170 दिन बाद सोनम वांगचुक की जेल से रिहाई, केंद्र सरकार ने हटाया NSA, जानें आदेश की बड़ी बातें
सोनम वांगचुक को लद्दाख में हिंसा भड़काने के आरोप में 26 सितंबर 2025 में अरेस्ट किया गया था. लद्दाख में हिंसक प्रदर्शन हुए थे, इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने BJP ऑफिस और CRPF की गाड़ी में आग लगा दी थी.
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लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक पर लगा नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) हटा लिया गया है. केंद्र सरकार के बड़े आदेश के तहत वांगचुक पर तुरंत NSA तुरंत प्रभाव से हटाया जाएगा.
सोनम वांगचुक को लद्दाख में हिंसा भड़काने के आरोप में 26 सितंबर 2025 में अरेस्ट किया गया था. गृह मंत्रालय के अनुसार, सोनम ने NSA एक्ट के तहत अपनी हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया है. सोनम वांगचुक 170 दिनों से जोधपुर जेल में बंद हैं.
गृह मंत्रालय ने क्या कहा?
सोनम वांगचुक पर NSA हटाते हुए गृह मंत्रालय ने कहा, सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता स्थापित करने लिए प्रतिबद्ध है. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए विचार-विमर्श के बाद सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सोनम वांगचुक की हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया है.
Ministry of Home Affairs said the government remains committed to fostering an environment of peace, stability, and mutual trust in Ladakh so as to facilitate constructive and meaningful dialogue with all stakeholders. The decision has been taken in furtherance of this objective.
— ANI (@ANI) March 14, 2026
गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि सरकार लद्दाख में विभिन्न हितकारकों और समुदाय के नेताओं के साथ बातचीत कर रही है, ताकि क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं और चिंताओं का समाधान किया जा सके. केंद्र सरकार की ओर से साफ किया गया कि बंद और विरोध प्रदर्शनों का मौजूदा माहौल समाज के शांतिप्रिय स्वरूप के लिए हानिकारक साबित हुआ है और इसने छात्रों, नौकरी चाहने वालों, व्यवसायों, पर्यटन संचालकों और पर्यटकों सहित समुदाय के विभिन्न वर्गों और लद्दाख की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है.
क्या है लेह हिंसा मामला, जिसमें हुई वांगचुक की गिरफ्तारी
24 सितंबर 2025 को लद्दाख में हिंसक प्रदर्शन हुए थे. प्रदर्शनकारियों ने BJP ऑफिस और CRPF की गाड़ी में आग लगा दी थी. इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों में झड़प भी हुई. जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई जबकि 80 से ज्यादा लोग घायल हो गए. दरअसल, लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर सोनम वांगचुक भूख हड़ताल कर रहे थे. इस दौरान छात्रों और स्थानीय लोगों ने लेह में उनकी पिछले मांगें पूरी नहीं करने के विरोध में केंद्र के खिलाफ बंद बुलाया था. इसी बंद के बीच हिंसा भड़क गई. अब लाइसेंस रद्द होने के बाद वांगचुक की संस्था न तो विदेशी फंडिंग ले सकेगी और न ही विदेश से आए पैसे का इस्तेमाल कर पाएगी.
लद्दाख में तनावपूर्ण हालातों के लिए केंद्र सरकार ने सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को जिम्मेदार माना था. गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि, वांगचुक ने भड़काऊ बयानों से भीड़ को उकसाया, हिंसा के बीच अपना उपवास तो तोड़ा, लेकिन हालात काबू करने की जगह एम्बुलेंस से अपने गांव चले गए. उन्होंने अरब स्प्रिंग शैली और नेपाल में जेन-जी विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करके लोगों को गुमराह किया.
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