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बच्चों में एनीमिया के संकेत, समय रहते पहचानना क्यों है जरूरी?

बच्चे अक्सर अपनी मर्जी से काम करते हैं. कभी खाना कम खाते हैं, तो कभी खेल में इतने खो जाते हैं कि पढ़ाई की ओर ध्यान ही नहीं देते. लेकिन अगर आपका बच्चा लगातार कम खा रहा है, जल्दी थक जाता है, खेलने में रुचि नहीं लेता और पढ़ाई में भी पीछे रहने लगा है, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है.

बच्चों में एनीमिया के संकेत, समय रहते पहचानना क्यों है जरूरी?
Image Credits: IANS
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बच्चे अक्सर अपनी मर्जी से काम करते हैं कभी खाना कम खाते हैं, तो कभी खेलने में इतना मगन हो जाते हैं कि पढ़ाई-लिखाई की ओर ध्यान नहीं देते. लेकिन अगर आपका बच्चा लगातार कम खा रहा है, जल्दी थक जाता है, खेलने में रुचि नहीं दिखाता और पढ़ाई में भी पिछड़ने लगा है, तो इसे हल्के में न लें. 

क्या हो सकता है कारण?

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, ये लक्षण एनीमिया यानी खून की कमी की ओर इशारा कर सकते हैं. एनीमिया बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करता है. समय पर पहचान और सही पोषण से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है.

एनीमिया के मुख्य लक्षण

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, बच्चे के भोजन में विविधता लाएं. अगर बच्चा लगातार थकान महसूस कर रहा है या भूख नहीं लगा रही है तो डॉक्टर से जांच अवश्य करवाएं. रक्त परीक्षण से एनीमिया की पुष्टि हो सकती है. डॉक्टर की सलाह से आयरन की दवाइयां भी ली जा सकती हैं.

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कब डॉक्टर से मिलें?

नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, एनीमिया बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, लेकिन सही समय पर ध्यान और पौष्टिक आहार से इसे आसानी से रोका जा सकता है. एनीमिया मुख्य रूप से आयरन की कमी से होता है. इससे बच्चे की रक्त कोशिकाएं पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पातीं, जिसके कारण थकान, कमजोरी और भूख न लगना जैसे लक्षण दिखते हैं. अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो बच्चे का विकास रुक सकता है और पढ़ाई-लिखाई पर भी बुरा असर पड़ता है.

एनीमिया से बचाव कैसे करें?

ऐसी परिस्थिति में घबराने नहीं बल्कि लक्षण के साथ समाधान पर काम करना चाहिए. बच्चों में एनीमिया के मुख्य लक्षण की बात करें तो उन्हें जल्दी थकान महसूस होना, कम भूख लगना, पीला चेहरा और कमजोरी, ध्यान केंद्रित न हो पाना और बार-बार बीमार पड़ना है.

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एनीमिया से बचाव के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, सरसों का साग आदि बच्चों को रोजाना दें. ये आयरन का अच्छा स्रोत हैं. मूंग, चना, राजमा जैसी दलहन और अंकुरित अनाज आयरन और प्रोटीन से भरपूर होते हैं. इन्हें उनकी थाली में शामिल करें. विटामिन सी युक्त फल जैसे संतरा, मौसमी, आंवला, नींबू आदि को भी शामिल करें. विटामिन सी आयरन के अवशोषण में मदद करता है. मिल्क प्रोडक्ट दूध, दही और पनीर बच्चे के आहार में शामिल करें. अन्य स्रोत जैसे गुड़ आदि भी एनीमिया से बचाव में सहायक हैं.

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