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महाराष्ट्र के ग्रामीण निकायों को बड़ी राहत, केंद्र ने 717 करोड़ रुपये की पहली किस्त दी

यह राशि अप्रतिबंधित अनुदान के रूप में दी गई है, जिसका इस्तेमाल पंचायतें अपने इलाके की विशेष जरूरतों को पूरा करने के लिए कर सकती हैं. इस अनुदान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करना है.

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13 Dec 2025
( Updated: 13 Dec 2025
10:48 AM )
महाराष्ट्र के ग्रामीण निकायों को बड़ी राहत, केंद्र ने 717 करोड़ रुपये की पहली किस्त दी
Image Source: Social Media
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Maharashtra: केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए महाराष्ट्र के ग्रामीण स्थानीय निकायों को 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत 717.17 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की है. यह राशि अप्रतिबंधित अनुदान के रूप में दी गई है, जिसका इस्तेमाल पंचायतें अपने इलाके की विशेष जरूरतों को पूरा करने के लिए कर सकती हैं. इस अनुदान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करना है.

कौन-कौन से निकायों को मिला अनुदान


इस अनुदान की राशि उन ग्रामीण निकायों को दी गई है, जिनका गठन कानून के तहत सही तरीके से हुआ है और जो पात्र श्रेणी में आते हैं.
इसमें शामिल हैं:
2 जिला पंचायतें
15 ब्लॉक पंचायतें
26,544 ग्राम पंचायतें
यह अनुदान सीधे उन निकायों के खाते में जमा किया गया है, ताकि वे इसे अपने विकास कार्यों के लिए तुरंत इस्तेमाल कर सकें.

अनुदान जारी करने की प्रक्रिया


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ग्रामीण निकायों के लिए अनुदान की सिफारिश पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) करते हैं।
वास्तव में धनराशि का आवंटन वित्त मंत्रालय द्वारा किया जाता है. एक वित्तीय वर्ष में यह अनुदान दो किस्तों में जारी किया जाता है, ताकि पंचायतों को स्थिरता के साथ अपने कार्यों को पूरा करने में आसानी हो.

अप्रतिबंधित अनुदान का इस्तेमाल


अप्रतिबंधित अनुदान का इस्तेमाल पंचायतें ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के अंतर्गत कर सकती हैं.
हालांकि इसका उपयोग वेतन या कर्मचारियों की लागत पर नहीं किया जा सकता.
यह राशि मुख्य रूप से पंचायतों को अपने इलाके की स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए दी जाती है. जैसे – सड़कों का सुधार, छोटे जल परियोजनाएं, सामुदायिक भवनों का निर्माण आदि.

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प्रतिबंधित अनुदान का इस्तेमाल


इसके अलावा कुछ धनराशि प्रतिबंधित अनुदान के रूप में दी जाती है, जिसका उपयोग केवल विशेष कार्यों के लिए ही किया जा सकता है.
 इनमें शामिल हैं:
ओपन डिफेकेशन फ्री (ODF) स्थिति का रखरखाव
घरेलू अपशिष्ट प्रबंधन
मल एवं कीचड़ प्रबंधन
पेयजल आपूर्ति
वर्षा जल संचयन
जल पुनर्चक्रण
इन पहलुओं से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और पानी की सुविधाओं को मजबूत किया जा सकता है.


ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ा कदम


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महाराष्ट्र के ग्रामीण निकायों को यह अनुदान मिलने से ग्रामीण अवसंरचना, स्वच्छता और जन-सेवाओं में सुधार की दिशा में बड़ा योगदान मिलेगा.
यह राशि पंचायतों को अपने इलाके की वास्तविक जरूरतों के अनुसार खर्च करने की स्वतंत्रता देती है.
इस तरह केंद्र और राज्य सरकार की यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और नागरिकों की जीवन-स्तर सुधारने में मददगार साबित होगी.

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