरूज-रंजीत... 7 कैंडिडेट्स जिनका IAS बनने का दावा निकला झूठा

UPSC Result Fake Candidates List: 6 मार्च 2025 को संघ लोक सेवा आयोग ने UPSC 2025 रिजल्ट की घोषणा की थी. टॉपर्स की लिस्ट जारी होने के बाद से ही सोशल मीडिया से लेकर अखबारों तक में कैंडिडेट्स की सफलता और संघर्ष की कहानियां छाईं रहीं. कैंडिडेट्स खुद भी अपनी सक्सेस स्टोरी को घूम-घूमकर बयां करते रहे, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली. 

UPSC के सात ऐसे अभ्यर्थियों ने टॉप करने का दावा किया था जो असल में एग्जाम क्रैक ही नहीं कर पाए. इनमें से एक ने तो परीक्षा दी ही नहीं. जानते हैं इन सभी फर्जी टॉपर्स के बारे में जिनकी रैंक में झोल ने सारी पोल खोल दी. 

बुलंदशहर की शिखा रानी 

अखबारों में एक हेडिंग बोल्ड अक्षरों में छपी. वो ये कि ‘चपरासी की पोती शिखा ने क्रैक किया UPSC’ खबर में बताया गया कि शिखा को UPSC में 113वीं रैंक मिली है. वह बुलंदशहर में रहती हैं और दादा इंटर कॉलेज में चपरासी हैं. जैसे ही शिखा के UPSC परीक्षा पास करने की खबर आई. परिवार इमोशनल हो गया, दादा के खुशी के आंसू नहीं थम रहे. मीडिया का जमावड़ा शिखा के घर लग गया. 

शिखा भी मीडिया को अपनी सफलता का मंत्र बताती रहीं, लेकिन एक दिन दिल्ली की शिखा ने UPSC को मेल किया. इस मेल में बताया कि बुलंदशहर की शिखा रानी UPSC में सेलेक्शन का दावा कर रही हैं. जबकि 113वीं रैंक तो उनकी है. दिल्ली की शिखा ने UPSC से मामलो को स्पष्ट करने की अपील की. इसके बाद बुलंदशहर की DM ने जांच शुरू की और पाया कि बुलंदशहर की शिखा तो मेंस परीक्षा पास भी नहीं कर पाईं. जिनका सेलेक्शन हुआ है वो दिल्ली की शिखा है. जो कि रोहतक के BPDO में काम करती हैं. असलियलत सामने आने के बाद बुलंदशहर की शिखा रानी ने माफी मांगी. उन्होंने अपनी सफाई में कहा, मैंने सिर्फ नाम देखा, रोल नंबर नहीं. 

गाजीपुर की प्रियंका चौधरी 

UPSC की दूसरी फर्जी कैंडिडेट हैं गाजीपुर की प्रियंका चौधरी. जिन्होंने दावा किया कि UPSC में उन्हें 79वीं रैंक मिली है. गांव में उत्साह का माहौल था, परिवार खुशी से फूले नहीं समा रहा था, लेकिन महज 24 घंटे के अंदर ही हकीकत सामने आ गई. पता चला कि UPSC में सफलता हासिल करने प्रियंका चौधरी राजस्थान के बीकानेर की हैं. जो फिलहाल हिमाचल प्रदेश के चंबा में उपायुक्त के पद पर तैनात हैं. 

जिन प्रियंका ने झूठा दावा किया था, वो फिलहाल GST इंस्पेक्टर हैं और प्रयागराज में तैनात हैं. उन्होंने UPSC में प्री भी पास नहीं किया. मामला सामने आने के बाद प्रियंका चौधरी ने सफाई में कहा कि उनका नाम सुनकर पिता भावुक हो गए, इसलिए गलतफहमी हो गई. 

बागपत की दिव्या तंवर

बागपत की रहने वाली दिव्या तंवर ने UPSC में 182वीं रैंक का दावा किया था, परिवार ने भी कहा, बचपन से ही दिव्या मेहनती हैं. उनके सम्मान तक की बात कही, लेकिन बाद में पता चला असली UPSC कैंडिडेट्स हरियाणा के रोहतक की दिव्या गहलावत हैं. जिन्होंने 182वीं रैंक हासिल की है. हरियाणा की दिव्या फिलहाल दिल्ली में PHD कर रही हैं. 
खुलासा होने के बाद न तो बागपत वाली दिव्या सामने आईं न ही परिवार और न ही कोई सफाई दी. 

MP के यशवर्धन सिंह का फर्जी दावा 

मध्य प्रदेश के सतना के रहने वाले यशवर्धन सिंह ने UPSC में 212 रैंक लाने का दावा किया. इसके बाद परिवार को बधाई देने के लिए लोगों का तांता लग गया. इंटरव्यू का सिलसिला शरू हुआ और फिर वहीं सफलता और संघर्ष की बड़ी-बड़ी बातें हुईं. इंटरव्यू में यशवर्धन ने अपनी सफलता को छोटी भी बताया और महानता से भरी बातें की. 

सतना के यशवर्धन का ये झूठ ज्यादा देर नहीं टिका. यहां पोल उनकी कैटेगरी के चलते हुई. असल में UP के हमीरपुर के रहने वाले यशवर्धन सिंह सेलेक्ट हुए थे, जो OBC वर्ग के हैं, जबकि सतना वाले यशवर्धन जनरल कैटेगरी के हैं और वह प्री भी क्वालिफाई नहीं कर पाए. 

बिहार की आकांक्षा सिंह

बिहार के भोजपुर की आकांक्षा सिंह ने तो फर्जी रैंक का गजब एडवांटेज लिया. उन्हें तो बिहार के डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने भी खास तौर पर बधाई दी. आकांक्षा सिंह के दादा मुखिया हैं तो वाहवाही और भी बढ़ गई. सम्मान वम्मान भी मिला, जुलूस भी निकला, लेकिन पोल तब खुली जब असली कैंडिडेट ने सोशल मीडिया पर अपने डॉक्यूमेंट्स पोस्ट किए. गाजीपुर की आकांक्षा ने पोस्ट के साथ लिखा, 301वीं रैंक मेरी है, मेरा रोल नंबर 0856794 है. बिहार की आकांक्षा ने भी कहा कि ये रोल नंबर उनका है, लेकिन, एडमिट कार्ड स्कैन करने पर उनका रोल नंबर 085659 आ रहा था. इसके बाद PIB ने क्लियर किया कि गाजीपुर की आकांक्षा ने ही UPSC पास की है. बिहार वाली आकांक्षा तो प्री भी नहीं क्वालिफाई नहीं कर पाई. 

बिहार के रंजीत कुमार

बिहार के शेखपुरा के रहने वाले रंजीत कुमार ने तो गजब कर दिया. इन्होंने UPSC परीक्षा दी ही नहीं और IAS बनने का दावा कर दिया. उन्होंने दावा किया 6 मार्च को UPSC का जो रिजल्ट आया है उसमें उन्होंने 440वीं रैंक पाई है. इसके बाद तो वर्तमान से लेकर पूर्व विधायक तक ने उन्हें बधाई दी. RJD नेता और पूर्व विधायक विजय सम्राट ने उन्हें माला पहनाकर और सूटकेस देकर सम्मानित किया. 

महुली इलाके के थाना प्रभारी राम प्रवेश भारती ने भी मिठाई खिलाई. भविष्य के IAS समझकर सत्कार किया सोचा बिहार कैडर मिला तो उनका काम भी बन जाएगा. इन सबके बीच पिता इमोशनल हुए जा रहे थे, बेटे ने परचम लहरा दिया. उनके आंसू नहीं थम रहे थे, लेकिन बेटे की सारी पोल पट्टी उस वक्त खुल गई जब 2 दिन बाद 440वीं रैंक पर कर्नाटक के रंजीथ कुमार का सिलेक्शन का पता चला. रंजीथ कुमार कर्नाटक के चिकवलापुरम के रहने वाले हैं. खुलासा होने के बाद महुली थाने के जो SHO रंजीत कुमार के चरणों में नतमस्तक थे, वहीं उन्हें ढूंढ रहे हैं. पता चला कि रंजीत कुमार ने तो UPSC परीक्षा दी ही नहीं. वह फोन बंदल कर दिल्ली भाग गए हैं. 

उत्तराखंड की फैरूज फातिमा

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रुड़की के पिरान कलियर की रहने वाली फैरूज फातिमा ने दावा किया कि उन्होंने UPSC परीक्षा में 708वीं रैंक हासिल की है. इसके बाद इलाके में जश्न का माहौल था, सनरूफ वाली कार में उनका जुलूस निकाला गया, माला-वाला पहनाई गईं और वह हाथ हिलाते हुए लोगों का अभिवादन स्वीकारतीं रहीं, लेकिन महज 24 घंटे में ही फैरूज की पोल खुल गईं. पता चला की UPSC ऑफिस के सामने उनकी फोटो भी एडिटेड है. असल कैंडिडेट तो केरल की फैरूज हैं. UPSC ने खुद इसे क्लियर किया. जबकि रुड़की की फैरूज ने तो प्री एग्जाम भी क्वालिफाई नहीं किया. वह RBI में डिप्टी मैनेजर के तौर पर काम कर रही हैं, लेकिन इस फर्जीवाड़े के बाद उनके RBI वाले डॉक्यूमेंट की भी जांच शुरू हो गई है. 

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