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SCO में पाकिस्तान को लगा बड़ा झटका, आतंकवाद पर भारत ने कई देशों के सामने खोली पोल, चीन भी आया साथ

भारत कई वर्षों से आतंकवाद को झेलता रहा है. पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भारत के खिलाफ कई दशकों से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता रहा है. ऐसे में सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाकर भारत ने SCO बैठक में चीन के सामने बिना नाम लिए पाकिस्तान की ही पोल खोल दी. अब इस मामले में चीन का समर्थन मिलने के बाद भारत आतंकवाद के खिलाफ मजबूती के साथ अपनी लड़ाई आगे जारी रखेगा.

SCO में पाकिस्तान को लगा बड़ा झटका, आतंकवाद पर भारत ने कई देशों के सामने खोली पोल, चीन भी आया साथ
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चीन के तियानजिन में चल रहे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन बैठक में रविवार को पहले दिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई. इस दौरान पीएम मोदी ने सीमा पार आतंकवाद का भी मुद्दा उठाया और पाकिस्तान को पूरी दुनिया के सामने फिर से बेनकाब किया. उन्होंने दुश्मन मुल्क को झटका देते हुए कहा कि आतंकी गतिविधि से न सिर्फ भारत, बल्कि चीन भी प्रभावित रहा है, इस दौरान जिनपिंग ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को अपना समर्थन जताया है.

'भारत लंबे समय से आतंकवाद झेलता रहा'

भारत कई वर्षों से आतंकवाद को झेलता रहा है. पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भारत के खिलाफ कई दशकों से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता रहा है. ऐसे में सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाकर भारत ने चीन के सामने बिना नाम लिए पाकिस्तान की ही पोल खोल दी. अब इस मामले में चीन का समर्थन मिलने के बाद भारत आतंकवाद के खिलाफ मजबूती के साथ अपनी लड़ाई आगे जारी रखेगा. 

सीमा आतंकवाद पर विदेश सचिव का बयान

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बता दें कि सीमा पार आतंकवाद पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि 'प्रधानमंत्री ने सीमा पार आतंकवाद को प्राथमिकता बताया. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह भारत और चीन दोनों को प्रभावित करता है और इसलिए यह जरूरी है कि हम सीमा पार आतंकवाद से निपटने के लिए एक-दूसरे को समझ और समर्थन दें. मैं तो यह कहना चाहूंगा कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के मौजूदा दौर में सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे से निपटने में हमें चीन की समझ और सहयोग मिला है."

सीमा पर शांति बनाए रखने पर भी हुई चर्चा

चीन के साथ सीमा विवाद पर भी बात हुई है. दोनों ही देशों ने सीमा पर शांति बनाए रखने को लेकर कहा कि 'भारत-चीन का संबंध एक बीमा पॉलिसी की तरह है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को इस स्थिति से अवगत कराया. इस दौरान दोनों नेताओं ने दिन में व्यापक चर्चा की, जिसका मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करना था, जो पिछले साल अक्टूबर में समाप्त हुए पूर्वी लद्दाख में 4 साल से अधिक समय से चल रहे सीमा गतिरोध के बाद गंभीर तनाव में आ गए थे.

पाकिस्तान का समर्थन किया था चीन ने

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बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई में शुरू किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' में चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया था. इस ऑपरेशन में भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और POK के 9 आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले कर लश्कर और जैश के 100 से ज्यादा आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया था. इसके बाद दोनों देशों में तनाव चरम पर पहुंच गया. 4 दिनों तक चले संघर्ष में पाकिस्तान ने भी भारत पर ड्रोन से हवाई हमले की कोशिश की थी, जो कि नाकाम रही. इस दौरान तुर्किए और चीन ने पाकिस्तान को अपना खुलकर समर्थन किया था. इस युद्ध में पाकिस्तान ने चीन के बने फाइटर जेट्स और तुर्किए के ड्रोन का इस्तेमाल किया था, लेकिन 4 दिनों में ही भारत ने पाकिस्तान को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया, जिसके चलते वह सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाने लगा. उसके बाद दोनों ही देशों के बीच युद्धविराम हुआ. 

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