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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दिल्ली पहुंची 'गौ राष्ट्र यात्रा', गौशाला में किया गया 'योगा विद गौमाता'

11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर गौ भक्तों ने गौ माताओं के बीच योग किया. इस खास आयोजन का नेतृत्व किया भारत सिंह राजपुरोहित ने, जो जीव-जंतु कल्याण एवं कृषि शोध संस्थान (AWARI) के अध्यक्ष हैं.

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21 Jun 2025
( Updated: 10 Dec 2025
11:16 PM )
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दिल्ली पहुंची 'गौ राष्ट्र यात्रा', गौशाला में किया गया 'योगा विद गौमाता'
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ऋषिकेश की पावन धरा से शुरू हुई 'गौ राष्ट्र यात्रा' कई पड़ावों को पार करते हुए, 21 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर दिल्ली पहुंची. दिल्ली के सुल्तानपुर डबास स्थित केशव गिर गौशाला में गौ यात्रा का भव्य स्वागत किया गया. यहां पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग और गौ भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला.

'योगा विद गौमाता'

दरअसल, 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर गौ भक्तों ने गौ माताओं के बीच योग किया. इस खास आयोजन का नेतृत्व किया भारत सिंह राजपुरोहित ने, जो जीव-जंतु कल्याण एवं कृषि शोध संस्थान (AWARI) के अध्यक्ष हैं. उनका साथ देश के कोने-कोने से आए गौसेवक और गौपालक एकजुट हुए, जिन्होंने योग के माध्यम से गौ माता के प्रति अपनी श्रद्धा और प्रकृति के प्रति समर्पण को व्यक्त किया.

योग और गौमाता का अनोखा मिलन

इस कार्यक्रम में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सभी का मन मोह लिया. दरअसल, जब गौ भक्त योगासन कर रहे थे तो गौ माता भी उनके बीच आ पहुंचीं. इस दौरान कुछ गौ माताएं योग करते गौभक्तों को स्नेह से चूमने लगीं, मानो वे भी इस पवित्र आयोजन का हिस्सा बनना चाहती हों. यह नजारा इतना मनमोहक था कि हर किसी की आंखें इस प्रेम और भक्ति के संगम को देखकर चमक उठीं.

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‘योग को बनाएं जीवन का हिस्सा’

भारत सिंह राजपुरोहित ने इस अवसर पर गौभक्तों और देशवासियों से अपील की कि वे योग को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाएं. उन्होंने कहा कि योग न केवल हमारे शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि यह हमें प्रकृति के करीब भी रखता है.

'गौ राष्ट्र यात्रा' का मुख्य उद्देश्य

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यह यात्रा प्राचीन गौ संस्कृति और गांव आधारित अर्थव्यवस्था के पुनर्स्थापन के संकल्प के साथ ऋषिकेश से संतों के आशीर्वाद से शुरू हुई है. यात्रा लगभग 61 दिनों तक चलेगी. गौ राष्ट्र यात्रा के दौरान करीब 11 हजार किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी. यह यात्रा, गौ संरक्षण को भारत के पुनर्निर्माण की आधारशिला बनाने और जनमानस में गौमाता के प्रति श्रद्धा, संवेदना व जागरुकता लाने के उद्देश्य से आगे बढ़ रही है.

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