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दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम को मिली 10 दिन की अंतरिम जमानत, जेल के बाहर भी माननी पड़ेंगी ये शर्तें

5 साल से तिहाड़ जेल में बंद दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम को 10 दिनों के लिए कड़कड़नुमा कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी है. जमानत देते हुए कोर्ट ने क्या कहा और आधार क्या रहा? पूरी खबर में जानें

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09 Mar 2026
( Updated: 09 Mar 2026
05:58 PM )
दिल्ली दंगों के आरोपी शरजील इमाम को मिली 10 दिन की अंतरिम जमानत, जेल के बाहर भी माननी पड़ेंगी ये शर्तें

Delhi Riots Case Accused Sharjeel Imam Bail: दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगे से जुड़े कथित साजिश मामले में आरोपी शरजील इमाम को कड़कड़डूमा कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने शरजील इमाम को राहत देते हुए 10 दिन की अंतरिम जमानत मंजूर की है. 

अदालत ने यह जमानत उन्हें अपने भाई की शादी में शामिल होने और अपनी बीमार मां की देखभाल करने के लिए दी है. मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि शरजील इमाम के परिवार में उनके भाई की शादी तय है और घर में उनकी मौजूदगी जरूरी है. बताया गया कि शरजील इमाम की मां की तबीयत भी खराब है. परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने शरजील इमाम को 10 दिनों की अंतरिम जमानत देने का फैसला सुनाया. 

जमानत के साथ माननी पड़ेंगी कोर्ट की ये शर्तें

कोर्ट ने शरजील इमाम को शर्त के साथ जमानत दी है. बेल देते हुए कोर्ट ने शरजील इमाम से कहा कि वह इस दौरान मीडिया से संपर्क न करें और न ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें. उन्हें 20 से 30 मार्च तक के लिए जमानत मिली है. 

तिहाड़ जेल में कब से बंद हैं शरजील इमाम? 

दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम को 28 जनवरी, 2020 को अरेस्ट किया था. उन्हें दिल्ली दंगों की साजिश रचने और भड़काऊ भाषण देने के आरोपों में अरेस्ट किया गया था. आरोप है कि शरजील इमामल ने फरवरी 2020 में दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिंसा की साजिश रची थी. इस मामले में UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया गया है. शरजील इमाम के साथ उमर खालिद और कई अन्य लोगों पर भी इसी मामले में साजिशकर्ता होने का आरोप है.  इससे पहले, दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने शरजील की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. 

यह भी पढ़ें- जेल में ही रहेंगे उमर खालिद-शरजील इमाम… सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, एक साल तक नहीं कर सकेंगे बेल की अपील

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दिल्ली में हुए दंगे में कई लोगों की मौत हो गई थी और करीब 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. हिंसा की शुरुआत नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और NRC के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई थी. 

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