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बृहस्पति देव की कृपा पाने के लिए ऐसे करें पूजा, पैसों से भर जाएगी तिजोरी, बस ये एक गलती मत कर देना

धर्म ग्रंथों में गुरुवार के दिन विधि-विधान से पूजा करने से जातक को धन, विद्या और वैवाहिक सुख-सौभाग्य में लाभ मिलता है. अगर किसी कारणवश कोई जातक इस दिन व्रत या फिर विधि-विधान से पूजा नहीं कर सकता, तो वे केवल बृहस्पति देव की कथा सुनें. ऐसी मान्यता है कि इस दिन केवल कथा सुनने मात्र से ही घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

बृहस्पति देव की कृपा पाने के लिए ऐसे करें पूजा, पैसों से भर जाएगी तिजोरी, बस ये एक गलती मत कर देना
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पौष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि गुरुवार दोपहर 1 बजकर 42 मिनट तक रहेगी. इसके बाद छठवीं तिथि लग जाएगी. साथ ही रवि योग का निर्माण हो रहा है. इस दिन सूर्य धनु राशि में और चंद्रमा कुंभ राशि में रहेंगे. 

किसी तिथि पर रवि योग बन रहा है

द्रिक पंचांग के अनुसार, गुरुवार के दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 1 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय दोपहर 1 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगा. इस तिथि पर रवि योग है, लेकिन कोई विशेष पर्व नहीं हैं.

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रवि योग एक शुभ योग माना गया है

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रवि योग एक शुभ योग माना गया है.यह तब बनता है जब चंद्रमा का नक्षत्र सूर्य के नक्षत्र से चौथे, छठे, नौवें, दसवें और तेरहवें स्थान पर होता है. इस दिन निवेश, यात्रा, शिक्षा या व्यवसाय से संबंधित काम की शुरुआत करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है.

क्या करें इस दिन जो मिले जीवन में सफलता 

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इसे सूर्य देव का विशेष योग माना जाता है, जहाँ सूर्य और चंद्रमा की स्थिति अनुकूल होती है. हालांकि, शास्त्रों में इस दिन कुछ उपाय करने के लिए भी बताया गया है. इस योग में सूर्य देव को प्रसन्न करने, धन-धान्य, ऊर्जा और आत्मविश्वास के लिए सूर्य को 'ॐ सूर्याय नमः' जल अर्पण (अर्ध्य) दें, और लाल वस्त्र/गुड़/गेहूं का दान, व्रत और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना जैसे उपाय किए जाते हैं, जिससे जीवन में सफलता, समृद्धि और दोषों से मुक्ति मिलती है.

गुरुवार के दिन विधि-विधान से पूजा करने से क्या लाभ मिलेगा

इसी के साथ ही इस तिथि पर गुरुवार का दिन भी पड़ रहा है. धर्म ग्रंथों में गुरुवार के दिन विधि-विधान से पूजा करने से जातक को धन, विद्या और वैवाहिक सुख-सौभाग्य में लाभ मिलता है. अगर किसी कारणवश कोई जातक इस दिन व्रत या फिर विधि-विधान से पूजा नहीं कर सकता, तो वे केवल बृहस्पति देव की कथा सुनें. ऐसी मान्यता है कि इस दिन केवल कथा सुनने मात्र से ही घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

गुरुवार का व्रत रखते वक्त इस बात रखे विशेष ध्यान

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वहीं, इसकी शुरुआत किसी भी शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से कर सकते हैं और 16 गुरुवार तक व्रत रखकर उद्यापन कर दें. वहीं, जो व्यक्ति व्रत रखें वे हो सके तो पीले वस्त्र धारण जरूर करें. साथ ही पीले फल-फूलों का दान करना चाहिए, लेकिन इस बात का विशेष ध्यान रहे कि पीली चीजों का सेवन न करें.

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