×
जिस पर देशकरता है भरोसा

डोनाल्ड ट्रंप ने 4 बार लगाई कॉल, पीएम मोदी ने नहीं उठाया फोन! भारत के आगे अमेरिका का "टैरिफ" घमंड धराशाई, रिपोर्ट में बड़ा दावा

जर्मनी के अखबार Frankfurter Allgemeine Zeitung ने एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करते हुए दावा किया है कि 'टैरिफ प्लान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को 4 बार कॉल किया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया.'

डोनाल्ड ट्रंप ने 4 बार लगाई कॉल, पीएम मोदी ने नहीं उठाया फोन! भारत के आगे अमेरिका का "टैरिफ" घमंड धराशाई, रिपोर्ट में बड़ा दावा
Advertisement

भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ दर को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक जर्मन अखबार ने बड़ा दावा किया है. अखबार ने दावा किया है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा टैरिफ प्लान को लेकर भारत के साथ कई बार बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार पीएम मोदी की तरफ से सख्ती दिखाई गई. भारत ने अमेरिका को करारा जवाब देते हुए एक संदेश भी दिया कि उसके दबाव में आने की बजाए, वह सख्ती से इस मामले पर निपटेंगे. भारत अब चीन,  रूस, ब्राजील के साथ मिलकर एक नया गठजोड़ बनाने की तैयारी में है. शंघाई शिखर सम्मेलन (SCO) में यह सभी देश अमेरिका के टैरिफ खेल को खराब करने की पूरी कोशिश करेंगे. 

'ट्रंप ने 4 कॉल की पीएम मोदी ने नहीं दिया जवाब'

जर्मनी के अखबार 'Frankfurter Allgemeine Zeitung' ने एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करते हुए दावा किया है कि 'टैरिफ प्लान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को 4 बार कॉल किया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया. हालांकि, अखबार में इस बात का जिक्र नहीं है कि यह कॉल कब और किस तारीख को की गई थी. अखबार के इस दावे पर अभी तक किसी भारतीय अधिकारी का कोई बयान सामने नहीं आया है. वहीं पीएम मोदी की इस नीति से साफ हो गया भारत डोनाल्ड ट्रंप को ज्यादा महत्व देने के मूड में नहीं है. भारत अमेरिका के किसी भी सवाल का जवाब अब सख्ती से देगा.'

Advertisement

'भारत सरकार की बदली हुई नीति' 

इस अखबार के लिए हेंड्रिक अंकेनब्रांड, विनांड वाॅन पीटर्सडाॅर्फ और गुस्ताव थाइले ने अपने आर्टिकल में यह भी कहा है कि 'अब भारत सरकार की बदली हुई नीति एक प्रतीक है कि उसने चीन के साथ भी रिश्ते बेहतर करने शुरू कर दिए हैं, जिसके साथ 2020 में लद्दाख में सैनिक झड़प हुई थी और 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे.'

'दोनों देशों के बीच संबंधों को परिभाषित करना मुश्किल'

अखबार में यह भी दावा किया गया है कि 'अब दोनों देशों के बीच संबंधों को परिभाषित करना मुश्किल है. फरवरी में ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मोदी को व्हाइट हाउस बुलाया था और उन्हें 'महान' नेता कहकर उनकी सराहना की थी, लेकिन जब फोटो खिंचवाने का वक्त आया, तो मोदी मुस्कुराए नहीं. ट्रंप ने इस दौरान पीएम मोदी के साथ अपने रिश्तों की भी बात की, लेकिन मोदी ने इसे सिर्फ रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण यात्रा करार दिया था.'

'ट्रंप ने अमेरिका के लिए कृषि बाजारों को खोलने की मांग की'

Advertisement

जर्मन अखबार ने यह भी लिखा है कि 'ट्रंप ने पीएम मोदी से अमेरिका के लिए कृषि बाजारों को भी खोलने की मांग की, लेकिन मोदी ने इससे इनकार कर दिया. भारत ने अमेरिका के बजाए रूस और ईरान से सस्ता तेल खरीदा. भारत में पश्चिमी प्रतिबंधों को भी नजरअंदाज किया. अमेरिका का मानना है कि चीन को अलग-थलग करने के लिए भारत को मजबूती से अपनी ओर खड़ा करना चाहिए, लेकिन भारत इससे भी सहमत नहीं है. भारत चाहता कि अमेरिका के साथ दोस्ती पर भरोसा नहीं किया जा सकता, भारत का मानना है कि उसे चीन के साथ संबंध बिगाड़ कर अमेरिका का मोहरा नहीं बनना है.'

'ट्रंप की मीडिया स्टंटबाजी का हिस्सा नहीं बनना चाहते पीएम मोदी'

अखबार की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 'पीएम मोदी ट्रंप की मीडिया स्टंटबाजी का हिस्सा नहीं बनना चाहते हैं. हाल ही में वियतनाम के मामले का जिक्र किया गया, जहां ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पहले ही व्यापार समझौते का ऐलान कर दिया था, जबकि असल में ऐसा कोई समझौता ही नहीं हुआ था.'

Advertisement

अखबार में पीएम मोदी की नई रणनीति का भी जिक्र

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 'मोदी अब एक नई रणनीति अपना रहे हैं. वह इस हफ्ते के आखिरी दिनों में शंघाई सहयोग संगठन में हिस्सा लेने के लिए चीन जा रहे हैं. भारत चीन के साथ साझा रणनीतिक हित में है.'

अमेरिका में होने वाली कुल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 

Advertisement

यह भी पढ़ें

बता दें कि अमेरिका में होने वाली कुल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 20 फीसदी है. इसमें कपड़े, गहने, दवाइयां और ऑटो पार्ट्स शामिल है. हालांकि, अब सीमा शुल्क बढ़ने की वजह से यह व्यापार घाटे में जा सकता है. कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत की विकास दर वर्तमान में 6.50 प्रतिशत चल रही है, जो आगे घटकर 5.50 पर आ जाएगी. बताया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप के अप्रत्याशित रूप को भारत सरकार ने अच्छे ढंग से नहीं लिया. जून में हुए एक सर्वे में जर्मनी में 18% लोग ट्रंप पर भरोसा करते हैं, लेकिन भारत में उन्हें सबसे कम भरोसेमंद वाला राष्ट्रपति माना जाता है. 

टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें