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दिल्ली में सड़क 'नेमप्लेट' मामले ने पकड़ा तूल, कांग्रेस नेता उदित राज ने दे डाली नसीहत

देश की राजधानी दिल्ली में बीजेपी के कुछ सासंदों द्वारा अपने घर के 'नेमप्लेट' में 'तुगलक लेन' की जगह 'विवेकानंद मार्ग' किए जाने पर अब सियासी बहस तेज होती दिखाई दे रही है। इस मामले में कांग्रेस नेता उदित राज की प्रतिक्रिया भी सामने आई है।

दिल्ली में सड़क 'नेमप्लेट' मामले ने पकड़ा तूल, कांग्रेस नेता उदित राज ने दे डाली नसीहत
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देश की राजधानी दिल्ली में बीजेपी के कुछ सासंदों द्वारा अपने घर के 'नेमप्लेट' में 'तुगलक लेन' की जगह 'विवेकानंद मार्ग' किए जाने पर अब सियासी बहस तेज होती दिखाई दे रही है। इस मामले में कांग्रेस नेता उदित राज की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता नाम बदलने के अलावा और क्या ही कर सकते हैं। 


नाम बदलना ही इनका काम 

कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "नाम बदलने के अलावा भाजपा नेता और क्या ही कर सकते हैं। अगर वह देश के हालात बदलें तो बड़ी बात होगी। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या ऐसा करने से देश विकसित हो जाएगा? क्या इससे रोजगार मिल जाएगा? मैं उनसे कहूंगा कि वह इन्फ्रास्ट्रक्चर, साफ-सफाई समेत अन्य जरूरी मुद्दों पर ध्यान दें। नाम बदलने से कुछ नहीं होने वाला है।" उदित राज ने औरंगजेब विवाद पर कहा, "देश में सभी लोगों को अपनी राय रखने का अधिकार है। मैं बिहार के मंत्री नीरज सिंह से पूछता हूं कि औरंगजेब की सेना में कौन थे? किन लोगों ने औरंगजेब का साथ दिया था? औरंगजेब की सेना में करीब आधे से अधिक लोग हिंदू थे। संभाजी के खिलाफ जब युद्ध लड़ा गया था तो उस दौरान मुगल सेनापति उदयभान सिंह थे।"


अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पर भी दिया बयान 

उदित राज ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में होली विवाद पर कहा, "मेरा मानना है कि सभी त्योहारों को समान रूप से देखा जाना चाहिए। दोनों के पर्व को मनाया जाना चाहिए। शिक्षा संस्थान में किसी एक धर्म को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता, ताकि वहां पर हमारे संविधान के नियमों का पालन हो।" क्रिकेटर मोहम्मद शमी को लेकर चल रहे विवाद पर कांग्रेस नेता ने कहा कि कुछ लोग सिर्फ सुर्खियों में आने के लिए ऐसे बयान देते हैं। मुस्लिम समाज के लोगों ने ही शमी की आलोचना करने वालों की निंदा की है। इस मामले को तूल नहीं देना चाहिए। इस्लाम में भी कहा गया है कि रोजा रखना व्यक्ति का खुद का फैसला है। अगर कोई विशेष परिस्थिति होती है तो रोजा नहीं भी रखा जा सकता है।

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