'जो तपस्या से गर्मी लाए, उसके ज्ञान पर...', संसद में रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी को जमकर सुनाया, जानें क्यों हुई बहस
लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान कांग्रेस ने आरोप लगाया कि स्पीकर ओम बिरला नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने का समय नहीं दिया. इस पर बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने जवाब देते हुए कहा कि राहुल गांधी के न बोलने की शिकायत होती है, लेकिन सवाल है कि वे बोलते क्या हैं.
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लोकसभा में इन दिनों स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सियासी माहौल काफी गरम हो गया है. विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है. कांग्रेस ने जहां स्पीकर के कामकाज पर सवाल उठाए हैं, वहीं सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है. संसद में हुई इस बहस ने देश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है.
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि स्पीकर ने नेता विपक्ष को पर्याप्त समय नहीं दिया. पार्टी का कहना है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने के लिए राहुल गांधी को बार-बार रोका गया. कांग्रेस नेताओं का दावा है कि उन्हें करीब 20 बार बोलने से रोका गया, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई. विपक्ष का कहना है कि संसद में सभी पक्षों को बराबर अवसर मिलना चाहिए और अगर ऐसा नहीं होता है तो यह चिंता का विषय है.
इंदिरा जी के पोते के ज्ञान पर मैं सन्न: रविशंकर
केंद्र सरकार ने इन आरोपों का कड़ा जवाब दिया है. बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद ने संसद में बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी अक्सर शिकायत करते हैं कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता, लेकिन असली सवाल यह है कि वे आखिर बोलते क्या हैं. उन्होंने कहा कि जब वे हरियाणा में चुनाव प्रचार के लिए गए थे, तब किसी ने उन्हें राहुल गांधी का एक बयान सुनाया. शुरुआत में उन्हें इस पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन बाद में वीडियो देखने के बाद वे हैरान रह गए. उन्होंने आगे यह भी कहा कि इनका कहना है कि तपस्या से गर्मी आती है. मैं तो सन्न रह गया कि आत्मा से परमात्मा का मिलन है तपस्या. आखिर इंदिरा जी के पोते का इस पर क्या ज्ञान है. इस पर मुझे हैरानी हुई है.
जलेबी फैक्ट्री वाले बयान पर बीजेपी का तंज
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में जलेबी की फैक्ट्री लगाने की बात कही थी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश के लगभग हर गांव और शहर में जलेबी बनाई जाती है. यह एक पारंपरिक मिठाई है जो हलवाई की कढ़ाई में ताजी-ताजी छनकर तैयार होती है. ऐसे में जलेबी की फैक्ट्री लगाने की बात सुनकर उन्हें काफी आश्चर्य हुआ. उन्होंने कहा कि इस तरह के बयानों से राजनीति में गंभीरता कम होती है.
विदेशी मंचों पर दिए गए बयानों का भी जिक्र
बीजेपी नेता ने आगे कहा कि राहुल गांधी ने विदेशी मंचों पर भी ऐसे बयान दिए हैं, जिन पर सवाल उठते रहे हैं. उनका दावा था कि राहुल गांधी ने एक अमेरिकी राजदूत से कहा था कि भारत में इस्लामिक कट्टरपंथ से ज्यादा चिंता की बात हिंदू कट्टरपंथ है. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी के कई ऐसे बयान हैं जिनकी सूची बहुत लंबी है. यदि उन सभी का जिक्र किया जाए तो चर्चा काफी लंबी हो जाएगी.
स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव को बताया राजनीतिक कदम
संसद में बोलते हुए उन्होंने यह भी कहा कि स्पीकर के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव किसी गंभीर मुद्दे से ज्यादा राजनीतिक अहंकार का परिणाम लगता है. उनका कहना था कि संसद देश की सर्वोच्च संस्था है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है. ऐसे में बिना ठोस कारण के स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लाना उचित नहीं है. इस बहस के दौरान एक रोचक स्थिति तब बनी जब राहुल गांधी बीच में बोलने की कोशिश करने लगे. इस पर रविशंकर प्रसाद ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें बाद में बोलने का मौका मिलेगा. इसके बाद बहस का क्रम आगे बढ़ा और अन्य सांसदों ने भी अपनी बात रखी.
सपा सांसद आनंद भदौरिया ने भी रखी अपनी राय
समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी. उन्होंने कहा कि स्पीकर व्यक्तिगत रूप से एक अच्छे व्यक्ति हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार के दबाव में कुछ फैसले लिए गए. उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि स्थिति ऐसी बन गई कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना पड़ा.
हरियाणा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने दिया था बयान
उधर इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में राहुल गांधी का हरियाणा चुनाव के दौरान दिया गया बयान भी चर्चा में है. चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने सोनीपत के गोहाना में एक प्रसिद्ध हलवाई की दुकान पर जलेबी का स्वाद चखा था. इसके बाद उन्होंने जनसभा में कहा था कि यह जलेबी इतनी स्वादिष्ट है कि इसे पूरे देश और दुनिया में जाना चाहिए. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि अगर यह जलेबी विदेशों तक पहुंच जाए तो शायद यह दुकान एक बड़ी फैक्ट्री में बदल जाए और हजारों लोगों को रोजगार मिल सके.
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बताते चलें कि संसद में दोनों नेताओं द्वारा दिया गया यही बयान संसद की बहस में राजनीतिक मुद्दा बन गया है. एक ओर विपक्ष स्पीकर के व्यवहार पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर सरकार राहुल गांधी के बयानों को लेकर विपक्ष की विश्वसनीयता पर निशाना साध रही है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बहस का संसद की कार्यवाही और देश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है. फिलहाल लोकसभा में जारी यह टकराव राजनीति के केंद्र में बना हुआ है.
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