×
जिस पर देशकरता है भरोसा

बैंक धोखाधड़ी मामला: सीबीआई कोर्ट ने बैंक फ्रॉड केस में यूनियन बैंक मैनेजर मनोज श्रीवास्तव को सुनाई 4.5 साल की सजा

सीबीआई के अनुसार, आरोपी ने कौशल किशोर शर्मा और सुरेन्द्र कुमार शुक्ला के साथ मिलकर फर्जी व जाली दस्तावेजों के आधार पर 15 नवंबर 2008 को 40 लाख रुपए का ऋण मंजूर किया. इससे बैंक को नुकसान पहुंचा.

Author
22 Nov 2025
( Updated: 11 Dec 2025
05:18 AM )
बैंक धोखाधड़ी मामला: सीबीआई कोर्ट ने बैंक फ्रॉड केस में यूनियन बैंक मैनेजर मनोज श्रीवास्तव को सुनाई 4.5 साल की सजा
Advertisement

गाजियाबाद में सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को बैंक धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर मनोज श्रीवास्तव को दोषी करार देते हुए चार साल छह महीने की सजा सुनाई. कोर्ट ने उस पर 30,000 रुपए जुर्माने लगाया है.

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में धोखाधड़ी का मामला 

यह मामला लगभग 15 साल पुराना है, जिसकी जांच और कार्रवाई लंबे समय तक चलती रही. सीबीआई ने 14 दिसंबर 2010 को मनोज श्रीवास्तव समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. आरोप था कि मई 2007 से जून 2009 के बीच नोएडा स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एसएसआई शाखा में ब्रांच मैनेजर रहते हुए मनोज श्रीवास्तव ने अपने पद का दुरुपयोग किया और निजी लाभ के लिए साजिश रची थी.

Advertisement

आरोपी ने जाली दस्तावेजों के आधार दिया 40 लाख रुपए का ऋण

सीबीआई के अनुसार, आरोपी ने कौशल किशोर शर्मा और सुरेन्द्र कुमार शुक्ला के साथ मिलकर फर्जी व जाली दस्तावेजों के आधार पर 15 नवंबर 2008 को 40 लाख रुपए का ऋण मंजूर किया. इससे बैंक को नुकसान पहुंचा.

सीबीआई की जांच के बाद 29 सितंबर 2012 को मनोज श्रीवास्तव, कौशल किशोर शर्मा और सुरेन्द्र कुमार शुक्ला के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में पेश सबूतों और गवाही को परखते हुए यह पाया गया कि आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग किया और बैंक की प्रक्रियाओं को दरकिनार कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण स्वीकृत किया.

यूनियन बैंक मैनेजर को सुनाई 4.5 साल की सजा

सुनवाई में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अदालत के सामने अपना अपराध स्वीकार किया. इसके बाद सीबीआई एंटी-करप्शन कोर्ट, गाजियाबाद ने मनोज श्रीवास्तव को दोषी मानते हुए सजा सुना दी.

Advertisement

अदालत ने कहा कि लोक सेवक की ओर से इस तरह का गंभीर आर्थिक अपराध वित्तीय संस्थानों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आवश्यक है ताकि ये लोग कोई अपराध करने से पहले सोचें.

टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें