ईंधन संकट की आहट के बीच PM मोदी ने संभाली कमान, LPG से लेकर पेट्रोल-डीजल की सप्लाई के लिए बनाया तगड़ा प्लान
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े तनाव से वैश्विक ईंधन बाजार प्रभावित हुआ है. भारत में भी एलपीजी और पेट्रोल-डीजल को लेकर चिंता बढ़ी है. हालांकि पीएम मोदी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भरोसा दिलाया है कि अलग-अलग स्रोतों से आयात जारी है और ईंधन आपूर्ति सामान्य रहेगी.
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मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालात का असर अब पूरी दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है. कई देशों में ईंधन की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है. भारत भी इससे पूरी तरह अछूता नहीं है. देश में एलपीजी सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई को लेकर लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं.
हालांकि सरकार लगातार यह भरोसा दिला रही है कि फिलहाल देश में ईंधन की स्थिति सामान्य है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने खुद हालात की समीक्षा की और संबंधित मंत्रियों के साथ अहम बैठक की. इस बैठक का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर कम से कम पड़े.
सरकार ने बनाई आपूर्ति बनाए रखने की रणनीति
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने साफ किया कि भारत ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं. उन्होंने कहा कि भारत के ऊर्जा आयात अलग-अलग स्रोतों और अलग-अलग समुद्री मार्गों से जारी हैं. इसका मतलब यह है कि अगर किसी एक क्षेत्र में संकट पैदा होता है तो भी देश की ऊर्जा जरूरतों पर सीधा असर नहीं पड़ेगा. पुरी ने बताया कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को सीएनजी और पीएनजी की 100 प्रतिशत आपूर्ति मिलती रहे. वहीं उद्योगों को भी लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक गैस सप्लाई जारी रखने की योजना बनाई गई है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आम लोगों को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है और घरेलू उपयोग के लिए गैस की कमी नहीं होने दी जाएगी.
In today’s informal interaction with members of the media fraternity, we discussed that India’s energy imports are continuing to flow in from different sources and routes.
— Hardeep Singh Puri (@HardeepSPuri) March 10, 2026
We have taken steps to ensure that 100% supply of CNG & PNG to domestic consumers is ensured and other… pic.twitter.com/eDbbg1Vvue
अतिरिक्त एलएनजी कार्गो की तलाश
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत रखने के लिए भारत अब नए विकल्प भी तलाश रहा है. जानकारी के अनुसार सरकार मध्य पूर्व के बाहर के देशों से अतिरिक्त एलएनजी कार्गो सुरक्षित करने की दिशा में काम कर रही है. इससे आपूर्ति शृंखला को स्थिर बनाए रखने में मदद मिल सकती है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक केवल सप्लाई ही नहीं बल्कि शिपिंग मार्गों को लेकर भी नई रणनीति तैयार की जा रही है. अगर किसी समुद्री रास्ते में तनाव बढ़ता है तो वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल किया जा सकेगा. इस तरह सरकार पहले से ही संभावित संकट से निपटने की तैयारी कर रही है.
पीएम मोदी ने बुलाई उच्चस्तरीय बैठक
स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठक की. इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद रहे. बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का सामना न करना पड़े. दरअसल, भारत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा आयातक देश है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल का असर यहां की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. इसी वजह से सरकार पहले से ही समन्वय के साथ काम कर रही है ताकि आपूर्ति और कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके.
ऊर्जा आयात में विविधता पर जोर
सूत्रों के अनुसार भारत अब अपनी ऊर्जा खरीद को और ज्यादा विविध बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. देश अब कई अलग-अलग देशों से ऊर्जा संसाधन ले रहा है, जिनमें रूस, वेनेजुएला, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देश शामिल हैं. इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने में मदद मिल सकती है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी संभावित संकट की स्थिति में घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी. एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पाइप्ड रसोई गैस को प्राकृतिक गैस का उपयोग करने वाले अन्य क्षेत्रों से पहले उपलब्ध कराया जाएगा. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि घरों और परिवहन क्षेत्र में गैस की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहे.
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बहरहाल, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सतर्क और तैयार दिखाई दे रहा है. सरकार की कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर कम से कम पड़े और देश की ऊर्जा व्यवस्था स्थिर बनी रहे.
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