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मौत से पहले चेतावनी देता है यूपी का यह रहस्यमयी मंदिर, जानिए बुढ़िया माई की चमत्कारी कहानी

मंदिर 600 साल पुराना है, लेकिन आस्था से प्रदेश के मंत्री और मुख्यमंत्री भी अछूते नहीं हैं. सीएम योगी कई बार मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे हैं. नवरात्रि के समय मंदिर में विशेष अनुष्ठान होते हैं, और भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए पैदल जंगल की यात्रा भी करते हैं.

मौत से पहले चेतावनी देता है यूपी का यह रहस्यमयी मंदिर, जानिए बुढ़िया माई की चमत्कारी कहानी

19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होने वाली है और शक्तिपीठ और सिद्धपीठ मंदिरों में नव दुर्गा के पूजन की तैयारी शुरू हो चुकी है.

देशभर में मां भगवती के कई चमत्कारी और सिद्धपीठ मंदिर मौजूद हैं, जिनकी मान्यताएं भक्तों को माता रानी की चौखट तक खींच लाती हैं, लेकिन क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है, जो मौत से पहले की चेतावनी देता है? यूपी के गोरखपुर में ऐसा मंदिर है, जो घटित होने वाली घटना के बारे में बताता है.

जंगल के बीच स्थित है बुढ़िया माई मंदिर

गोरखपुर के कुसम्ही जंगल में बुढ़िया माई मंदिर है, जो जिला गोरखपुर से 12 किलोमीटर दूर है. जंगल के बीचो-बीच होने के बावजूद भी मंदिर में नवरात्रि के मौके पर भक्त बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंचते हैं. माना जाता है कि सिद्धपीठ में शामिल बुढ़िया माई मंदिर काल का मंदिर है, जो अकाल मृत्यु को टालने की क्षमता रखता है और इसकी गवाह है मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा. स्थानीय लोक कथाओं की मानें तो मंदिर के पास एक पुल हुआ करता था, जो बड़े नाले पर बना था. नाले के पास एक दिन बारात आकर रुकी. वहां सफेद साड़ी में मौजूद बुढ़िया ने आकर पुल पर न जाने की सलाह दी, लेकिन बारात के लोग नहीं माने. जैसे ही बारात पुल के बीचों-बीच पहुंची, पुल टूटकर गिर गया और सभी बारातियों की मौत हो गई.

बारात और टूटा हुआ पुल: पौराणिक कथा

स्थानीय लोगों के मुताबिक, भविष्यवाणी के बाद बुढ़िया कहां गायब हो गई, किसी को नहीं पता. इसके बाद भी जंगल में रहने वाले जनजातीय लोगों ने बूढ़ी महिला को देखा, लेकिन वह एक पल में ओझल हो जाती थी. इसी पुल के पास आज भी बुढ़िया माई का मंदिर मौजूद है.

600 साल पुराना है मंदिर

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मंदिर 600 साल पुराना है, लेकिन आस्था से प्रदेश के मंत्री और मुख्यमंत्री भी अछूते नहीं हैं. सीएम योगी कई बार मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे हैं. नवरात्रि के समय मंदिर में विशेष अनुष्ठान होते हैं, और भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए पैदल जंगल की यात्रा भी करते हैं. इस मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को एक बड़ी नदी भी पार करनी होती है, जिसके लिए नाव का प्रबंधन रहता है. मंदिर तक पहुंचने के लिए शहर के मोहद्दीपुर चौराहे से ऑटो या जीप जैसे वाहन का सहारा ले सकते हैं. वाहन आपको एयरपोर्ट होते हुए कुसम्ही जंगल पहुंचाएगा.

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