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गो सेवा से कैसे लखपति बन गईं झांसी की प्रवेश कुमारी? CM योगी के आत्मनिर्भर विजन को मिल रही रफ्तार

प्रवेश कुमारी आज करीब 25,000 रुपये प्रति माह कमा रही हैं. उनके इस स्टार्टअप ने गांव की सामाजिक संरचना को भी बदला है. इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ा है. गांव की अन्य महिलाओं को स्थायी आय और आर्थिक स्वतंत्रता मिली रही है. जिससे वे भी अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं.

गो सेवा से कैसे लखपति बन गईं झांसी की प्रवेश कुमारी? CM योगी के आत्मनिर्भर विजन को मिल रही रफ्तार
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बुंदेलखंड की धरती अब न केवल शौर्य के लिए, बल्कि महिला उद्यमिता के रूप में भी पहचानी जा रही है. झांसी की प्रवेश कुमारी ने चारा बनाने की यूनिट के जरिये वह मुकाम हासिल किया है, जो आज प्रदेश की लाखों महिलाओं के लिए उदाहरण है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश' के सपने को धरातल पर उतारते हुए प्रदेश ने सौर ऊर्जा की मदद से उच्च गुणवत्ता वाले पशु चारे की यूनिट स्थापित कर न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त किया, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा है.

बिजली खर्चा शून्य, मिल रहा सस्ता और पोषक चारा

इस उद्यम की सबसे बड़ी विशेषता इसका ईको-फ्रेंडली होना है. योगी सरकार और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स (DA) के सहयोग से स्थापित यह यूनिट पूरी तरह 18 kW सौर ऊर्जा प्रणाली पर संचालित होती है. इससे बिजली का खर्च शून्य के बराबर है, जिससे चारे की उत्पादन लागत कम आती है. सस्ता और पोषक चारा मिलने से स्थानीय डेयरी किसानों के पशुओं का स्वास्थ्य सुधरा है और दूध उत्पादन क्षमता में भी इजाफा हुआ है. 

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रोजगार और सामूहिक भागीदारी की नई प्रथा

प्रवेश कुमारी आज करीब 25,000 रुपये प्रति माह कमा रही हैं. उनके इस स्टार्टअप ने गांव की सामाजिक संरचना को भी बदला है. इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ा है. गांव की अन्य महिलाओं को स्थायी आय और आर्थिक स्वतंत्रता मिली रही है. जिससे वे भी अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं.

खरीद से लेकर गुणवत्ता नियंत्रण तक की जिम्मेदारी खुद संभालती हैं

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यहां आधुनिक मशीनरी और मानकीकृत तकनीकों से पौष्टिक चारा तैयार किया जाता है. साथ ही स्थानीय बाजार की मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है. प्रवेश केवल उद्यमी नहीं, बल्कि एक कुशल मैनेजर भी हैं. वे कच्चे माल की खरीद से लेकर वित्तीय खातों, उत्पादन योजना और गुणवत्ता नियंत्रण तक की जिम्मेदारी खुद संभालती हैं. उनकी इस सक्रिय शैली और वित्तीय अनुशासन के कारण उनके 'गोमाता कैटल फीड' को पुरस्कृत और सम्मानित किया जा चुका है. 

छोटे प्रयास से बड़ी शुरुआत

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शुरुआत एक छोटे प्रयास से हुई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के मार्गदर्शन ने इसे व्यवसाय बना दिया. आज गांव की महिलाएं साथ मिलकर काम कर रही हैं. 
- प्रवेश कुमारी, महिला उद्यमी

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